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दुनिया मेरे आगे: पर्यटन की सीमा

भेड़चाल का शिकार हो रहे पर्यटकों को समझना चाहिए कि जिन पर्यटक स्थलों पर पूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई हैं, सरकारी प्रशासन या स्थानीय प्रबंधन, बर्फबारी या अन्य कारणों से मना कर रहा है तो सुरक्षा अपना कर लौटना ही बेहतर है।

कश्मीर में बर्फबारी (Express Photo by Shuaib Masoodi/File)

संतोष उत्सुक

हमारे देश की आर्थिकी में पर्यटकों का अहम योगदान है। भारतीय पर्यटक धरती पर चल रही पर्यटकीय दौड़ का हिस्सा हो चुके हैं। घुमक्कड़ी, आजकल आनंद के लिए कम, देखा-देखी और दिखाने के लिए ज्यादा होने लगी है। माउंट एवरेस्ट को पर्यटक स्थल बना दिया गया है। इधर वहां मरने वालों की खबर आती रहती है, उधर पहाड़ पर चढ़ने वालों की लाइन लंबी होती रहती है। पर्यावरण प्रेम के नारों के शोर में पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ता जाता है। डिजिटल युग में बाजार के शातिर प्रतिनिधियों ने हाथ मिला रखे हैं, लेकिन जगहों का विज्ञापन वस्तुस्थिति से परिचित नहीं करवाता। कुछ महीने पहले प्रशासन के पंजीकरण के बिना मणिमहेश जैसी रोमांचक, लेकिन खतरनाक यात्रा पर निकले पर्यटक बर्फीले मौसम में बुरी तरह से फंस गए थे। प्रशासन के सघन प्रयासों के कारण कुछ को ही बचाया जा सका था। यह ठीक है कि प्रशासन को काफी पहले से ज्यादा चौकन्ना रहना चाहि, लेकिन पर्यटकों ने भी जिम्मेदारी नहीं समझी।

बहुत लोकप्रिय हो चुके हिमाचली स्थल चूड़धार आने वाले पर्यटकों को उनके अतिउत्साह ने परेशान कर रखा है। प्रशासन और स्थल प्रबंधन ने कब से मना किया है कि अभी चूड़धार यात्रा न करें, लेकिन नासमझ पर्यटक मानते नहीं, वहां जाते हैं और परेशान होते हैं। इस स्थल पर बहुत हिमपात होता है। पिछले दिनों बहुत मुश्किल के बावजूद मंदिर प्रबंधकों और समाज सेवियों ने परेशानी उठा कर अपनी मर्जी से वहां पहुंचे, गंभीर रूप से अस्वस्थ हो जाने के कारण उन्नीस वर्षीय पर्यटक को पीठ पर उठा कर दूसरी जगह पहुंचाया। इस युवा पर्यटक ने जानबूझ कर अपनी जान को जोखिम में डाला। इसके अलावा भी ऐसी की घटनाएं हो चुकी हैं।

कुछ महीने पहले एक नवविवाहित जोड़ा रास्ता भटका, चिप्स खाकर और पानी पीकर रात गुजारी। प्रशासन ने हेलिकॉप्टर से उन्हें ढूंढ़ा। हाल ही में दो युवा चिकित्सक इस जगह के लिए निकले। रास्ते में युवक की तबीयत खराब हुई और ढाबे में रुकना पड़ा। हैरानी की बात यह है कि साथ गई डॉक्टर युवती बीमार साथी के साथ लौटने की बजाय अकेली चूड़धार चली गई। इधर युवक की हालत ज्यादा बिगड़ गई और अंतत उसकी मृत्यु हो गई। यह पर्यटकों की घोर लापरवाही है कि बिना सोचे-समझे, अल्पज्ञान होते हुए भी चल पड़ते हैं। इन नासमझ और बेकरार पर्यटकों को रोकने का प्रयास किया जाता है, लेकिन मानते नहीं। अपनी उच्छशृंखल प्रवृति के कारण अनेक पर्यटक जीवन से हाथ धो बैठते हैं।

भेड़चाल का शिकार हो रहे पर्यटकों को समझना चाहिए कि जिन पर्यटक स्थलों पर पूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई हैं, सरकारी प्रशासन या स्थानीय प्रबंधन, बर्फबारी या अन्य कारणों से मना कर रहा है तो सुरक्षा अपना कर लौटना ही बेहतर है। कुछ जगहों पर अब पर्यटकों को वाकई कम संख्या में आना चाहिए। विदेशों से सीखने की आदतें समृद्ध करनी चाहिए। पर्यटन आधारित आर्थिकी से जीवित कई छोटे देशों ने अपना प्रबंधन सुधारा है। उदाहरण के तौर पर वेनिस ने क्रूज जहाज सीमित करने शुरू किए हैं। आइसलैंड नई जगहों को बढ़ावा दे रहा है। कोपेनहेगन पर्यटकों को अलग-अलग जगह भेज रहा है। क्रोएशिया पर्यटकों की सीमा निश्चित कर रहा है।

एक घटना उल्लेखनीय है। पेरिस में एक संग्रहालय में पर्यटकों की भीड़ ज्यादा हो जाने कारण वहां के कर्मचारी बाहर निकल गए। हमारे देश में अनेक जगहों पर भीड़ बहुत परेशान होती है और करती भी है। यों भी विदेशी और स्थानीय पर्यटकों के तौर-तरीकों में गरम और ठंडे का फर्क है। हम विदेश यात्राओं के दौरान सुधरे रहते हैं, लेकिन देश में वापस आते ही पुराने बिगड़े हुए माहौल में घुस जाते हैं। हमें अतिउत्साही, अनुशासनहीन चालक, अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा से बेपरवाह मेहमानों की जरूरत नहीं होनी चाहिए। इनकी यात्रा को निरुत्साहित नहीं, स्थानीय प्रशासन द्वारा सीधे निरस्त कर देना चाहिए। किसी भी व्यक्ति, चाहे वह कितनी ही पहुंच वाला क्यों न हो, स्थानीय यात्रा, अनुशासन तोड़ने, हुड़दंग मचाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। पर्यटक अगर पैरा-ग्लाइडिंग, ट्रैकिंग, जलक्रीड़ा, साहसिक खेल किसी भी गतिविधि में हिस्सा लेना चाहते हों, तो हर क्षेत्र में एक प्रवेश बिंदु होना चाहिए, जहां से प्रशासन की अनुमति के बिना कोई आगे नहीं जा सके। प्रशासन द्वारा समय रहते स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी पुख्ता इंतजाम करना भी लाजिमी है।

हादसा होने के बाद कुछ समय के लिए जागरूक रहने की आदत बदलना जरूरी है। दुर्घटना के बाद भी आखिर प्रशासन को अपने बहुमूल्य संसाधन प्रयोग करने ही पड़ते हैं। तो उनका खर्च बचाया जा सकता है। पुरातत्त्व या अन्य कोण से महत्त्वपूर्ण जगहों पर कम लोग आएं तो जगह की महत्ता कम नहीं हो जाएगी। इस संदर्भ में हम अमेरिका के लाजवाब एरिजोना से सीख सकते हैं, जहां, ‘द वेव’ को देखने के लिए एक दिन में सिर्फ बीस लोग लॉटरी के माध्यम से अधिकृत होते हैं। हमारी अनेक दिलकश जगहों को भी बेहतर पर्यटक चुनने का हक है।

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