ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे: आंसुओं की दुनिया

किसी शायर ने कहा भी है- ‘एक आंसू कह गया सब हाल दिल का, मैं समझा था ये जालिम बेजुबां है।’ जो कुछ रोकर आंसुओं के माध्यम से कहा जा सकता है वह अच्छे से अच्छा वक्ता घंटों बोल कर भी नहीं बता सकता।

Author Updated: August 12, 2019 4:50 AM
जिस व्यक्ति का दिल जितना कोमल होता है, वह उतना ही ज्यादा रोता है।

सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी

किसी शायर ने कहा है- ‘यों ही आंखों में आ गए आंसू, जाइए आप, कोई बात नहीं।’ कविता और शायरी में चीजों को कमतर करके देखना या बढ़ा-चढ़ा कर पेश करना या अनदेखा करने का चलन है। दरअसल, आंखों में यों ही आंसू नहीं आते। आंसुओं के आने का कोई सबब होता है, कोई वजह होती है। हर आंख में आंसू आ जाने की वजह दूसरों से अलग होती है। कुछ लोग हैं जिनकी आंखों में दूसरों का दुख-दर्द या तकलीफ देख कर आंसू आ जाते हैं। ये आंसू उन्हें दु:खी लोगों के करीब ले जाते हैं और वे उनके साथ जुड़ जाते हैं। कुछ लोग ऐसे हैं जिनकी आंखें अचानक ही बहुत खुशी मिलने पर भर आती हैं। यानी अधिक खुशी मिलने पर भी आंखों से आंसू झरने लगते हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो अपनी सतत् उपेक्षा देख कर द्रवित हो उठते हैं और इस कारण उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। तो कुछ अपना सम्मान होते देख कर या तरीफ सुन कर इतने विह्वल हो जाते हैं कि उनकी आंखों से जार-जार आंसू बहने लगते हैं।

खुद को असहाय या हताश पाकर भी लोगों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। हंसते-हंसते रो देते और रोते-रोते हंस देने वाले भी मैंने देखे हैं। लेकिन कलात्मक रुझान वाले लोग अच्छी कलाकृति देखने या अच्छी अभिव्यक्ति या प्रस्तुति पाने पर रोने लगते हैं। बनार्ड शॉ करते थे कि अगर कोई चीज उनकी आंखों को आंसुओं से भर देती है तो वह है किसी भाव का सुंदर तरीके से अभिव्यक्त किया जाना। एक सुंदर वस्तु अगर सुंदर तरीके से अभिव्यक्त की जाए तो उसे देख कर किसी भी साहित्य अनुरागी की आंखों से आंसू झरने लगेंगे। फिर भले वह चित्र हो या नृत्य, गायन या कविता, शायरी। मृत्यु के समय भी लोग रोते हैं, पर वे आंसू दुख के होते हैं।

रोना कितना जरूरी है, यह हम सभी जानते हैं। टेनिसन की कविता ‘होम दे ब्राट हर वॉरियर डेड’ में जब मृत योद्धा की दुखी पत्नी काफी देर तक चुप रहती है तो उसे रुलाने की कोशिश की जाती है, ताकि वह सामान्य हो सके। यानी आंख में आंसू आना परिस्थिति, मनोस्थिति और व्यक्ति के अपने स्वभाव और मानसिकता पर निर्भर करता है। रोना एक सहज और स्वाभाविक मानवीय प्रक्रिया है। आंसू दिल की गहराई से महसूस किए गए भाव से फूटते हैं।

ऐसी स्थिति भी बनती है जब दुख के अतिरेक में यानी अत्यधिक दुख की स्थिति में अधिक रोते-रोते आंसू भी सूख जाते हैं और आंखें बिना पानी की नदी जैसी हो जाती हैं। इस स्थिति को खुमार बाराबंकवी ने अपने शेर में बखूबी बयान किया है- ‘रफ्तार-ए-गम का जोर नहीं है जो था मगर, अब अश्क ही नहीं है बहाने के वास्ते।’ यह गम यानी तकलीफ की इंतिहा है। आपने खलनायक और खलनायिकाओं द्वारा शरारत की खातिर बहाए जाने वाले नकली आंसू भी देखे ही होंगे। किस खूबसूरती से वे नजर बचा कर आंसुओं को हाथ की उंगली से पोंछ कर जमीन पर छिड़कते हैं और बताते हैं कि असलियत क्या है। लेकिन हम ऐसे नकली आंसुओं का भी जिक्र क्यों करें? बेहतर होगा हम अपने आप और सहज रूप से आंखों में आने वाले शुद्ध आंसुओं तक ही सीमित रहें जो इंसान की संवेदना के परिचायक हैं।

अंतर्मन और नैसर्गिक रूप से किसी स्मृति घटना से प्रेरित होकर उमड़ने वाले आंसुओं का भी अपना स्वभाव और भौतिक विशेषताएं हैं। स्वाद की द़ृष्टि से आंसू पसीने की मानिंद खारे और नमकीन होते हैं। जो पसीने का स्वाद जानता है, वह आंसुओं का स्वाद भी जानता ही है। लंबे समय तक रोते रहने वालों की आंखें सूजती तो हैं ही, उनकी पलकों के बाहर आसपास सफेद परत भी जम जाती हैं। यों आंसू जरूरी भी हैं। कम से कम आंखें साफ और उजली हो जाती हैं। कुछ लोग यह भी करते हैं कि रोने से फेफड़ों की कसरत हो जाती है।

रोने से दिल हल्का होता है, दिमाग का भारीपन दूर होता है और मनुष्य सामान्य हो जाता है। दूसरों के साथ बांटने से निजी भारीपन तो दूर होता ही है, व्यक्ति की सामाजिक चेतना का भी विस्तार होता है। आंसुओं की भी अपनी दुनिया है। जिस व्यक्ति का दिल जितना कोमल होता है, वह उतना ही ज्यादा रोता है। वह बेहिचक सार्वजनिक रूप से अपनी संवेदना प्रकट करता है। वह यह नहीं सोचता कि लोग क्या कहेंगे। मैंने बड़े बड़े अफसरों, नेताओं, कलाकारों और विद्वानों को विभिन्न मौकों पर सार्वजनिक रूप से रोते हुए देखा है।

आंसुओं की क्षमता असीमित है। एक आंसू बहुत कुछ क्या, सब कुछ कह देने की क्षमता रखता है। बस समझ की गहराई और संवेदनशीलता चाहिए। किसी शायर ने कहा भी है- ‘एक आंसू कह गया सब हाल दिल का, मैं समझा था ये जालिम ेबेजुबां है।’ जो कुछ रोकर आंसुओं के माध्यम से कहा जा सकता है वह अच्छे से अच्छा वक्ता घंटों बोल कर भी नहीं बता सकता।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 दुनिया मेरे आगे: निज भाषा
2 दुनिया मेरे आगेः रिवायत की लीक
3 दुनिया मेरे आगे: यादों में जुगनू