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दुनिया मेरे आगे: अनजाने का अंदेशा

नील आर्मस्ट्रांग, बज अल्ड्रिन और माइकल कॉलिंस पूरी दुनिया में जाने-पहचाने नाम बन गए। धरती पर लौटने पर दुनियाभर के देशों में उनका भव्य स्वागत किया गया।

Author Published on: August 1, 2019 2:11 AM
अमेरिकियों ने उस दुखद घटना से निपटने की भी तैयारी कर रखी थी।

चंद्रकुमार

पिछले दिनों बीता सप्ताह मानव के चांद पर पहुंचने के पचासवें वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। अमेरिका और रूस के बीच अंतरिक्ष और फिर चांद पर पहुंचने की होड़ तब चरम पर थी। अंतरिक्ष में मानव को पहुंचा कर वापस धरती पर सुरक्षित लाने में जहां रूस ने बाजी मारी, वहीं चांद पर मानव को सफलतापूर्वक पहुंचाने और सुरक्षित धरती पर लाने का श्रेय अमेरिका को मिला। दोनों देशों की होड़ या कहें प्रयासों से मानव जाति को नए आयाम मिले। अमेरिका का अपोलो अभियान इस मायने में महत्त्वपूर्ण माना जा सकता है कि एक परीक्षण उड़ान के दौरान तीन अंतरिक्ष यात्रियों को यान में ही जल कर खाक होते देखने के बावजूद ‘नासा’ ने यह अभियान जारी रखा और आखिरकार चांद पर अमेरिकी झंडा फहराने में कामयाबी पाई। उस वक्त दुनिया की खुशी का अंदाजा ही लगा सकते हैं, जब परियों की कथाओं को हकीकत बनाते हुए हमने चांद पर कदम रखा।

चांद पर पहुंचने के बाद नील आर्मस्ट्रांग ने इसे ‘मानव का एक छोटा कदम और मानवता के लिए एक बड़ी छलांग’ कहा। इस सफलता ने अंतरिक्ष विज्ञान में हमारी दिलचस्पी बढ़ा दी। नील आर्मस्ट्रांग, बज अल्ड्रिन और माइकल कॉलिंस पूरी दुनिया में जाने-पहचाने नाम बन गए। धरती पर लौटने पर दुनियाभर के देशों में उनका भव्य स्वागत किया गया। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के लिए यह अपने पूर्ववर्ती जॉन एफ केनेडी के उस सपने को साकार होते देखना था, जिसकी सार्वजनिक घोषणा केनेडी ने सन 1962 में ही कर दी थी। अंतरिक्ष अभियानों के खतरे भी बड़े होते हैं। लांच पैड से उठते ही यान के जल कर खाक होने का सामना तो ‘नासा’ अपनी एक परीक्षण उड़ान में कर ही चुका था, लेकिन बीच रास्ते किसी अनदेखी अनहोनी, यान का नियंत्रण खोना या यान से संपर्क टूटना, चंद्रमा की सतह पर उतरते वक्त कोई दुर्घटना या ऐसी ही अनेक परिस्थितियों का सामना करना अभी बाकी था। इसलिए मिशन-कंट्रोल दल पल-पल की खबर ले रहा था, ताकि अपने जांबाजों को सकुशल वापस लाया जा सके। इसे चमत्कार ही माना जाए कि जिस तरह कागज पर पूरी योजना बनाई गई, असल अभियान उसी के अनुरूप सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

हाल ही में कुछ गोपनीय दस्तावेजों के सामने आने से खुलासा हुआ है कि राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के लिए भाषण लिखने वाले विलियम सैफायर ने एक संदेश अनजाने अंदेशे को ध्यान में रख कर भी लिखा था। अगर किसी कारणवश नील आर्मस्ट्रांग और बज अल्ड्रिन का चंद्रयान चंद्रमा की सतह से वापस उड़ान न भर पाता या अपने अंतरिक्ष यान से न जुड़ पाता तो उस स्थिति में उनका पृथ्वी पर लौटना मुमकिन नहीं होता। चंद्रमा पर फंसे रहने पर उनके पास इतने साधन नहीं होते कि वे ज्यादा दिन जीवित रह पाते। उन्हें वहां तड़प कर मरना होता। तब देशवासियों, आर्मस्ट्रांग और अल्ड्रिन के परिवारों को राष्ट्रपति निक्सन द्वारा सांत्वना देने के लिए एक भावपूर्ण संदेश तैयार कर अमेरिकियों ने उस दुखद घटना से निपटने की भी तैयारी कर रखी थी। लेकिन उनकी सकुशल वापसी ने वह अंदेशा खत्म कर दिया।

अंतरिक्ष अभियान जैसे बेहद जोखिम भरे कार्यों में त्रुटिरहित और वैकल्पिक योजनाओं के बावजूद अंदेशा बना रहता है। यह बिल्कुल हमारे जीवन जैसा ही है, जहां अगले पल तक का हमें पता नहीं होता। लेकिन क्या कभी हम अपने जीवन में अनजाने अंदेशों को स्वीकार कर इस तरह योजनाएं बना पाते हैं कि किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें? मानवता की बड़ी छलांग माने जाने वाले इस अभियान से हमें बेहतरीन तैयारी, जबर्दस्त मानसिक ताकत, प्रतिकूलताओं से भिड़ने का जज्बा और अपनी सोच को साकार होते देखने जैसे अनेक सुखद परिणाम मिलते हैं। अगर हम ठान लें और पूरी शिद्दत से तैयारी करें तो असंभव कुछ भी नहीं होता।

हमें जो भय पीछे खींचता है, वह दरअसल उस अनजाने का अंदेशा है, जिसे हम अपनी योजना में शामिल नहीं करते। विकट परिस्थितियों में मानसिक बल द्वारा हमें अपने भय पर विजय पानी होगी, तभी हम असीम सुख प्राप्त कर पाएंगे। अशांत मानसिक अवस्था हमें न केवल कमजोर कर देती है, बल्कि हमारी ऊर्जा भी उस सोच में खपा देती है, जिसका हासिल कुछ नहीं होता। जीवन में किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए हमें अपनी आंतरिक ऊर्जा के स्रोत को हर हाल में बचाए रखना होगा और उसी के लिए अनजाने अंदेशों को हकीकत मान कर उनसे सामना करने का हौसला हासिल करना होगा। मानसिक संबल किसी भी तरह के संताप को समाप्त करने का सबसे बड़ा हथियार है। विषमताओं और विकट परिस्थितियों का सामना किए बिना हमें कभी भी अपने जीवन का श्रेष्ठ हासिल नहीं होता। जीवन के असमतल, अनदेखे, अनजाने मैदान को फतह करने का अगर कोई एक सूत्र है तो वह अंदेशों के पार झांक कर उस पर काबू पाने की क्षमता ही होगी जो हमें असीम मात्रा में प्राप्त है। हमें बस अपने आगे आ रहे अवरोधों को पार करना होगा।

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