ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे: सेहत की सवारी

यह सब जानते हैं कि दिल्ली समेत भारत के अन्य शहरों की आबोहवा किस कदर जहरीली हो चुकी है।

Author Published on: December 10, 2019 2:54 AM
भारत में लोग साइकिल की सवारी को गरीबों एवं पिछड़ों की सवारी मानते हैं, जबकि दुनिया के अन्य देशों में यह समृद्ध और समझदार लोगों की सवारी माना जाता है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण से संबंधित समस्याओं में लगातार बढ़ोतरी ने हमारा जीना दूभर कर दिया है। देश-दुनिया के लोग खुद को स्वस्थ रखने के लिए अपने ऊपर लाखों रुपए खर्च कर रहे हैं। हम अपने शरीर को सुंदर और स्वस्थ बनाए रखने के लिए सुबह-शाम जिम में पसीना बहाते हैं और फिर कार में बैठ कर दफ्तर जाते हैं। अगर हम इन आदतों को बदल लें तो मुफ्त में अपने शरीर को निरोग बना सकते हैं और अपने पर्यावरण को भी स्वच्छ बनाए रख सकते हैं। लेकिन इसके जो उपाय हैं, उन पर गौर करना बहुत सारे लोगों को जरूरी नहीं लगता है।

दरअसल, भारत में लोग साइकिल की सवारी को गरीबों एवं पिछड़ों की सवारी मानते हैं, जबकि दुनिया के अन्य देशों में यह समृद्ध और समझदार लोगों की सवारी माना जाता है। एक परिचित सज्जन से बात कर रहा था तो बातचीत के मुख्य विषय के बीच में उन्होंने कहा कि साइकिल की सवारी हमारी उम्र को दस साल तक बढ़ा देती है। मुझे नहीं मालूम कि उन्होंने इस पर कोई शोध किया है या नहीं, लेकिन मैं यह विश्वासपूर्वक कह सकता हूं कि साइकिल की सवारी सबको निरोग या स्वस्थ बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि साइकिल इक्कीसवीं सदी का सबसे अच्छा और सस्ता वाहन है। साइकिल की घंटी की टन्न-टन्न, टन्न-टन्न की मधुर ध्वनि मन को शांति और काफी राहत देती है।

यह सब जानते हैं कि दिल्ली समेत भारत के अन्य शहरों की आबोहवा किस कदर जहरीली हो चुकी है। स्वच्छ जल और साफ भोजन के बाद अब स्वच्छ वायु भी मयस्सर होना मुश्किल हो चुका है। शहरों की सड़कों पर सांय-सांय की तेज रफ्तार से चलती गाड़ियां एक साथ ध्वनि और वायु प्रदूषण फैला रही हैं। कार और अन्य वाहनों के साइलेंसर से निकलने वाला अनदेखा धुंआ चुपचाप वायु को विषैला बना रहा है। यह हमारे स्वास्थ्य को बहुत हद तक प्रभावित करता है।
वहीं साइकिल एक ऐसा सस्ता और टिकाऊ वाहन है, जिसे चलाने से न तो हवा में जहर फैलता है और न ही उसके हार्न की तेज आवाज से किसी राहगीर के कान का परदा फटने का डर रहता है। लेकिन शहरों में जिंदगी की आपाधापी और उपभोक्तावाद की संस्कृति ने शहरों की सड़कों पर से साइकिल को गायब कर दिया है। यहां की अधिकतर आबादी अब साइकिल की सवारी से मुंह फेरने लगी है। वहीं गांव में मेरे एक रिश्तेदार को शादी में तोहफे में मिला काफी पहले का साइकिल आज भी आकर्षण का केंद्र बना रहता है। चालीस साल बीत जाने पर भी वह साइकिल एकदम दुरुस्त दिखती है। जब उन्हें शादी में वह साइकिल मिली थी, तब भी किसी के पास साइकिल नहीं होने की वजह से आसपास के लोग देखने आए थे और आज उसका आकर्षण उसके सजे-संवरे होने की वजह से बना हुआ है।

एक बार मेरे वे रिश्तेदार किसी धार्मिक आयोजन में शिरकत करने बगल के गांव में जा रहे थे। इनको साइकिल से आते देख कर इनके पड़ोस में रहने वाले लड़के ने इनसे साइकिल पर बैठाने का आग्रह किया। फिर उसके जिद पकड़ लेने के बाद उसे साइकिल पर बिठा कर चल पड़े। आधी रात को वह कार्यक्रम बीच में ही छोड़ कर वे साइकिल से चुपके से अपने ससुराल निकल पड़े। चूंकि कृष्ण पक्ष की अंधेरी रात थी। गांव की सड़कों पर गहरे अंधेरे का साम्राज्य व्याप्त था। इसी बीच वे धीरे-धीरे किसी तरह अंदाजे से साइकिल चलाते हुए चले जा रहे थे कि कब वे सड़क से किनारे उतर गए, उन्हें पता नहीं चला। अचानक वे समतल मुंडेर वाले कुएं में साइकिल सहित गिर पड़े। गनीमत यही थी कि पास में कुछ घर थे और उनकी बचाओ-बचाओ की आवाज किसी तरह पहुंच गई। गांव के और लोग जमा हुए और किसी तरह उन्हें साइकिल सहित बाहर निकाला। वह पूरा प्रसंग वे आज भी गांव के चौपाल पर या किसी के घर आने वाले मेहमानों को चटखारे लेकर खुद सुनाते हैं।

खैर, इस रोचक प्रसंग के अलावा, हकीकत यह है कि साइकिल एक ऐसा वाहन है जो न कोई और र्इंधन खाता है और न तेल पीता है। आमतौर पर साइकिल किसी सड़क जाम में भी नहीं फंसता। एक मजाक के तौर पर देखें तो ट्रैफिक नियमों को तोड़ने पर बाइक और दूसरे वाहनों के चालकों को भारी रकम जुर्माने के तौर पर चुकानी पड़ती हैं। लेकिन शायद ही कभी किसी साइकिल वाले का चालान कटते किसी ने देखा होगा। हालांकि मैं साइकिल की सवारी करते हुए भी यातायात नियमों का पालन करने की वकालत करता हूं। अगर लोग ज्यादा से ज्यादा साइकिल का प्रयोग करें तो सड़कों पर जानलेवा दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है। नीदरलैंड, स्पेन और न्यूजीलैंड के लोग साइकिल की सवारी को शाही सवारी समझते हैं और वह कम दूरियों के सफर को साइकिल से तय करते हैं। अगर हम अपने नजरिए को बदल कर छोटी दूरी का सफर साइकिल से तय करें तो यह हमारे स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण की सेहत के लिए भी लाभदायक होगा।

कुंदन कुमार

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 दुनिया मेरे आगे: सिनेमाघर की संस्कृति
2 दुनिया मेरे आगे: नेपथ्य के नायक
3 दुनिया मेरे आगे: प्रेम गली अति सांकरी
ये पढ़ा क्या?
X