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दुनिया मेरे आगे: अनमोल मुस्कान

तनाव की वजह से चेहरा खिंच कर अजीब-सा बन जाता है, जबकि मुस्कराने वाला चेहरा सुंदर लगने लगता है।

सांकेतिक तस्वीर।

कुंदन कुमार

एक जगह मैंने लिखा देखा- ‘मुस्कुराइए, इसमें आपका कोई खर्च नहीं होगा।’ सचमुच अगर हम इस संक्षिप्त पंक्ति का विश्लेषण करें तो इसका विस्तृत और गहन अर्थ निकल कर हमारे सामने आएगा। मनुष्य का शरीर संवेदनाओं का योग मात्र है और हंसी-खुशी, सुख-दुख, मुस्कान और आंसू हमारे जीवन के विविध रंग हैं। धरती पर मनुष्य ही जीवों की एकमात्र ऐसी प्रजाति है जो हंसता है, रोता है, गाता और गुनगुनाता है। हो सकता है कि पशु-पक्षियों के हंसने-रोने का भी अपना भाव और उसकी भाषा हो, लेकिन जिन अर्थों और भाव में हम मनुष्य को हंसते देखते हैं, क्या किसी पशु या पक्षी को हंसते या गुनगुनाते देखा है!
हम अपने चारों ओर के वातावरण में अपनी मुस्कराहट की बदौलत इतनी प्रसन्नता घोल सकते हैं कि उसके प्रभाव क्षेत्र में आने वाला हर व्यक्ति खुशी से सराबोर हो जाए। यानी अगर हम मुस्कराहट और खुशी को एक दूसरे का पूरक कहें तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। मुस्कराहट चेहरे का ऐसा भाव है, जिसे बगैर किसी बाजार भाव के खरीदा जा सकता है। मुस्कराने के लिए हमें कुछ भी खर्च नहीं करना होता है।

दरअसल, मुस्कराहट हमारी सबसे बड़ी दौलत है, जिसे बड़े-बड़े लोग कठिन प्रयास के बाद भी प्राप्त नहीं कर पाते। आए दिन बड़े-बड़े शहरों में अनेक संस्थान खोले जा रहे हैं, जहां लोगों को जबर्दस्ती हंसाया जाता है। सवाल है कि क्या हम बगैर मुस्कराए अपना जीवनयापन नहीं कर सकते? ऐसे बहुत सारे प्रश्न हैं जो हमारे मस्तिष्क में घूमते हैं और जवाब मांगते रहते हैं। सदियों से हम इस प्रश्न का उत्तर ढूंढ़ने का प्रयत्न करते आ रहे हैं कि हमें मुस्कराने की जरूरत क्यों पड़ती है।

हम मनुष्यों के भीतर बहुत सारी इच्छाएं और आकांक्षाएं होती हैं। जब हमारी इच्छाएं सफलता में परिणत नहीं हो पाती हैं तो मन में निराशा उत्पन्न होने लगती है। विफलता के कारण उत्पन्न निराशा तनाव को न्योता देती है। तनाव की अधिकता हमारे रक्तचाप को बढ़ा देती है और हमें चिड़चिड़ा बना देती है। इसी वजह से हम खुद को अलग-थलग कर लेते हैं और जीवन से पलायन करने के बारे में सोचने लगते हैं। इसकी परिणति कई बार आत्महत्या के रूप में हमारे सामने आती है। तनाव से छुटकारा पाने के लिए लोग शराब का सेवन तक करने लग जाते हैं। जबकि यह लत हमारे तनाव को कम तो नहीं करती, उल्टे हमारी अच्छी-खासी जिंदगी को त्रासद बना देती है।

हालांकि तनाव को कम करने का सहज उपाय है- मुस्कराहट। मुस्कराने के साथ ही हमारे मुंह का जबड़ा ढीला हो जाता है और उसी के साथ तमाम मांसपेशियों में ढीलापन आ जाता है और हम तनावमुक्त होने जैसा अनुभव करने लगते हैं। तनाव की वजह से चेहरा खिंच कर अजीब-सा बन जाता है, जबकि मुस्कराने वाला चेहरा सुंदर लगने लगता है। मुस्कराहट की राह छोड़ कर हम प्रकृति प्रदत्त मुखमंडल के सौंदर्य के साथ अन्याय करते हैं। मुस्कान के बारे में दो बहुत ही रोचक बातें याद रखनी चाहिए- मुस्कराने के लिए कभी कोई कीमत अदा नहीं करनी पड़ती है और मुस्कान इतनी लचीली चीज है कि वह हर आकार के होठों पर फिट हो जाती है।

किसी व्यक्ति का चेहरा कितना भी सख्त क्यों न दिखता हो, लेकिन अगर उसके चेहरे पर मुस्कान व्याप्त है तो उसका व्यक्तित्व सहज ही किसी को अपनी तरफ आकर्षित कर लेगा। मुस्कान के सहारे ही क्रांतिकारी राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ हंसते-हंसते सहज भाव से फांसी के तख्ते पर कूद कर चढ़ गए थे। महात्मा गांधी की मुस्कराहट की अद्वितीय शक्ति ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए विवश कर दिया। कोई प्रेमी कितना ही तनावग्रस्त क्यों न हो, अगर उसकी प्रेमिका उससे मुस्कराते हुए बात करे तो प्रेमी का सारा तनाव दो मिनट में छूमंतर हो जाता है। चीन में एक कहानी प्रचलित है कि जिस मनुष्य का मुखमंडल मुस्कराता हुआ न हो, उसे किसी वस्तु की दुकान नहीं खोलनी चाहिए!

एक अध्ययन में यह बात उभर कर सामने आई है कि जिस दुकानदार का चेहरा हंसमुख नहीं होता है, उसकीदुकान पर ग्राहक जाना पसंद नहीं करते हैं। अगर कोई डॉक्टर मुस्कराते हुए मरीज का इलाज करे तो इस प्रभाव में मरीज की आधी बीमारी खुद ही ठीक हो जाती है। होमर नामक प्रसिद्ध यूनानी कवि ने लिखा है कि ‘मुस्कान प्रेम की भाषा है। जो हम देंगे, वह पाएंगे। हम प्रेम की भाषा बोलेंगे, हम प्रेम की वाणी सुनेंगे’। जो व्यक्ति मुस्कराना जानता है, वह जीवन जीने की कला जानता है। अगर हम खुश, स्वस्थ और तनावमुक्त जीवन जीना चाहते हैं तो मुस्कराना शुरू कर दें। एक मुस्कराहट हमारी व्याधियों का अंत कर हमें हमेशा खुश रखती है। इसलिए दुख के हकीकत होने के बावजूद मुस्कान के हर पल को सहेज कर रख लेना चाहिए।

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