jansatta column duniya mere aage artical communication on time - दुनिया मेरे आगे: समय पर संवाद - Jansatta
ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे: समय पर संवाद

किसी सूचना की कितनी आवश्यकता है, कब जरूरत है, क्यों जरूरत है, इसे ध्यान में रखना जरूरी होता है। क्या वह सूचना किसी खास व्यक्ति के लिए है या उसे किसी और व्यक्ति के जरिए भी पहुंचाया जा सकता है, जिम्मेदारी से बचने के बजाय इसमें फर्क करने की सलाहियत होना जरूरी है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

अपने आसपास के लोगों से हमें अकसर सुनने को मिलता है कि यार, भूल गया, जरा बताना! आखिर हम क्यों भूल जाते हैं? भूलने के बाद कई बार डांट भी खाते हैं। बाद में भले याद आ जाए, लेकिन जो नुकसान होना था, वह हो जाता है। अगर हम अपनी जिम्मेदारी के किसी काम को करना भूल जाएं और इसकी वजह से हमारे वरिष्ठ अधिकारी को काफी परेशान होना पड़े, फजीहत उठानी पड़े और नुकसान हो तो डांट पड़ना एक तात्कालिक प्रतिक्रिया होगी। लेकिन काम के प्रति गैरजिम्मेदारी की वजह का असर गंभीर होता है। आगे से हम पर विश्वास करने से पहले या काम देने से पहले कोई हजार बार सोचेगा। यानी भूल जाने की वजह से हम अपने लिए संभावना के दरवाजे बंद कर लेते हैं। आमतौर पर हम भूलते तब हैं जब हमें उस काम या सूचना में कोई खास दिलचस्पी नहीं होती। अगर हमारी रुचि होती, हम अपनी जिम्मेदारी समझते तो भूलने की संभावना बेहद कम होती। यह कोई प्रबंधन का तरीका नहीं, बल्कि आम जीवन की कहानी है। लेकिन जब हम एक व्यवस्था में काम करते हैं तब किसी सूचना को तत्काल या सही समय पर सही व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी होता है। इसका ध्यान रखना जिम्मेदारी भी है। मान लिया जाए कि किसी पत्रकार को किसी प्रकार की सूचना मिली, जिससे बेहतर खबर बन सकती है, लेकिन वह किसी वजह से खबर को समय पर सही जगह नहीं पहुंचाता है तो वह खबर पुरानी हो जाएगी। यानी सिर्फ लापरवाही की वजह से एक खबर बेमानी होकर रह जाती है।

दरअसल, हम सबके पास कहने और सुनाने के लिए बहुत-सी बातें होती हैं, जिसमें कई बार खबर छिपी होती है। अगर हम उन्हें सही समय पर और सही तरीके से पाठक या श्रोता तक नहीं पहुंचाएं तो यह प्रकारांतर से खबर के साथ न्याय नहीं होगा। इसी प्रकार किसी प्रोजेक्ट या परियोजना में कई सारी सूचनाएं या जानकारी ऐसी होती है, जिस पर तत्काल कदम उठाने होते हैं। अन्यथा कई तरह के नुकसान हो जा सकते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि ऐसी स्थितियों में कई बार मानवीय भूल काफी मायने रखती है। व्यक्ति अनुमान लगा लेता है कि जिस व्यक्ति को कोई खास सूचना देनी है, उसे तो पता ही होगा। या फिर बाद में बताने के लिए टाल दिया जाता है। जबकि सिर्फ कुछ पल की देरी से पहुंचाई गई सूचना घातक भी हो सकती है। इसलिए अकसर वरिष्ठ अधिकारी अपने सहकर्मियों या किसी काम के प्रति जवाबदेह व्यक्ति से काम के बारे में बार-बार पूछते रहते हैं, ताकि हर जानकारी यथासमय और सही जगह पर पहुंचे, ताकि किसी काम में बाधा न हो। संप्रेषण और संवाद के क्षेत्र में खबर या सूचना को लेकर कुछ महत्त्वपूर्ण बातें कही जाती हैं। संप्रेषण सही समय पर, समुचित व्यक्ति को और सही तरीके से दिया जाना चाहिए।

किसी सूचना की कितनी आवश्यकता है, कब जरूरत है, क्यों जरूरत है, इसे ध्यान में रखना जरूरी होता है। क्या वह सूचना किसी खास व्यक्ति के लिए है या उसे किसी और व्यक्ति के जरिए भी पहुंचाया जा सकता है, जिम्मेदारी से बचने के बजाय इसमें फर्क करने की सलाहियत होना जरूरी है। हर खबर या सूचना हासिल करने का एक अधिकारी होता है। उसे वह खबर मिलनी ही चाहिए। इसे सक्रिय संवाद, निष्क्रिय संवाद और तत्पर संवाद के रूप में समझ सकते हैं। यानी कुछ ऐसे व्यक्ति होते हैं जो खबर और सूचना को तत्परता से और तत्काल सही व्यक्ति तक पहुंचा देते हैं। वहीं कुछ ऐसे भी होते हैं जो थोड़ी सुस्ती बरतते हैं। इसके अलावा, कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिन्हें खबर को दबा कर बैठने में आनंद आता है। उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनकी लापरवाही का खमियाजा किसी व्यक्ति या फिर पूरी कंपनी को उठाना पड़े।

आम जीवन में हमारे आसपास रोज ही विभिन्न सोशल मीडिया के जरिए हजारों की संख्या में सूचनाएं, जानकारियां हमारे भीतर डाली जाती हैं। उनके साथ हमारा क्या बर्ताव होता है और हम किस तरह से पेश आते हैं? खासकर फोन पर मिलने वाली सूचनाओं के साथ? कुछ खबरें नजरअंदाज की जाती हैं, कुछ से हम बेहद परेशान हो चुके होते हैं और कुछ को तो पढ़ते भी नहीं हैं। वहीं कुछ ऐसी खबरों को पढ़ कर हमें ताजगी या नएपन का अहसास होता है। कुछ लोग हमारी सूचनाओं और संदेशों का आनंद तो लेते हैं, लेकिन कभी अपनी राय, इच्छा-अनिच्छा, पसंद आदि से वाकिफ नहीं कराते। उनके लिए सूचना का आना या न आना कोई मायने नहीं रखता। इसे ही निष्क्रिय संदेश प्राप्तकर्ता कह सकते हैं। वे संदेश पढ़ तो लेते हैं, लेकिन कोई राय नहीं देते। ऐसे में व्यक्ति एक समय के बाद संदेश भेजना बंद कर देता है। यहीं से शुरू होती है संवादहीनता!

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App