ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे: स्पर्श की संवेदना

स्पर्श का यह भाव काफी निजी और मजबूत होता है। हम जिसे सायास छूते हैं, उसके प्रति हमारे हृदय में एक भाव होता है। हम किसी खास संवेदना को स्पर्श के माध्यम से पहुंचाना चाहते हैं।

भावों का प्रवाह एक प्रेम भरी छुअन से ही हो जाता है।

सन्नी कुमार

स्पर्श मानवीय संवेदना के प्रेषण का सबसे गहरा और आत्मिक माध्यम है। मगर भावनात्मक स्पंदन के इस सबसे प्रभावी संचारक को सिर्फ मानवीय संवेदना तक सीमित क्यों रखा जाए! यह तो समस्त जीव जगत में व्याप्त है। जहां भाषाएं चूक जाती हैं, वहां एक स्नेहिल स्पर्श एक-दूसरे की भावनाओं को परस्पर प्रसारित कर देता है। एक मां अपने नवजात शिशु से और किस तरह बात करती है! जहां प्रजातिगत विविधता संवाद में बाधक बनती है, वहां छू देने भर से बात पहुंच जाती है। अन्यथा मनुष्य अपने पालतू जानवरों से कैसे संबंध स्थापित कर पाता! जहां व्यक्त कर देने से कथन का सौंदर्य धूमिल हो जाता हो, वहां अकथ्य के रूप में भावों का प्रवाह एक प्रेम भरी छुअन से ही हो जाता है। प्रेमी अपने उद्गार और किस विधि से व्यक्त करते हैं!

स्पर्श का यह भाव काफी निजी और मजबूत होता है। हम जिसे सायास छूते हैं, उसके प्रति हमारे हृदय में एक भाव होता है। हम किसी खास संवेदना को स्पर्श के माध्यम से पहुंचाना चाहते हैं। यह नितांत निजी होता है और तभी संभव हो पाता है, जब व्यक्ति स्पर्श करने वाले को अपने से अलग नहीं मानता। स्पर्श की इस क्रिया में निजता का भाव सबसे प्रबल होता है और यह सिर्फ तब संपन्न हो पाता है, जब दो व्यक्तियों के बीच अजनबीपन समाप्त हो जाता है। इसके बाद लोगों का समूह अपनी अलग-अलग पहचान खोकर एक ‘भीड़’ की पहचान में सहयुग्मित हो जाते हैं। यानी स्पर्श का यह मनोवैज्ञानिक भाव सिर्फ निजी भावों के संप्रेषण तक सीमित नहीं है, बल्कि भीड़ के निर्मित होने का मनोवैज्ञानिक आधार भी निर्मित करती है।

स्पर्श के मनोविज्ञान को समझ कर ही भीड़ की भावना को समझा जा सकता है कि कैसे बंद कमरे के एक व्यक्ति और हजारों की भीड़ में शामिल एक व्यक्ति का दिमाग लगभग एक ही तरीके से काम करता है और वह इस विशाल समूह में भी खुद को अभिव्यक्त कर रहा होता है। इस पहेली को समझने के लिए हम गणित के ‘असंगति प्रदर्शन’ का तरीका इस्तेमाल कर सकते हैं। यानी अगर हम इस बात की जांच कर लें कि कौन-सी प्रक्रिया लोगों में दूरी पैदा करती है तो स्पष्ट हो जाएगा कि उसका विलोम दूरी मिटा देगा।

नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक ए कनेटी ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘क्राउड एंड पावर’ में भीड़ के निर्मित होने के आधार के रूप में स्पर्श के महत्त्व को विश्लेषित किया है। उनका कहना है कि मनुष्य किसी अन्य चीज से उतना नहीं डरता है, जितना वह किसी अजनबी के स्पर्श से भय खाता है। यह अनायास नहीं है कि किसी सार्वजनिक जगह पर चाहे हम पंक्तिबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हों या फिर ट्रेन या बस में यात्रा कर रहे हों, तब तक एक-दूसरे से निश्चित दूरी बनाए रखते हैं, जब तक ऐसा करना संभव होता है। भले ही हम अन्य के काफी नजदीक हों फिर भी हमारी कोशिश होती है कि शारीरिक संपर्क न हो। हालांकि विपरीत लिंग के मामले में कई बार इसका अतिक्रमण होता है, लेकिन इसके पीछे एक खास किस्म की संवेदना काम कर रही होती है।

कनेटी कहते हैं कि ‘स्पर्श का भय’ इतना सघन होता है कि जब हम अनजाने में किसी को छू देते हैं तो तुरंत इसके लिए माफी मांगते हैं या फिर अंधेरे में किसी का स्पर्श हमें बुरी तरह डरा देता है। इसी प्रकार कोई अजनबी हमारे कितने भी पास क्यों न हो, हम छूकर कुछ जताने या बताने को अभिव्यक्ति का सबसे अंतिम उपकरण ही स्वीकार करते हैं। आखिरकार ये तमाम बातें इस दार्शनिक सूत्र के रूप में रूढ़ हो जाती हैं कि मनुष्य अपने आसपास जितनी भी दूरी निर्मित करता है, दरअसल उसके पीछे स्पर्श का भय ही कार्य करता है। घर की चारदिवारी भी इसीलिए एक किस्म का सुरक्षाबोध महसूस कराती है। मनुष्य का मानस किसी अजनबी द्वारा स्पर्श न किए जाने की अवस्था को निजता का सबसे सुरक्षित किला मानता है और जब यह किला टूट जाता है तो सबसे पहले खुद को अन्य से अलग महसूस करने के मनोवैज्ञानिक भाव का क्षरण होता है।

भीड़ एक ऐसी ही स्थिति है जब अजनबियों के स्पर्श का भय समाप्त हो जाता है और हमारे मन से निश्चित दूरी बने रहने का भाव समाप्त हो जाता है। दरअसल, भीड़ की संरचना निर्मित ही तब होती है जब लोगों के बीच की प्रत्यक्ष दूरी समाप्त हो जाती है। फिर भीड़ में शामिल हरेक व्यक्ति अपना निज क्रमश: खोता चला जाता है और भीड़ की इयत्ता धारण करने लग जाता है। भीड़ का चरित्र ही व्यक्ति का चरित्र बन जाता है। इसीलिए भीड़ में शामिल हर व्यक्ति अपने अंदर संपूर्ण भीड़ का सामर्थ्य महसूस करने लगता है और वही भाव महसूस करता है जो भीड़ का भाव होता है। आशय यह है कि स्पर्श का भाव जो अपने प्रभाव में एका स्थापित करता है, अपनी प्रकृति में व्यक्ति और अन्य का द्वैत निर्मित करता है।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 बिसरता परिवेश
2 दुनिया मेरे आगे: प्रयोग की कसौटी
3 दुनिया मेरे आगे: दायरे से बाहर
ये पढ़ा क्या?
X