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दुनिया मेरे आगे: परंपरा के विद्रूप

हमारे समाज में लड़कियों को यह अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। उन पर जाति को टूटने से बचाए रखने की जिम्मेदारी है। वह जाति और धर्म के बंधन में बंधी हुई एक गुड़िया मानी जाती है, जिसका काम दूसरों की कही बातों पर सिर्फ अपनी मौन स्वीकृति देनी है, कुछ कहना नहीं है।

Author Published on: May 14, 2019 2:10 AM
शादी को लेकर समाज दोहरी मानसिकता रखता है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हिमांशी पटवा

आजकल हमारे गांव में भी शादियों का मौसम चल रहा है। फसल कट रही है और जो पैसे इससे आ रहे हैं, वे शादी-ब्याह में उपयोग किए जा रहे हैं। इस दौरान कितने ही लोगों के दिल मिल गए होंगे और कितने ही लोग शादी की कतार में लगे होंगे। इनमें कुछ की शादी परिवार की देखरेख में हुई होगी तो कुछ प्रेम के बाद विवाह के बंधन में बंध गए होंगे। यों देखा जाए तो ‘अरेंज मैरिज’ यानी पारंपरिक तौर-तरीकों और रिवाजों के मुताबिक विवाह तो बड़ी आसानी से हो जाती है, लेकिन प्रेम विवाह में बहुत झंझट आते हैं। ज्यादातर प्रेम विवाह मुश्किलों के दौर को झेल कर ही होते हैं, क्योंकि हमारे समाज में प्रेम विवाह को गुनाह माना जाता है। प्रेमी जोड़ों के साथ समाज जिस तरह पेश आता है, उसमें क्या हम मान लें कि जिस व्यक्ति ने प्यार किया है, उससे बड़ा पाप किसी ने नहीं किया है? लेकिन उसके बाद भी सवाल बचा रहेगा, क्या प्यार करना वाकई पाप है! वह कैसा धर्म और सामाजिक रिवायतें हैं, जो प्रेम को इस नजर देखने की छूट देती है, व्यवस्था करती है?

अभी कल ही मेरी एक भैया से बात होने लगी कि आखिर प्रेम-विवाह को लोग गलत क्यों मानते हैं! मैंने यह सवाल उनसे इसलिए पूछा कि वे एक लड़की से बेहद प्यार करते हैं और मुझे लगा कि वे इसका सटीक जवाब दे पाएंगे। मैंने उनसे पूछा कि जब आपके परिवार को आपके प्रेम-संबंध के बारे में पता चला तो उन्होंने आपको क्या कहा। उन्होंने वही जवाब दिया, जिसकी आशंका हम ऐसे समाजों में करते हैं। वे बोले कि हमारी शादी में सबसे बड़ा रोड़ा हमारी अलग-अलग जाति में पैदा होना है। जब मेरे घर वालों को पता चला तो सबने मुझे खूब सुनाया कि हमारे घर में अब तक किसी ने प्यार नहीं किया तो तुम इन सब चक्कर मे कैसे पड़ गए! हमने तुम्हें क्या यही संस्कार दिए थे? उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात, वह लड़की दूसरी जाति की है। अगर शादी हो गई तो बिरादरी वाले सब जीना मुश्किल कर देंगे। अभी तुम्हारी बहनें भी हैं, उनकी भी शादियां करनी है हमें।

अंदाजा लगाया जा सकता है कि सामाजिक जड़ताओं के मामले में हमारा समाज कहां खड़ा है। देखा जाए तो हर मां-बाप बचपन से अपने बच्चे की शादी का सपना देखते हैं कि जब हमारा बच्चा बड़ा हो जाएगा, तब उसकी शादी किसी ‘सुंदर’ लड़की या लड़के से करेंगे। बहुत से ऐसे परिवार हैं, जिनमें बेटा अगर बारह-पंद्रह साल का हो जाता है, तब घर में जरूरत होने पर भी कुछ सामान जैसे सोफा, वाशिंग मशीन, फ्रिज आदि की खरीदारी टालते रहते हैं। कहते हैं, जहां इतने दिन ऐसे ही रहे, वहां कुछ साल और रह लेंगे। कुछ साल बाद बेटे की शादी तो करनी ही है, तब यह सब तो मिलेगा ही तो अभी क्यों पैसे बर्बाद करें।
मेरा प्रश्न अभी भी वहीं है। अगर हर माता-पिता ऐसा चाहते है कि उनके बच्चों की शादी अच्छे घर में हो और वे अपने जीवन-साथी के साथ खुश रहें, तब अगर उनके बेटे या बेटी ने किसी इंसान को पसंद किया है और वह उसके साथ खुश है, तब उन्हें क्या समस्या होती होगी जो वे उनका प्रेम विवाह कराने में कोई रुचि नहीं लेते, न ही ऐसी कोई इच्छा ही प्रकट करते हैं।

दूसरी तरफ, जब यही प्यार किसी की बेटी ने किया हो, तब माता-पिता के सपने और चकनाचूर होकर नुकीले हो जाते हैं। घर पर ‘परेशानियों’ का अंबार लग जाता है। दुनिया क्या कहेगी… समाज क्या कहेगा… इस लड़की ने तो मेरी नाक काटा दी… कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा… आदि! मतलब कुल मिला कर उन्हें अपने बच्चों की खुशियों को छोड़ कर सारी दुनिया, देश और जहान की फिक्र और चिंता खाने लगती है, लेकिन अपनी संतान की तरफ वे देखना भी नहीं चाहते। यह कैसा सामाजिक प्रशिक्षण है जो हमें अपने बच्चों की इच्छा को मारने और कई बार उनकी हत्या तक कर देने की मानसिकता से लैस करता है?

हमारे समाज में लड़कियों को यह अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। उन पर जाति को टूटने से बचाए रखने की जिम्मेदारी है। वह जाति और धर्म के बंधन में बंधी हुई एक गुड़िया मानी जाती है, जिसका काम दूसरों की कही बातों पर सिर्फ अपनी मौन स्वीकृति देनी है, कुछ कहना नहीं है। जाति का ढांचा बना रहे, यह किसके हित में है? मेरा कहना है कि शादी तो आप अपने बच्चे की कहीं न कहीं तो करेंगे ही! तब वह लड़का या लड़की क्यों नहीं, जिसे वे पसंद करते हैं? आप सिर्फ इसलिए उनकी खुशियां छीन रहे हैं कि वह परिवार हमारी जाति का नहीं है, तो एक बात का जवाब देना चाहिए। क्या गारंटी है कि अपनी जाति में शादी करने से सब ठीक रहेगा, आपके बच्चे की शादीशुदा जिंदगी खुशहाल रहेगी, उनके बीच कभी झगड़े नहीं होंगे? लेकिन अफसोस… हम सब इसमें से किसी की गारंटी नहीं ले पाएंगे!

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