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दुनिया मेरे आगे: अभिव्यक्ति के भाव

सच तो यह है कि भारत में ‘थैंक यू’ कहने वालों की संख्या धन्यवाद कहने वालों से कहीं अधिक है। हम ‘टीशर्ट’ और ‘जींस’ पहन कर भी अगर भारतीय बने रहते हैं तो ‘थैंक यू’ के उत्तर में ‘वेलकम’ कह कर भी भारतीय ही बने रहेंगे।

Hindi Diwas Speech: इस चित्र का प्रयोग प्रतीक के तौर पर किया गया है।

एक मित्र अमेरिका में रहने वाले अपने पांच वर्षीय पौत्र को, जो जन्मना अमेरिकी नागरिक है, भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा के प्रति शुरू से जागरूक बनाए रखना चाहते हैं। वे चिंतित हैं कि अमेरिकी नागरिकता पा चुके उनके बेटे-बहू अपनी अगली पीढ़ी को मातृभाषा हिंदी से जुड़े रहने की जरूरत को गंभीरता से नहीं ले पा रहे हैं। मित्र ने इसे बहस का मुद्दा बनाने के बजाय अपनी जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार कर लिया है। इसीलिए वे खुद हर साल अपने बेटे-बहू के पास अमेरिका में लगभग पांच-छह महीने बिताते हैं। इस तरह उनका एक कदम भारत में रहता है तो दूसरा अमेरिका में। अमेरिका प्रवास हो या भारत से फोन पर बातचीत, वे अपने पौत्र से हिंदी में ही बात करते हैं और भारत के विषय में उसकी दिलचस्पी लगातार जगाए रखने के लिए सक्रिय रहते हैं।

कुछ समय पहले वे अपने पौत्र के एक प्रश्न का सही उत्तर तलाश रहे थे। प्रश्न था कि अंग्रेजी ‘थैंक यू’ के जवाब में ‘मेंशन नॉट’ या ‘यू आर वेलकम’ की तर्ज पर कौन-सा हिंदी शब्द सटीक बैठेगा। उन्होंने मुझसे बताया तो मैंने कहा कि सबसे पहले तो उस नन्हें प्रवासी के लिए भारतीय और पाश्चात्य संस्कृतियों के एक मूल अंतर को खंगालना आवश्यक होगा। असल में पश्चिमी सभ्यता जिस तरह से हर छोटी-छोटी बात पर धन्यवाद की बरसात करती चलती है, वैसा चलन हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं के बोलने वालों के यहां नहीं है। धन्यवाद ही नहीं, पश्चिम की अतिऔपचारिक संस्कृति मामूली बातों पर ‘सॉरी’ द्वारा खेदप्रकाश करना भी उतना ही अनिवार्य समझती है। विवाह के भावनात्मक लगाव और दाम्पत्य-बंधन को अक्सर बदली जाने वाली उस संस्कृति में दंपतियों को दिन में अनेक बार ‘लव यू’ और ‘लव यू टू’ कह कर एक दूसरे को निरंतर आश्वस्त करते रहने की मजेदार परिपाटी भी है। सरसरी तौर पर कह पाना कठिन है कि ऐसे स्नेह प्रदर्शन में हर्ज क्या है। लेकिन फोन पर बातचीत की शुरुआत में ‘हैलो’ की तरह किसी प्रियजन से हर बात का आरम्भ और अंत इन्हीं घिसे-पिटे स्नेह की दुहाई देते शब्दों से करना एक ऐसा प्रदर्शन लगता है, जिसके पीछे कुछ ठोस होने में खुद संदेह हो।

‘सॉरी’, ‘थैंक यू’ की दुनिया से परे भी तो एक दुनिया है, जहां स्नेह और सद्भाव नि:शब्द पल-पल उजागर होते हैं। इस दुनिया में किसी को उसकी अनुकम्पा के लिए धन्यवाद देना ही हो तो उसे प्रदर्शित करने के लिए शब्दों की बैसाखी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। फिर भी धन्यवाद अगर मिल ही रहा हो तो इस दुनिया में उसका उत्तर या उसकी स्वीकृति ‘वेलकम’ की तर्ज पर ‘आपका स्वागत है’ से देने में कुछ ओछापन-सा महसूस होता है, मानो कृपा करने वाला इस कृतज्ञता ज्ञापन की प्रतीक्षा में था। लेकिन यहां स्थिति दुधारी-सी हो जाती है। ‘मेंशन नॉट’ की तर्ज पर ‘कहिये मत’ या ‘कहने की जरूरत नहीं’ कहें तो लगता है जैसे कृपा करने वाला लट्ठमारी ढंग से कह रहा हो ‘धन्यवाद को अपने पास रखो। मेरे अहसान को महसूस करो, शब्दों में मत आंको।’ लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि हमारे यहां सामान्य शिष्टाचार और सुसभ्य व्यवहार की परंपरा नहीं। बस तरीके अपने-अपने हैं। हम अपने से बड़ों को ‘जी’ कह कर संबोधित करते हैं। हर संस्कृति की अपनी परंपरा होती है। पश्चिम वाले जिनके नाम के आगे डॉक्टर या मेजर लगा कर संबोधन करते हैं, हम उन्हें एक हाथ आगे बढ़ कर डॉक्टर साहेब या मेजर साहेब कहते हैं। ‘पहले आप’ अंग्रेजी के ‘आफ्टर यू’ और फ्रांसीसी के ‘आप्रे वू’ का समानार्थी भले हो, लेकिन ‘पहले आप’ लखनऊ जिस नफासत से कहता है, उसका क्या कहना! निष्कर्ष यह कि ‘धन्यवाद’ के उत्तर में केवल मुस्करा देना या सिर को हल्का-सा हिला देना भी अपने आप में एक सार्थक और सही अभिव्यक्ति होगी।

फिर भी अगर शालीनतापूर्वक धन्यवाद के जवाब में कुछ कहना ही हो तो ‘कोई बात नहीं’ या पंजाबी लहजे में ‘कोई नहीं जी’ भी क्या बुरा है! इसके मुकाबले में ‘इसकी कोई आवश्यकता नहीं’ कहना कुछ रूखा-सा नहीं लगेगा? लेकिन आखिर ध्यान आता है कि भाषाएं बहती नदी की तरह रास्ते में मिलने वाले नालों, निर्झरों को आत्मसात करके अपना पाट चौड़ा करती चलती हैं। ऑक्सफोर्ड अंग्रेजी डिक्शनरी में लगातार स्थान पा रहे भारतीय भाषाओं के शब्दों को देखें तो लगेगा कि हमें भी ‘थैंक यू’, ‘वेलकम’ और ‘मेंशन नॉट’ जैसे शब्द अब पराए नहीं लगने चाहिए। उन्हें हिन्दी में आत्मसात कर लेने में हर्ज क्या है? सच तो यह है कि भारत में ‘थैंक यू’ कहने वालों की संख्या धन्यवाद कहने वालों से कहीं अधिक है। हम ‘टीशर्ट’ और ‘जींस’ पहन कर भी अगर भारतीय बने रहते हैं तो ‘थैंक यू’ के उत्तर में ‘वेलकम’ कह कर भी भारतीय ही बने रहेंगे।

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