ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे: बिखरता बसेरा

अब नौबत यह है कि ऐतिहासिक शहर शिमला कभी गाड़ियों के धुएं में सांस लेता है तो कभी पानी की कमी से प्यासा ही रह जाता है।

Author Published on: September 20, 2019 2:18 AM
सांकेतिक तस्वीर।

संजय ठाकुर

आधुनिकता की तेज-रफ्तार आंधी एक ऐतिहासिक शहर की प्राकृतिक सुंदरता को बहा ले गई। कभी देश की राजधानी होने का गौरव हासिल कर चुका यह शहर मुल्क की आजादी का भी गवाह है। आजादी से लेकर देश के भविष्य से जुड़े कई अहम फैसले यहीं लिए गए थे। ये बातें पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के बारे में हैं। एक गौरवपूर्ण इतिहास निश्चित रूप से यहां रहने वाले किसी भी व्यक्ति को गद्गद कर सकता है, लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी है। इस शहर पर लोगों की आंखें कुछ ऐसी पड़ीं कि हर कोई इसे एक स्थायी आश्रय-स्थल के रूप में देखने लगा। इस तरह से शुरू हुई अंधाधुंध भवन-निर्माण की होड़! मौके का फायदा उठाते हुए यहां के स्थायी निवासियों ने भी अपने कब्जे की जमीन बेच कर चांदी बटोरने का सिलसिला शुरू किया। उनकी इस जुगत में शिमला शहर छोटे-छोटे भूखंड में बंट कर एक कंक्रीट का जंगल बनता चला गया।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस तरह के बहुत-से मामलों की जानकारी प्रदेश सरकार को भी रही है, लेकिन कभी भी दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। क्या इसकी वजह यह रही कि सरकार में बैठे लोगों के लिए भवन-निर्माण एक धंधे की तरह रहा? भवन-निर्माण के कारोबार से जुड़े ठेकेदारों को भवन-निर्माण की खुली छूट मिली रहे, इसके लिए सरकार ने यहां भवन-निर्माण के संबंध में कभी भी कोई ठोस नीति नहीं बनाई, जिसका खमियाजा यहां के आम लोग आज तक भुगत रहे हैं।

ऐसी किसी भी नीति के अभाव में हिमाचल प्रदेश में तीस हजार से भी ज्यादा भवन ऐसे हैं जो कई दशकों से नियमितीकरण की बाट जोह रहे हैं। इन भवनों को लोगों ने बनाया तो अपनी ही जमीन पर है, लेकिन फिर भी ये अवैध कहे जाते हैं। कई वर्षों से शिमला भू-माफिया के जाल में कुछ इस तरह फंसा है कि अब यहां तिल धरने की भी जगह नहीं बची है। भू-माफिया का यह कारोबार फैलता गया। अब तो स्थिति यह है कि शिमला शहर में जगह-जगह गाड़ियों और लोगों का जमघट-सा लगा रहता है।

वर्तमान समय में शिमला शहर में जितने लोग रह रहे हैं उतने लोगों को ध्यान में रख कर तो इसे बसाया ही नहीं गया था। आजादी से पहले ब्रिटिश राज में यहां सिर्फ पच्चीस हजार लोगों के रहने की दृष्टि से शहर की संरचना तैयार की गई थी। मगर आज इस शहर पर क्षमता से दस गुणा से भी ज्यादा दबाव है। हिमाचल प्रदेश सरकार और नगर निगम शिमला द्वारा इसके साधन और संसाधन भी इतने विकसित नहीं किए गए कि इस शहर में ढाई-तीन लाख लोगों को रहने की सुविधाएं जुटाई जा सकें।

यहां तक कि शहर की ज्यादातर आबादी को पानी की आपूर्ति आज भी उसी स्रोत और माध्यम द्वारा की जा रही है, जिन्हें कभी अंग्रेजों ने स्थापित किया था। नगर निगम शिमला की पानी की आपूर्ति की कुछ छिटपुट योजनाएं अवश्य हैं, लेकिन वे शुरू होने से पहले ही हांफ जाती हैं। शिमला की सड़कों पर एक दिन में हजारों वाहन दौड़ते हैं, लेकिन शासन और प्रशासन द्वारा न तो सड़कों को विकसित किया गया है और न ही पार्किंग की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। ऐसे में जगह-जगह घंटों तक लगने वाले ट्रैफिक-जाम आम बात हैं।

शिमला शहर में जमीन ज्यादातर भवन-निर्माण के लिए ही बेची और खरीदी गई। भवन-निर्माण का काम तो हुआ, लेकिन इतना अव्यवस्थित और बेतरतीब कि भवन रहने के लिए सुरक्षित स्थान के बजाय ऐसे ‘चैंबर’ बन कर रह गए जहां कई तरह की असुरक्षा का खतरा बना हुआ है। यहां कई भवन तो ऐसे बनाए गए हैं कि ‘अब गिरा-अब गिरा’ की हालत पैदा हो जाती है। भवन-निर्माण के सामान्य नियमों को ताक पर रख कर ऐसी-ऐसी जगह भवन-निर्माण किया गया है जो किसी भी लिहाज से सुरक्षित नहीं। पहाड़नुमा इन भवनों तक पहुंचने के लिए 75-80 अंश पर बनी सीढ़ियों से गुजरना पड़ता है। जरा-सी भी चूक से किसी का पैर फिसला तो फिर जान बचनी मुश्किल!

शिमला को इस बदतर स्थिति में पहुंचने से बचाया जा सकता था, अगर इस दिशा में कुछ किया गया होता। भवन-निर्माण पर रोक इसका एकमात्र हल था, लेकिन बीते समय में बात कुछ इस कदर बिगड़ी है कि बात बनना अब मुश्किल है। यह कहना गलत नहीं होगा कि पानी सिर से ऊपर हो चुका है। जमीन के सौदे कोई पर्दे के पीछे की बात नहीं थे। सभी के सामने यह कारोबार किया गया।

जमीन की इस तिजारत को सरकार और प्रशासन के नाकारा रवैये की हवा मिली। अब नौबत यह है कि ऐतिहासिक शहर शिमला कभी गाड़ियों के धुएं में सांस लेता है तो कभी पानी की कमी से प्यासा ही रह जाता है। इस तरह प्राकृतिक सौंदर्य की खूबसूरती का शहर शिमला एक अव्यवस्थित बसेरा बन कर रह गया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 दुनिया मेरे आगे: हाशिये पर विवेक
2 दुनिया मेरे आगे: प्रतिभा के मंच
3 दुनिया मेरे आगे: पानी पर लिखी कहानी