ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे: एकरसता से इतर

अगर वास्तव में हम एक अच्छा जीवन बिताना चाहते हैं तो उसमें हमारी सकारात्मक भावनाओं और अच्छे शौक का होना बहुत जरूरी है।

Author नई दिल्ली | August 15, 2019 3:45 AM
सांकेतिक तस्वीर।

विलास जोशी
हमारा जीवन एक खिले हुए फूल की तरह है, जो कुछ समय के बाद अपने आप कुम्हला जाता है। इसी प्रकार हम रोजाना एक सरीखे काम करके ऊब जाते हैं। अगर हम अपने जीवन के केवल एक वर्ष का हिसाब रखें तो आश्चर्यचकित रह जाएंगे कि वास्तव में हमारी जिंदगी के नित्यक्रम किसी कोल्हू के बैल के नित्यक्रम से जुदा नहीं हैं। अगर वास्तव में हम एक अच्छा जीवन बिताना चाहते हैं तो उसमें हमारी सकारात्मक भावनाओं और अच्छे शौक का होना बहुत जरूरी है। जब सकारात्मक विचार और अच्छी पसंद और शौक का सम्मिश्रण होता है, तभी हमें जीवन का सही आनंद मिलता है। सही है कि हर दिन नया काम, नए शौक को पूरा करने की सुविधा सबको नहीं मिलती है, लेकिन जो सुख के क्षण हमारे हिस्से में आए हैं, उन्हें सही तरीकों से उपयोग कर हम अपना जीवन सुखद बना सकते हैं।

एक बात यकीनी तौर पर कही जा सकती है कि अगर हमारे पास अच्छी आदतें हैं, अच्छे मित्र हैं तो एक सुखद जिंदगी बिताने की चुनौती को स्वीकार किया जा सकता है। अब यह सवाल स्वाभाविक ही है कि हम हर एक दिन को एक नए दिन की तरह जी सकने और अपने जीवन की ऊब को मिटा पाने के लिए क्या करें! कुछ समय पहले मैंने एक लघुकथा पढ़ी थी। एक उद्योगपति अपने रोजमर्रा के रुटीन में व्यस्त रहता है। फिर रोजाना होने वाली मीटिंग, फोन, ई-मेल, वही काम, भोजन और फिर घर वापसी। इस रुटीन से उसके जीवन में एक नीरसता आ जाती है। एक दिन सुबह वह चुपचाप उठता है और अपनी पत्नी को बिना कुछ बताए घर से निकल जाता है। रास्ते चलते वह एक जगह कुछ लोगों को ‘तीन पत्ती’ का खेल खेलते देखता है, तो वहां रुक कर वह उस खेल को खेलता है और उस खेल में जीते हुए रुपए राह में मिलने वाले विकलांगों में बांट देता है। जब दोपहर में उसे भूख लगती है, तो वह एक साधारण से छोटे होटल में जाकर पाव-भाजी खाता है।

तभी उसकी नजर रास्ते से जा रही श्रमिकों की यूनियन की भीड़ पर पड़ती है। वह तेजी से भागते हुए उस यूनियन के जुलूस में शामिल होकर नारेबाजी करता है। जब वहां पुलिस आकर भीड़ को खदेड़ने लगती है तो वह भाग कर पास के एक सभागृह में घुस जाता है। वहां वह रफी साहब के गाए भावपूर्ण गीतों को स्थानीय कलाकारों से सुन कर मंत्रमुग्ध हो जाता है। फिर वह वहां से निकल कर चाय पीने एक टपरी पर रुकता है, तो वहां उसे अपने स्कूल के दिनों का एक दोस्त मिल जाता है। उसकी कहानी सुन कर वह बहुत दुखी होता है और वह अपना रुपयों से भरा पर्स उसके हाथ में देते हुए उससे विदा लेता है। फिर राह चलते हुए सोचता है कि आज मैंने केवल एक दिन अपने जीवन का रुटीन बदला तो मुझे कितने ही लोगों की जिंदगी के सुख-दुखों के इतने अलग-अलग दृश्य देखने को मिले। अब कुछ भी हो जाए, मैं हर माह कम से कम एक दिन अपना सारा रुटीन छोड़ कर इसी प्रकार एक अलहदा दिन बिताया करूंगा।

इसे पढ़ कर मैं इतना समझ पाया कि हमें भी अपने जीवन में सरसता लाने के लिए कुछ हट कर अवश्य करना चाहिए। एक दिन मैं सुबह जल्दी उठा, एक नए उत्साह के साथ छत पर गया और आकाश की तरफ देखा। उड़ते पंछियों को देख कर लगा कि काश, मेरे भी पंख होते। फिर मेरी नजर आकाश में उमड़ रहे बादलों पर पड़ी। उनमें मुझे नई-नई आकृतियां देखने को मिलीं। लगा कि एक बात तो तय है कि सुबह उठ कर यह सब देखना तभी संभव है, जब हम रात को जल्दी सो सकें। एक दिन सुबह जल्दी उठ कर मैं अपने मित्र के साथ सुबह की सैर के लिए गया, तब बगीचे में देखा कि कई स्त्री-पुरुष योगासन कर रहे है। मैंने भी प्रण किया कि अब रोजाना सुबह जल्दी उठ कर मैं भी यह सब करूंगा।

जीवन को सुखद और आनंदमय बनाने के लिए एक बात और मुझे दिखी- मिलनसारिता। हम अपने रोजाना के नियमित क्रम में इतने व्यस्त रहते हैं कि अपनों तक की पूछ-परख नहीं कर पाते हैं। अगर हम महीने में कुछ दिन अपने रिश्तेदारों, पुराने मित्रों और अपने बाल मित्रों के लिए भी निकालें, उनसे पुराने दिनों की यादें ताजा करें, किसी नाराज रिश्तेदार को मनाएं तो हमारा जीवन और भी अधिक सुखमय और आनंदमय हो सकता है।

सच यह है कि हमारी वर्तमान जिंदगी स्मार्टफोन, इंटरनेट, लैपटॉप और सोशल मीडिया के कारण अकारण ही व्यस्त-सी हो गई है। इन सबके लिए भी थोड़ा समय अवश्य निकाला जाना चाहिए, लेकिन इसकी एक सीमा हो। अब समय आ गया है कि रोजाना इन सबसे थोड़ी दूरी बना कर अपना थोड़ा समय अपने जीवन को सुखद और आनंदमय बनाने के लिए निकाला जाए। कुछ नया किया जाए जो थोड़ा अलहदा हो। जीवन का हर एक दिन नया हो तो उसे हम एक अलहदा जीवन कह सकते हैं।

Next Stories
1 दुनिया मेरे आगे: रिश्तों की डोर
2 दुनिया मेरे आगे: झगड़े की खुशबू
3 दुनिया मेरे आगे: आंसुओं की दुनिया
ये पढ़ा क्या?
X