ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे: झूठ का परदा

मनोविश्लेषकों का कहना कि इस तरह के लोग दूसरों को प्रभावित करने के आशय से अपने और अपने काम, अपनी उपलब्धियों के बारे में इस प्रकार झूठी बातें बढ़ा-चढ़ा कर बताते हैं कि बाद में वे खुद ही उन बातों पर विश्वास करने लगते हैं।

Author Published on: October 14, 2019 2:13 AM
लोगों को झूठ बोलने में कोई हिचक नहीं होती।

मोनिका अग्रवाल

आज जीवन-शैली कुछ ऐसी हो गई है कि अधिकतर लोगों को झूठ बोलने में कोई हिचक नहीं होती। बहुत से लोगों का तर्क तो यह भी होता है कि किसी के भले के लिए अगर झूठ बोला जाए तो वह झूठ नहीं होता। यह तर्क और इसका खेल यहां पर भी नहीं रुकता। धोखा तो किसी को भी देना बुरी बात है, किसी के भरोसे को तोड़ना है और कानूनी संदर्भ आने पर दंडनीय अपराध है। लेकिन खुद को धोखा देना तो आत्मघात के समान है। अपने जीवन और भविष्य के साथ खतरनाक खिलवाड़ है। जब कोई बढ़-चढ़ कर अपनी बड़ाई करता है या झूठ बोलता है, तो कई बार वह एक तरह से खुद को धोखा दे रहा होता है।

अक्सर ऐसी स्थितियों का सामना होता है, जब लगता है कि बच्चा हो या बड़ा, ज्यादातर लोगों की रग-रग में झूठ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बस गया है। झूठ बोलने में उन्हें आनंद की अनुभूति होती है। कुछ लोग तो अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं। बिना किसी फायदे या नुकसान के, बिना किसी का भला या बुरा सोचे, बेबाक झूठ बोल दिया जाता है। जो बात झूठ से शुरू हो तो क्या वह सच पर खत्म होगी? मेरा मानना है कि ऐसा नहीं होगा! झूठ पर झूठ का एक सिलसिला चालू हो जाता है। ऐसे लोग हर पल अपनी बात बदलते रहते हैं और उनके झूठ से सबसे ज्यादा परिवार के सदस्य और उनके सगे-संबंधी ही परेशान होते हैं। वे ज्यादा परेशान इसलिए होते हैं कि झूठ बोलने वाला व्यक्ति आमतौर पर खुद को दूसरों से बेहतर साबित करने की कोशिश करता रहता है। वह अपने झूठ को छिपाने के लिए हर हाल में अपने आप को सही साबित करने का प्रयास करता है। अगर हम ऐसे व्यक्ति को सही-गलत सिखाना या बताना चाहते हैं तो वह उलट कर हमें ही दोषी करार देने लगता है। उसे न प्यार की भाषा समझ में आती है, न डांट की।

मनोविश्लेषकों का कहना कि इस तरह के लोग दूसरों को प्रभावित करने के आशय से अपने और अपने काम, अपनी उपलब्धियों के बारे में इस प्रकार झूठी बातें बढ़ा-चढ़ा कर बताते हैं कि बाद में वे खुद ही उन बातों पर विश्वास करने लगते हैं। उनका मन-मस्तिष्क उनकी ऐसी गप्प को भी सही मान बैठता है। परिणाम यह होता है कि इसी भुलावे में वे अपने कार्य निष्पादन, कर्तव्य, दायित्व के प्रति लापरवाह और आखिरकार उदासीन हो जाते हैं और इस तरह परेशानी में पड़ जाते हैं। एक कहावत है कि ‘एक झूठ को छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं!’ अपनी अस्तित्वहीन उपलब्धियों, सफलताओं का ढिंढोरा पीटने वाले ऐसे लोग यह भूल जाते हैं कि भेद एक दिन तो खुलना ही है। वास्तविकता सामने आने पर बेवजह शर्मिंदा होने के कारण ऐसे लोग तरह-तरह के बहाने बनाने लगते हैं, दलीलें पेश करते हैं। फिर दूसरों के मत्थे दोष मढ़ने का भी प्रयास करते हैं और इस प्रकार पतन के फिसलन भरे रास्ते पर तेजी से चल पड़ते हैं।

इसलिए अपने प्रति ईमानदार होना अनिवार्य है। अपनी कमियों, कमजोरियों, त्रुटियों को जानना, पहचाना, मानना नितांत जरूरी है। तभी उन्हें सुधारने का प्रयास हो पाएगा। इलाज से पहले रोग का निदान आवश्यक होता है। अपनी कमियों को खुद से छिपा कर, उन पर परदा डाल कर, उन्हें नकार कर हम केवल उस कबूतर की तरह व्यवहार कर रहे होते हैं जो बिल्ली को देख कर करता है। जब बिल्ली उसके नजदीक आती है, तब वह यह मान कर आंखें मूंद लेता है कि बिल्ली भी उसे नहीं देख रही है। इसी भुलावे में वह आखिर जान से हाथ धो बैठता है। कमी और कमजोरी किसमें नहीं होती! कमियां और कमजोरी होना बुरा नहीं है। बुरा है उसे स्वीकार करके सुधारने की बजाय उस पर परदा डालना। दूसरों द्वारा दिए गए धोखे से तो इंसान निपट भी लेता है, पर अपने आपसे धोखा करके भला कहां रह सकता है? इसी व्याधि का एक अन्य रूप यह भी है कि झूठ बोलने वाले व्यक्ति का मान-सम्मान धीरे-धीरे नष्ट होने लगता है।

झूठ का एक पहलू यह भी है कि जब हम किसी व्यक्ति से झूठ बोलते हैं और जब तक हमें इस बात का एहसास होता है, तो उस एहसास के होने से पहले ही दूसरा व्यक्ति हम पर भरोसा करना छोड़ चुका होता है। हम आत्मसमर्पण भी कर लें तो वह भरोसा पूरी तरह वापस नहीं आता। इसलिए कुछ आकांक्षा रखना बुरा नहीं है। लेकिन झूठ-मूठ का दिखावा करना, दूसरों को नहीं, अपने आप को धोखा देना है। ऐसा झूठ, ऐसी दोहरी जिंदगी कितनी देर चल सकती है? देर-सवेर कलई खुल ही जाती है। अंदाजा लगाइए कि सबसे सामने पोल खुलने के बाद कितनी शर्मिंदगी और कैसी हास्यास्पद स्थिति होती होगी!

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 दुनिया मेरे आगेः स्मृतियों में गांव
2 दुनिया मेरे आगेः आस्था और विश्वास
3 दुनिया मेरे आगेः कसौटी पर इंसानियत