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दुनिया मेरे आगे: दौलत का आना-जाना

धन इकट्ठा करने वाले कामयाब लोग अगर फर्श से अर्श तक पहुंचे हैं तो ऐसे लोगों की भी कमी नहीं हैं जो अर्श से फर्श पर आ गए हैं। जीवन का चक्र इसी तरह ऊपर नीचे होता रहता है।

Author Published on: September 30, 2019 1:48 AM
धन इकट्ठा करने की चाहत रखने वालों की कमी नहीं।

सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी

लोगों को पैसा बनाते हुए देख कर हैरानी होती है और पैसा खोते हुए देख कर भी। यह सही है या गलत, यह एक अलग मुद्दा है, पर यह हकीकत है कि अधिक धन संपन्न व्यक्ति को ही समाज में प्रतिष्ठा मिलती है। किस व्यक्ति ने पैसा कैसे इकट्ठा किया, इस ओर कोई ध्यान नहीं देता। कुछ लोग तो खानदानी रईस होते हैं। इसलिए उन्हें परिवार से ही अकूत धन मिल जाता है। पर अधिकतर लोग इधर-उधर घुसपैठ करके ही अनायास पैसा बटोर लेते हैं। नौकरी करके या बंधी आमदनी के साथ व्यापार करके और ईमानदारी से काम करते हुए, सरकारी टैक्स भरते हुए अनायास धन इकट्ठा नहीं हो सकता। हममें से बहुतों ने देखा होगा कि कल तक साधारण जीवन जीने वाले लोग रातों-रात अकस्मात धनाढ्य कैसे हो गए! इनमें नेता-अभिनेता, अफसर से लेकर छोटे कर्मचारी हैं तो कोई काम नहीं करते हुए भी केवल संपर्क और जुगाड़ के जरिए करोड़ों इकट्ठा कर लेने वाले भी।

मसालों के एक मशहूर ब्रांड के मालिक आजादी के पहले कभी दिल्ली में तांगा चलाते थे। एक दिन कोई मसाला पिसवाने वे चक्की पर गए और बोले कि हल्दी जरा जल्दी पीसना। चक्की वाला बोला कि अगर ऐसे नखरे हैं तो खुद अपनी चक्की लगा लो। बात उन्हें चुभ गई और उन्होंने मसाला पीसने की अपनी चक्की लगा ली और सभी मसाले पीसना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। वे आज मसालों के प्रमुख व्यापारी हैं और अपने मसालों का खुद नब्बे की उम्र में भी विज्ञापन करते हैं और प्रभाव छोड़ते हैं। इसी तरह कभी इंदौर में एक छोटी-सी पान की दुकान और घोड़ों की चंदी बेचने से शुरुआत करने वाले पहले एक, फिर दो होटलों के मालिक, फिर लॉज के मालिक बने। धीरे-धीरे उनकी पान की दुकान अपने पान और अपनी चाय के लिए मशहूर हो गई। फिर वह राजनीतिकों और पत्रकारों के मिलने और बातचीत का प्रमुख केंद्र बन कर मशहूर हो गई। उन्होंने पैसा कमाया और नाम भी। उनके साहित्यकारों से भी संबंध बने और वे शहर के समाजसेवियों में शुमार किए जाने लगे।

ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जिनमें दूसरों की सोहबत करते-करते लोग खुद भी उसी काम में लग गए और खूब धन कमाया। उनमें अच्छे और बुरे, दोनों हैं। जिस तरह साहित्यकारों, विशेषकर कवियों और पत्रकारों के साथ रहने का लोगों को शौक होता है, वैसा ही शौक राजनेताओं के साथ रहने और उनके साथ फोटो खिंचवाने का भी होता है। इसीलिए कभी किसी भी पद पर न रहने वाले भी अनाप-शनाप पैसा जमा कर लेते हैं।

हम कह सकते हैं कि दूसरों के पास भी मौका था, वे ऐसा क्यों नहीं कर पाए। शायद इसलिए कि उनमें वह हिम्मत नहीं थी जो ऐसा-वैसा काम करने के लिए जरूरी होती है। बेशुमार धन का मालिक बनने का रास्ता अपराध की गलियों से ही निकलता है। अचानक पैसे वाला हो जाने का पढ़ाई-लिखाई और बुद्धिमानी से कोई संबंध नहीं है। पढ़ा-लिखा बुद्धिजीवी बेहद डरपोक होता है। वह नियम-कायदों, लोगों की निगाह और अपने जमीर से डरता है। उसे हमेशा यह भय बना रहता है कि कभी उससे कोई गलत काम न हो जाए। जबकि पैसा इकट्ठा करने वाले बेखौफ धन समेटते रहते हैं। ऐसे लोग दूसरों को नासमझ, कायर और डरपोक समझते हैं।

धन इकट्ठा करने वाले कामयाब लोग अगर फर्श से अर्श तक पहुंचे हैं तो ऐसे लोगों की भी कमी नहीं हैं जो अर्श से फर्श पर आ गए हैं। जीवन का चक्र इसी तरह ऊपर नीचे होता रहता है। ऐसे तमाम धनाढ्य लोग रहे हैं, जो एक समय धनपतियों की दुनिया में शीर्ष पर रहे, लेकिन आज उनमें से कई दयनीय जीवन जी रहे हैं तो कई संपत्ति विवाद में कचहरियों के चक्कर काट रहे हैं। कई धनाढ्य रहे लोगों की शान खो चुकी है और उनमें से कई साधारण जीवन जी रहे हैं। उतार-चढ़ाव एक सामान्य प्रक्रिया है और जो ऊपर है, वह नीचे आएगा और जो नीचे है, वह ऊपर जाएगा ही। यही हाल शिक्षा केंद्रों, अस्पतालों, अखबारों और आधुनिक साज-सज्जा से लैस विभिन्न केंद्रों का है जो खुद को नंबर एक और अन्य को पिछड़ा बताते हैं। विज्ञापन हर दिन एक-दूसरे के दावे को झुठलाता रहता है।

कम से कम समय में, बल्कि तत्काल सब कुछ पा लेने की हवस ही लोगों को हर कीमत पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। जायज-नाजायज का फर्क कोई मायने नहीं रखता। लेकिन आदर्श ऐसे ही लोग हो पाते हैं, जिन्होंने खुद से सब कुछ हासिल किया है। हम भूल जाते हैं कि ताबड़तोड़ पाई हुई समृद्धि अधिक दिनों तक नहीं टिकती। समय से और अपनी बारी में मिली समृद्धि ही टिकती है और सुकून भी देती है। अचानक धनवान हुए लोग न चैन से जी पाते हैं, न सो पाते है। उन्हें निरंतर असुरक्षा और अशांति घेरे रहती है। जब जीवन में उतार-चढ़ाव आना ही है तो संयम बरतने और सब्र रखने में क्या हर्ज है!

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