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दुनिया मेरे आगे: बिछोह का भय

हमने अप्रतिम सौंदर्य की देवी मधुबाला को उस बीमारी से घुलते देखा, जिसका निदान आज एकदम सामान्य है। हमने दिलीप कुमार की स्मृति को ज्वार भाटे की तरह आते-जाते देखा है। किंवदंती बन गए ‘ट्रेजेडी किंग’ की सबसे बड़ी त्रासदी या उनका दुख यह है कि जीवन के अंतिम दौर में उनकी सारी स्मृतियां उनका साथ छोड़ गर्इं।

Author April 3, 2018 03:28 am
हमने अप्रतिम सौंदर्य की देवी मधुबाला को उस बीमारी से घुलते देखा, जिसका निदान आज एकदम सामान्य है।

तंदुरुस्त रहना उतना ही स्वाभाविक है जितना किसी बीमारी से पीड़ित होना। हमारे सारे प्रयास स्वस्थ बने रहने के लिए होते हैं, फिर भी कई वजहों से अक्सर हम किसी न किसी बीमारी की चपेट में आ ही जाते हैं। जीवन में बहुत कुछ हमें नियंत्रण में लगता है, लेकिन असहायता का अहसास तब होता है, जब पता चलता है कि अंदर ही अंदर कोई रोग हमारी सजगता को धता बता कर जड़ें जमा रहा है या फैल चुका है। फिर जब अचानक हमें इसके बारे में पता चलता है कि हमारे कोई प्रियजन या हमारे नायक जब किसी रोग से ग्रसित हो गए हैं, तब हमारे पैरों तले जमीन खिसक जाती है। हमने अप्रतिम सौंदर्य की देवी मधुबाला को उस बीमारी से घुलते देखा, जिसका निदान आज एकदम सामान्य है। हमने दिलीप कुमार की स्मृति को ज्वार भाटे की तरह आते-जाते देखा है। किंवदंती बन गए ‘ट्रेजेडी किंग’ की सबसे बड़ी त्रासदी या उनका दुख यह है कि जीवन के अंतिम दौर में उनकी सारी स्मृतियां उनका साथ छोड़ गर्इं। आज हालत यह है कि वे किसी को पहचान नहीं पाते। लाखों लड़कियों को केश-सज्जा की अनूठी शैली देने वाली साधना एक ऐसी बीमारी से ग्रस्त हुर्इं, जिसने सबसे पहले उनकी बेहद सुंदर आंखों को अपना शिकार बना डाला। एक समय जिनकी आंखों को ही देख कर दर्शकों के मन में सिहरन दौड़ जाती थी, वे ‘खलनायक’ प्राण ऊंचाई पर पहुंचते ही कांपने लगते थे। राजेंद्र कुमार की फिल्में सिनेमा हॉल के परदे से उतरने का नाम नहीं लेती थीं। इनके अलावा, अपने करियर के शिखर पर शादी के लिए फिल्मों को नकार देने वाली नूतन, नेहरूजी के कहने पर आजीवन सफेद कपड़े पहनने वाली नरगिस- इन सभी को हमने कैंसर से हारते देखा है। सदाबहार देवानंद और हमारे प्रिय ‘जानी’ राजकुमार भी असाध्य बीमारी से पीड़ित थे। लेकिन चूंकि वे मशहूर और जानी-मानी हस्ती थे, इसलिए उनकी बीमारी हमारी चिंता को अपील करती थी।

दरअसल, हमारी त्रासदी यह है कि हमारे अवचेतन में ‘हैप्पी एंडिंग’ यानी सुखद अंत की उम्मीद गहरे से चस्पां हो गई है। हम अपने नायकों को अंत में मुस्कराते लौटते देखना पसंद करते हैं। हम जानते हैं कि सिनेमा के परदे पर कहानी चल रही है, लेकिन वहां भी उनका बिछोह हमें उदास कर जाता है। जब वास्तविक जिंदगी में उनके साथ कुछ ऐसा गुजरता है जो हमने सोचा नहीं होता है तो हम बैचेन हो जाते हैं। हम भूल जाते हैं कि वे भी उसी मिट्टी के बने हैं, जिसने हमें भी गढ़ा है। हमने बेहद सुंदर मनीषा कोइराला, कनाडाई मूल की लीजा रे और लोकप्रिय क्रिकेटर युवराज सिंह को मौत के पंजों से वापस लौटते भी देखा है।

इन लोगों के बारे में अक्सर सुनने को मिलता है कि ये लोग अपने जीवट और ‘विल पावर’ यानी इच्छाशक्ति की बदौलत मौत के दरवाजे से वापस लौटे हैं। ये लोग अब सामान्य जीवन जी रहे हैं। यह हकीकत है और बेशक यह तथ्य कई लोगों को प्रेरित कर रहा है। लेकिन यहां यह भी गौरतलब है कि साधनों के बिना किसी भी व्यक्ति की इच्छाशक्ति बहुत देर तक टिकी नहीं रह सकती। अभी हवा में खबर है कि इरफान खान भी किसी घातक बीमारी की चपेट में आ गए हैं। जाहिर है, उनके प्रशंसकों की तादाद बड़ी है और उनके भीतर चिंता की लहर दौड़ गई है। लेकिन यहीं शायद प्रकृति हम जैसों को बताना चाहती है कि उसकी नजर में आम और खास एक समान है।

बहरहाल, हमारे नायकों को होने वाली बीमारी का एक उजला पक्ष यह भी है कि आम लोग उस बीमारी को लेकर तात्कालिक रूप से जागरूक हो जाते हैं। ठीक वैसे ही जैसे ‘तारे जमीन पर’ के बाद सारा देश ‘डिस्लेक्सिया’ के रोग पर बात और बहस करने लगा था या ठीक वैसे ही हॉलीवुड फिल्म ‘रेन मेन’ के बाद दुनिया मानसिक रुग्णता के शिकार लोगों के प्रति एकदम से विनयशील हो गई थी। हास्य अभिनेता जिम केरी की सफलतम फिल्म ‘ब्रूस ऑलमाइटी’ (2003) दुख-सुख के दर्शन को दिलचस्प तरीके से समझाने का प्रयास करती है। नायक ब्रूस अपनी समस्याओं के साथ दुनिया की तकलीफें भी हल करना चाहता है। भगवान नायक को अपनी शक्तियां सौंप कर सात दिन के लिए छुट्टी पर चले जाते हैं। ब्रूस लाख जतन करता है, लेकिन किसी को भी खुश नहीं कर पाता। उलटे हालात बिगड़ जाते हैं। अंत में उसे समझ आता है कि दैवीय शक्तियों के भरोसे जीवन नहीं चलता, मनुष्य को अपनी समस्याओं से खुद ही दो-चार होना पड़ता है। विफलताओं, समस्याओं और बीमारियों का एक ही निदान है कि भावुकता को दरकिनार कर इनका साहस के साथ सामना किया जाए।

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