ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे: अमीर कौन

पिछली दिवाली की बात मुझे याद आ रही है। एक अति संपन्न व्यक्ति हर साल दिवाली के दिन अपने घर को तरह-तरह की बहुरंगी झालरों से सजाते हैं और रात को लक्ष्मी पूजन के बाद हजारों रुपए के पटाखे जला कर स्वाहा कर देते हैं। दिवाली के एक दिन पहले से ही उनके घर के बच्चे पटाखे छोड़ने लगते हैं।

Author November 7, 2018 2:36 AM
प्रतीकात्मक फोटो

गिरीश पंकज

समाज में कुछ धनाढ्य लोगों की अकड़ देखते ही बनती है। ऐसे लोगों में चंद सेठों के अलावा मुफ्त का माल उड़ाने वाले कुछ अफसर भी होते हैं। इनके घर रिश्वतखोरी की इफरात दौलत आती रहती है। यह दौलत त्योहारों में, शादी-ब्याह में या देश-विदेश के सैर-सपाटे में खर्च होती रहती है। कुछ पैसे वाले खासकर त्योहारों के समय जब अपनी आर्थिक-समृद्धि का फूहड़ प्रदर्शन करते हैं, उसे देख कर खीझ उत्पन्न होने लगती है। लेकिन इस तरह के दृश्यों को देख कर हम कुछ कर भी नहीं सकते। आखिर दौलत उनकी है तो वे उसका जैसा चाहे उपयोग करें। यह और बात है कि हम चिंतन जरूर करते हैं कि उनके पास जो दौलत है, वह आकाश से तो नहीं उतरी है। वह इसी समाज से अर्जित की हुई है। यह उन लोगों के हिस्से की आभा है जो श्रमजीवी कहलाते हैं। ऐसे लाखों लोगों से ही अक्सर बेलगाम मुनाफा अर्जित करने के बाद किसी के पास अकूत समृद्धि आती है। इसी समृद्धि का प्रदर्शन ये लोग कभी-कभार करते रहते हैं।

पिछली दिवाली की बात मुझे याद आ रही है। एक अति संपन्न व्यक्ति हर साल दिवाली के दिन अपने घर को तरह-तरह की बहुरंगी झालरों से सजाते हैं और रात को लक्ष्मी पूजन के बाद हजारों रुपए के पटाखे जला कर स्वाहा कर देते हैं। दिवाली के एक दिन पहले से ही उनके घर के बच्चे पटाखे छोड़ने लगते हैं। बाकी लोग अपने-अपने घरों के भीतर रहते हैं, लेकिन लगातार पटाखों की आवाज सुन कर समझ जाते हैं कि सेठ जी सपरिवार दिवाली मना रहे हैं। उस दिवाली की रात मैंने देखा, जब सेठ जी बच्चों के साथ पटाखे जला रहे थे, तब कमजोर तबकों के कुछ फटेहाल बच्चे वहां खड़े होकर अति प्रसन्न भाव से यह तमाशा देखने आकर खड़े हो गए थे। जब पटाखे फूटते तो गरीब बच्चे तालियां बजाते और ‘हो-हो’ की आवाज निकालते। लेकिन सेठ जी को उन बच्चों का वहां खड़ा रहना और प्रसन्नता भरी आवाज लगाना नागवार गुजर रहा था। उन्होंने डांटते हुए उन बच्चों को भाग जाने के लिए कहा। बच्चे घबरा कर किनारे हो गए लेकिन जैसे ही पटाखे छूटे, बच्चे फिर नजदीक आकर खड़े हो गए। सेठ जी के मन में पता नहीं उस दिन क्या चल रहा था! उन्होंने उन गरीब बच्चों को थप्पड़ मारा और यह भी कहा कि भाग जाओ यहां से वरना तुम लोगों पर भी पटाखे छोड़ दूंगा!

इस बात से डर कर वे बच्चे भाग गए, क्योंकि वे और अधिक थप्पड़ नहीं खाना चाहते थे। मगर बच्चे तो बच्चे होते हैं। वे सब बहुत दूर खड़े होकर आतिशबाजी का आनंद लेने लगे। पटाखा छूट रहा हो और कोई बच्चा आनंदित न होना चाहे, यह कैसे संभव है। यह दृश्य मैं भी देख रहा था और मन ही मन पीड़ा से भर रहा था। एक बार तो सोचा कि जाकर सेठ से बोलूं कि उनका व्यवहार उचित नहीं था, लेकिन अपने स्वभाव को अब शांत कर चुका हूं। अगर समझाने भी जाता तो बहुत संभव है कि कुछ कड़वी बात कह देता। मुझे लगा कि त्योहार के दिन इस तरह की कोई हरकत ठीक नहीं, क्योंकि ऐसा होने पर समस्या और उलझ जाएगी। एक-दो बार ऐसे समझाने की परिणति पुलिस थाने तक भी पहुंच चुकी थी। यही सोच कर मैं खामोश रह गया। मगर यह सोचता रहा कि यह कैसा व्यक्ति है जो किसी गरीब की खुशी भी बर्दाश्त नहीं कर सकता! वे गरीब बच्चे किसी से पटाखे तो नहीं मांग रहे थे। वे सब कुछ दूर से खड़े होकर सिर्फ तमाशा ही देख रहे थे। मगर धनी माने जाने वाले लोग उनकी यह खुशी भी हजम नहीं कर पा रहे थे। क्या ऐसे लोग सचमुच धनी होते हैं? या फिर दुनिया के सबसे विपन्न आदमी!

उसी रात मैंने कुछ समय बाद एक सुखद दृश्य देखा। किसी दफ्तर में काम करने वाला एक क्लर्क भी अपनी हैसियत के अनुरूप खरीद कर लाए गए पटाखों के साथ दिवाली मना रहा था। वह भी अपने बच्चों के साथ घर के बाहर आतिशबाजी कर रहा था। सेठ द्वारा दुत्कारे जाने के बाद झुग्गी बस्ती के वे गरीब बच्चे वहां जाकर खड़े हो गए थे। उस क्लर्क ने जब उन नंगे पांव बच्चों को देखा तो वह फौरन उनके पास गया और उन्हें फुलझड़ी के दो पैकेट देते हुए कहा- ‘हैप्पी दिवाली, बच्चों।’ सारे बच्चे प्रसन्न हो गए और वहीं जल रहे दीपों से जला कर फुलझड़ियां छोड़ने लगे। मैं पटाखे नहीं छोड़ता इसलिए उन बच्चों को मैं पटाखे नहीं दे सका। अलबत्ता घर में बनी कुछ मिठाइयां एक पैकेट में डाल कर जरूर भेंट में दी। कुछ देर में बच्चे प्रसन्नता का भाव लिए अपने-अपने घरों की ओर लौट गए। लेकिन मैं यही सोचता रहा कि आखिर अमीर है कौन? क्या वह करोड़पति जो गरीब बच्चों की खुशियां भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था? या फिर वह क्लर्क जो अपनी सीमित तनख्वाह में अपना घर चलाता है, लेकिन चंद गरीब बच्चों की खुशियों के लिए अपने बच्चों के हिस्से की फुलझड़ियां उन्हें भेंट कर देता है?

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App