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दुनिया मेरे आगे: भरोसे की राह

‘हमारा जीवन वही होता है, जैसे हमारे विचार उसे बनाते हैं’, मार्क्स आॅरिलियस ने एक बार कहा था। पुराने जमाने में लोग तंत्र-मंत्र-यंत्र का प्रयोग करके सफलता प्राप्त करने का प्रयास करते थे।

Author Published on: March 14, 2019 3:30 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

मोनिका अग्रवाल

हम सबके जीवन में काफी उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। ये उतार-चढ़ाव किसी के प्रेरणास्रोत बनते हैं, तो किसी को शायद दुखी भी कर देते हैं। मनुष्य को किसी कार्य में मिली असफलता ही सफलता की सीढ़ी होती है। इसलिए हमें असफलता से घबराना नहीं, बल्कि उसे चुनौती के रूप में स्वीकार करना चाहिए। कम्प्यूटर का एक सिद्धांत है- ‘गी गो’। यानी गार्बेज इन गार्बेज आउट! इसका मतलब है ‘जैसा बोया वैसा पाया’। सही डालेंगे तो सही बाहर आएगा। कम्प्यूटर और मनुष्य, दोनों एक दूसरे से मिलते-जुलते ही हैं।

लेकिन इंसान भी कितना दिलचस्प प्राणी है। यह हमेशा अपने को दूसरों से बुद्धिमान सिद्ध करने में लगा रहता है और सोचता है कि यह नियम उसे छोड़ कर बाकी सब पर लागू होगा। कितने भ्रम में जीता है यह! हम सभी रात में सोने से पहले अपनी जेब से सामान निकाल कर दराज, अलमारी वगैरह में रख देते हैं। इस क्रिया से प्रेरित होकर हमें अपने भीतर दिन भर इकट्ठा हुए बुरे विचारों को रात में सोने से पहले मन से निकालने की आदत भी बना लेनी चाहिए। आज हमारे पास जो जमा हुए खराब विचार हैं, उनकी हमें कल कतई जरूरत नहीं होगी।

‘हमारा जीवन वही होता है, जैसे हमारे विचार उसे बनाते हैं’, मार्क्स आॅरिलियस ने एक बार कहा था। पुराने जमाने में लोग तंत्र-मंत्र-यंत्र का प्रयोग करके सफलता प्राप्त करने का प्रयास करते थे। मगर आधुनिक युग में इस प्रकार इन सबको परिभाषित किया जा सकता है। ‘तंत्र’ हमारे कार्य करने का तरीका है। ‘मंत्र’ हमारे मन के विचार हैं और ‘यंत्र’ हमारे अन्य व्यक्तियों के साथ बनाए गए संबंध। अगर हम ‘तंत्र-मंत्र-यंत्र’ का प्रयोग सही ढंग से कर रहे हैं तो सफलता जरूर हमारे कदम चूमेगी। सपने और उनका लक्ष्य में क्रियान्वयन मनुष्य की मूल प्रवृत्ति की कल्पनाशीलता है। दरअसल, सपना देखना थोड़ा मुश्किल काम है। निश्चित पैमाने में इच्छाशक्ति, उद्देश्य और प्रेरणा के साथ हम इन्हें अमली जामा पहना सकते हैं। इसके लिए संकल्प करना होगा और सपने का लक्ष्य में क्रियान्वयन करना होगा।

किसी जाने-माने विशेषज्ञ ने कहा है- ‘अफसोस इस बात का नहीं है कि हमने कोई कठोर फैसला नहीं लिया, बल्कि इस बात का है कि हम इसके लिए तैयार नहीं हैं’! आमतौर पर यह देखने में आता है कि सामान्य व्यक्ति किसी क्षेत्र विशेष में सफलता प्राप्त न होते देख एक या दो प्रयासों के बाद ही विचलित हो जाता है। अपना आत्मविश्वास खो बैठता है और खुद को अयोग्य, अक्षम और हीन समझने लगता है। जबकि मनुष्य को सदैव अपने मनोबल को ऊंचा बनाए रखना चाहिए। लगातार प्रयास में लगे रहने वाला व्यक्ति एक न एक दिन अवश्य सफलता प्राप्त करता है। किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के मूल मंत्रों को व्यक्ति अपने में समावेश करने में सफल हो जाता है, तो कोई भी शक्ति उसे अपने लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। सफलता आनन-फानन में प्राप्त नहीं होती। पौधा लगाने के बाद माली उसे दिनों, हफ्तों, महीनों तक सींचता है। तब जाकर मौसम आने पर उसे फल की प्राप्ति होती है।

एक बार एक यात्री एक चौराहे पर रुका। उसने एक व्यक्ति से पूछा- ‘यह सड़क मुझे कहां ले जाएगी’? जवाब में सवाल आया- ‘आप कहां जाना चाहते हैं’? यात्री ने कहा- ‘मैं नहीं जानता’। तब उस व्यक्ति ने कहा- ‘कोई भी सड़क ले लो! क्या फर्क पड़ेगा, जब आप जानते ही नहीं कि आपको कहां जाना है’। कितनी सही बात है! क्या हम किसी भी रेलगाड़ी या बस में बैठ जाएंगे, बिना यह जाने कि कहां जाना है? वह कहां जा रही है? शायद हम सबके पास इसका जवाब ‘नहीं’ में ही होगा। लेकिन जिंदगी के सफर में बिना लक्ष्य के लोग चलने को क्यों तैयार हो जाते हैं! लक्ष्य वे सपने हैं, जिनमें निश्चित समय और उन्हें हासिल करने की योजना होती है। लक्ष्य ही सपने को असलियत में बदलते हैं।

जाहिर है, सपनों को असलियत में बदलने के लिए लक्ष्य स्पष्ट, मापने योग्य, हासिल करने योग्य, वास्तविक और समयबद्ध होने चाहिए। नजर बड़े लक्ष्य की ओर ही होनी चाहिए और मन में ठोस विचार और समर्पण भावना। किसी भी चुनौती का मुकाबला करने के लिए आवश्यक है कि हमारे मन में खुद के प्रति, अपने काम और जीवन को लेकर प्रतिबद्धता हो। जो भी काम हम करें, उसे मन से करें। वर्तमान में अगर हम किसी तनाव से गुजर रहे हैं, तो उसे एक कागज पर लिखें। एक कहावत भी है कि ‘एक शांत समुद्र में नाविक कभी कुशल नहीं बन पाता’। हर काम आसान होने से पहले मुश्किल लगता है। हमें मुश्किलों से भागना नहीं है, बल्कि मुश्किलों को आसान करने की काबिलियत होनी चाहिए। आमतौर पर अपने ठाने हुए काम को पूरा कर सकने की क्षमता हमारे भीतर होती है, लेकिन कई बार कुछ वजहों से हम उसे पहचान नहीं पाते। तो एक बड़ी जरूरत यह है कि हम खुद पर भरोसा करें और अपनी क्षमताओं की पहचान करें। फिर बाधाएं खुद-ब-खुद दूर होती जाती हैं।

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