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दुनिया मेरे आगे: अपना-अपना आहार

विदेश में शाकाहारी सलाद में ही मांसाहारी पदार्थ परोस दिए जाते हैं। अधिकतर देशों में मांसाहार खाया जाता है, क्योंकि समुद्री भोजन बहुतायत में उपलब्ध है। वहां हमारे शाकाहारी कदम डगमगाने लगते हैं।

Author July 19, 2018 1:58 AM
हमारा देश दुनिया के सबसे ज्यादा शाकाहार खाने वाले देशों में शामिल है।

पिछले दिनों परिवार में एक विवाह कार्यक्रम था। हम शाकाहारी हैं और समारोह में शराब का इंतजाम भी नहीं करते। लेकिन इस बात की कोशिश जरूर रहती है कि मेहमानों के लिए भोजन बढ़िया और स्वादिष्ट हो और उनके रुकने का इंतजाम अच्छा हो। अनुभवी खानसामा अपने हाथों से मसाले अंदाज से ही डालते हैं और दोनों किस्म के यानी शाकाहारी या मांसाहारी खाना स्वादिष्ट बनाते हैं। अब तो व्यंजनों के नाम इतने सारे हो गए हैं कि संशय रहता है कि कौन शाकाहारी है, कौन मांसाहारी! मसालों का श्रेष्ठ सम्मिश्रण भी खाना उम्दा बनाने के लिए अहम माना जाता रहा है। हमारे यहां हलवाई ने मीट मसाला भी मंगाया था, जिनमें से उपयोग के बाद दो पैकेट बच गए। पत्नी चूंकि पूरी तरह शाकाहारी हैं, इसलिए उन्होंने पूछ दिया कि जब हमारे यहां मांसाहार नहीं बनना था तो इसे क्यों लेकर आए। मैंने बताया कि कई सब्जियों का स्वाद बढ़ाने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है, बस इसका नाम ‘मीट मसाला’ है जो आम तौर पर मांसाहार बनाने में प्रयोग होता है। मसाला अलग से बेचने के लिए इस पर मीट लिखा गया है। इसमें दूसरे मसालों से अलग कोई और सामग्री नहीं होती। यह वैसे ही है जैसे बाजार में ‘राजमा मसाला’ या ‘छोले मसाला’ मिलता है। पत्नी को भरोसा नहीं हो पा रहा था, तब मैंने पैकेट पर दर्ज ब्योरा पढ़ कर सुना दिया और कहा कि आपका अपना विश्वास आपकी अपनी मान्यता है।

हमारे देश में आज भी कितने ही परिवार ऐसे हैं, जहां अंडा या मांसाहार करना तो दूर, इनकी बात करना भी बुरा समझा जाता है। खा लिया तो ‘धर्म भ्रष्ट जीवन नष्ट’ हो जाना माना जाता है। किसी चैनल, खासतौर पर पर्यटन चैनलों पर बाजारों में या सागर तट पर खून में लिपटा और कटता बिक रहा मांस-मछली उन्हें चैनल बदलने पर विवश करता है। मुझे याद है कि मेरी बेटी जब छोटी थी तो बाजार में मैं जानबूझ कर अपनी कार मांस विक्रेता की दुकान के सामने खड़ी करता था, ताकि बेटी की सहनशक्ति बढ़े और नफरत खत्म हो। वह गुस्से में मुझसे कहती कि आपने जानबूझ कर कार यहां खड़ी की। यह सच बात थी, लेकिन मैं टाल जाता था। व्यावहारिक स्तर पर घर से बाहर किसी के यहां रेस्तरां, होटल या वैवाहिक या अन्य आयोजनों में जाने-अनजाने हम कुछ न कुछ खा लेते हैं। इसमें अंडा भी हो सकता है। अंडा शाकाहार है या मांसाहार इस पर सब एकमत नहीं हैं। कई जगहों पर दूध को भी मांसाहार माना गया है और ऐसे लोग भी मिल जाएंगे जो दूध और इससे बने पदार्थों का सेवन नहीं करते। चूंकि हमारे यहां अधिकतर परिवार शाकाहारी हैं, इसलिए बच्चों की सोच भी वैसी ही हो गई है। लेकिन घर से बाहर खाते समय खासतौर पर विविध स्वाद से भरे व्यंजन खाते समय दिक्कत आती है। वे शुरू में पूछते हैं कि क्या शुद्ध शाकाहारी है? न हो तो इधर-उधर झांकना पड़ता है। फिर धीरे-धीरे पूछना अपने आप बंद हो जाता है। दरअसल, दोस्तों की सोहबत में कई लोग अपने प्रिय स्वादिष्ट भोजन खाने से वंचित नहीं रहना चाहते, चाहे अपने अभिभावकों से छिपाना क्यों न पड़े!

विदेश में शाकाहारी सलाद में ही मांसाहारी पदार्थ परोस दिए जाते हैं। अधिकतर देशों में मांसाहार खाया जाता है, क्योंकि समुद्री भोजन बहुतायत में उपलब्ध है। वहां हमारे शाकाहारी कदम डगमगाने लगते हैं। हमारा देश दुनिया के सबसे ज्यादा शाकाहार खाने वाले देशों में शामिल है, लेकिन सांस्कृतिक, जातीय, वर्ण और धार्मिक विविधताओं के कारण सभी किस्म का मांस खाने वाले यहां भी हैं। ऐसी भी मान्यता है कि मानव शरीर और जबड़ा मांस खाने के लिए नहीं बना है। इधर अनेक प्रसिद्ध या अन्य जाने-माने वाले शख्स वक्तव्य देते हैं कि वे शाकाहारी हैं तो उनका यह कहना भारतीयों के बीच दोहरेपन के जीवन के रास्ते पर शाकाहारी अच्छाई की सुर्खियां बटोरना ही लगता है। ऐसे लोग खाते हैं, पर ‘खाते नहीं।’
मैं ऐसे लोगों को भी जानता हूं जो अवसर के मुताबिक मटन बिरयानी का स्वाद लेते हैं और उनके भक्त उन्हें शाकाहारी समझते हैं। स्कूलों और सामाजिक उत्सवों में अभी भी जाति के आधार पर अलग-अलग बिठा कर खाना परोसना जारी है। शाक और मांस खाने वालों को भी इकट्ठा नहीं बिठाया जाता। कई मांसाहारी लोग मंगलवार या नवरात्र के दौरान मांसाहार नहीं करते। क्या उन दिनों में यह आहार स्वादिष्ट नहीं रहता और अगर मांस खाना उचित नहीं है तो अन्य दिनों में क्यों मजे से खाते हैं। कुछ समूह चाहते हैं सभी देशवासी शाकाहारी हो जाएं, लेकिन अपनी राय थोपना कितना सही है! सामंतवादी देश में भूख सभी को लगती है। जहां आज भी तीस करोड़ देशवासियों के रोजाना भूखे सोने की बात होती है वहां मांसाहारी या शाकाहारी होना क्या मायने रखता है!

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