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दुनिया मेरे आगे: प्रतिभा के मंच

सोशल मीडिया ऐसी सामग्री का अड्डा बन रहा है, जहां फैली नकारात्मक खबरें समाज में खून-खराबे का कारण तक बन रही हैं।

Author Published on: September 17, 2019 1:38 AM
सांकेतिक तस्वीर।

मोनिका शर्मा

पिछले दिनों सोशल मीडिया में खूब प्रचारित हुए एक वीडियो ने भीख मांगने वाली एक महिला का जीवन बदल दिया। कोलकाता के रेलवे स्टेशन पर गाना गाने वाली इस महिला का किसी शख्स ने वीडियो बना कर सोशल मीडिया की दुनिया में प्रसारित कर दिया। इसके बाद लाखों लोगों द्वारा साझा किए गए इस वीडियो को देख कर मुंबई से एक संगीत कंपनी कोलकाता पहुंची और उसने उसके गानों का एल्बम बनाने के बारे में सोचा। सोशल मीडिया में ही बदली और निखरी छवि में लोगों को दिख रही यह महिला अब फिल्मी दुनिया के जाने-माने संगीतकार के साथ अपने गाने रिकॉर्ड कर रही है। इतना ही नहीं, वीडियो में अपनी मां को पहचान कर उस महिला की दस साल पहले खोई बेटी भी वापस मिल गई।

यह अकेला मामला नहीं है जब सोशल मीडिया के ऐसे सकारात्मक और सार्थक इस्तेमाल की बानगी सामने आई है। इस मायावी दुनिया के जरिए कभी किसी परिवार से बिछड़े बच्चे को मिलवाने की तो कभी किसी प्रतिभा को मंच दिलवाने की खबरें भी कभी-कभार आती रहती हैं। कुछ समय पहले महाराष्ट्र का एक किसान भी ‘बालीराजा’ नाम से वाट्सऐप ग्रुप बना कर चर्चा में आया था। इस समूह में उनके साथ महाराष्ट्र के अलावा, हरियाणा, पंजाब, ओडीशा, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान भी जुड़े हैं। इस ग्रुप के जरिए खेती-किसानी से जुड़ी नई तकनीकों और जानकारियों का लाभ किसानों को मिल रहा है। देखने में आ रहा है कि साहित्य से जुड़े संवाद से लेकर गृहिणियों की रोजमर्रा की समस्याओं तक के लिए फेसबुक और वाट्सऐप जैसे आभासी मंचों पर कई समूह बने हुए हैं, जहां सकारात्मक संवाद होता है। अपने अनुभव साझा कर एक-दूसरे को मार्गदर्शन दिया जाता है। अपने-आप तक सिमटे कितने ही लोगों का हुनर देश ही नहीं, दुनिया तक पहुंचता है।

हालांकि आजाद अभिव्यक्ति के नाम पर हर सीमा को पार कर कुछ भी कहने की प्रवृत्ति भी सबसे ज्यादा सोशल मीडिया में ही देखने को मिल रही है। कभी लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने के रूप में अस्तित्व में आए ये साझा मंच आज अराजक चरित्र वाले माध्यम बन गए हैं। इसके चलते अभिव्यक्ति अब कोलाहल बन रही है। दुनिया से जोड़ने वाला यह माध्यम अपनों से ही दूर कर रहा है। तकनीक जीवन को सुविधाजनक और सरल बनाने के ही लिए है। यह सुविधा अब हमारी मुट्ठी में है। ऐसे में सूचनाओं को साझा करने और अपने विचार रखने की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले इन साधनों को इस्तेमाल करने का तरीका इनके सदुपयोग या दुरुपयोग को तय करता है। तकनीक के साथ भी स्याह और उजला, दोनों ही पहलू जुड़े हुए हैं। इसे सनक बना लेने के खामियाजे भी हैं और आत्मनियंत्रण के साथ सदुपयोग करने के सकारात्मक परिणाम भी।

दरअसल, सोशल मीडिया ने इस संसार के लिए ‘ग्लोबल विलेज’ की अवधारणा को हकीकत बना दिया है। क्लिक भर में खबरें, तस्वीरें और जानकारियां दुनिया भर में पहुंच जाती हैं। कमोबेश हर आभासी मंच के जरिए हजारों भ्रामक वीडियो आए दिन लोगों तक पहुंचते हैं। माइक्रोसॉफ्ट द्वारा दुनिया के बाईस देशों में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक चौंसठ फीसदी भारतीयों को फर्जी खबरों का सामना करना पड़ता है। गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा सत्तावन प्रतिशत है। अफसोस कि यह समस्या और बढ़ रही है। नतीजतन, हमारे यहां सोशल मीडिया की वजह से अपराध भी बढ़ रहे हैं और अकेलापन भी। ऐसे में इन मंचों का सकारात्मक इस्तेमाल एक नई उम्मीद जगाता है।

दुखद है कि हाल के वर्षों में सोशल मीडिया केवल फर्जी समाचार फैलाने, द्वेष भरी टिप्पणियां करने और किसी की छवि बिगाड़ने के लिए ही सुर्खियों में आया। यहां साझा की जाने वाली चीजों के साथ एक उन्माद भी जुड़ गया, जिसके चलते न किसी की निजता का मान करने की सोची जा रही और न ही अफवाहें फैलाने में कोई हिचक है। इसीलिए खुद की जिंदगी से जुड़ा कोई पहलू हो या औरों से संबंधित कोई सूचना, उसे फैला देना एक शगल बन गया। कभी भीड़ को कातिल बनातीं अफवाहें तो कभी फर्जी तस्वीरों से किसी चर्चित चेहरे की छवि बिगाड़ना। कभी किसी जीते-जागते सितारे की मौत की खबर फैला देना तो कभी विचार साझा करने के मंचों पर महिलाओं को ट्रोल किया जाना।

सोशल मीडिया ऐसी सामग्री का अड्डा बन रहा है, जहां फैली नकारात्मक खबरें समाज में खून-खराबे का कारण तक बन रही हैं। वाट्सऐप पर फैली बच्चा चोरी की अफवाहों के चलते कई लोगों की जान ले ली गई। अफसोस कि आभासी दुनिया में फैली ऐसी अफवाहों पर लोग विश्वास भी कर लेते हैं। ऐसे में गिनती की सही, पर ऐसी खबरें वाकई सुकूनदायी हैं कि इन आभासी मंचों के जरिए बेहतरी लाने वाले प्रयास भी किए जा सकते हैं। एक वायरल वीडियो किसी का जीवन संवार दे सकता है। दूरदराज के गांवों में बैठे किसान कृषि से जुड़ी जानकारियां हासिल कर सकते हैं। कोई गृहिणी अपने घर से काम करते हुए उसका प्रचार-प्रसार कर सकती है, किसी की प्रतिभा को पहचान मिल सकती है।

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