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दुनिया मेरे आगे: प्रेम का जीवन

फागुन के पहले ऐसे मनमोहक वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होना स्वाभाविक ही है। प्रेम भी एक ऐसा ही सामान्य और स्वाभाविक मानवीय भाव है। वसंत के संदर्भ में कल्पना करते ही सबसे पहले ‘प्रेम’ का ध्यान आता है। असल में प्रेम करना मनुष्य के अनेक गुणों और प्रवृत्तियों में से वह एक है जिसे सबसे ऊंचा स्थान प्राप्त है।

Author March 5, 2018 3:16 AM
फागुन के पहले ऐसे मनमोहक वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होना स्वाभाविक ही है।

एकता कानूनगो बक्षी

हमारे यहां फागुन महीने के आसपास के वक्त को आमतौर पर वासंती हवाओं का दौर माना जाता है। इसलिए इन दिनों प्रकृति में अगर अच्छी लगने वाली हवा चल रही है, तो यह स्वाभाविक ही है। हालांकि प्रकृति का हर रूप मनमोहक होता है, बस इसे देखने की अलग दृष्टि होनी चाहिए। फिर भी सर्वाधिक लोकप्रिय और दिलकश ऋतुराज के मुकुट से सज्जित इस मौसम में प्रकृति का हर तेवर मंत्रमुग्ध करने वाला हो जाता है। इस मौसम में ठंड कम कम होने लगती है और गुनगुनी धूप भाती है, यानी मौसम सुहावना हो जाता है। पौधों पर पुराने पत्तों के झड़ने के बाद नई कोपलें फूटने लगती हैं… खेत की फसलें हरी होकर लहलहाने लगती हैं। गेहूं और चने की बालियां दानों से भर जाती हैं… सरसों के पीले फूलों की चादर खेतों में वासंती हवा से लहराने लगती है। समूचे वातावरण में उमंग और उल्लास से भरी अद्भुत महक मन पर मानो कोई जादू करने लगती है। सब कुछ बहुत आत्मीय, सुखद और प्रसन्न लगने लगता है। साहित्य और संगीत में भी वसंत का अकसर जिक्र मिलता है। यहां तक कि भारतीय संगीत में एक विशेष राग का नाम ही वसंत है।

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फागुन के पहले ऐसे मनमोहक वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होना स्वाभाविक ही है। प्रेम भी एक ऐसा ही सामान्य और स्वाभाविक मानवीय भाव है। वसंत के संदर्भ में कल्पना करते ही सबसे पहले ‘प्रेम’ का ध्यान आता है। असल में प्रेम करना मनुष्य के अनेक गुणों और प्रवृत्तियों में से वह एक है जिसे सबसे ऊंचा स्थान प्राप्त है। एक तरह से प्रकृति और जीवन के विकास के सबसे पहले चरण से यह गुण प्राणियों का साथ निभाता आया है। उसके अंदर ये गुण स्वत: ही मौजूद हैं, चाहे वह इंसान हो या जानवर या कोई वनस्पति। जैसे ही वह प्रेम के संपर्क में आता है, खिल उठता है। उसी तरह, जैसे वसंत में प्रकृति का हर रंग हमें खिला-खिला नजर आता है। जब तक भीतर प्रेम है, हमारी संवेदनशीलता बनी रहती है। गुस्से से भरे चेहरे पर मासूमियत देखी नहीं जा सकती। छोटा बच्चा मासूम दिखता है, क्योंकि सदैव प्रेम से भरा होता है। स्नेह और शुभेच्छाओं से लबालब हमारे बुजुर्गों के चेहरे कितने ममत्व से भरे होते हैं! बच्चों की तरह वे भी मासूम ही लगते हैं, क्योंकि उनकी नाराजगी में भी प्रेम की बारिश हो रही होती है। इसलिए कभी-कभी उनके तिलमिलाए चेहरे को देख कर भी निर्मल-सी मुस्कान और ढेर सारा प्यार उमड़ आता है। इसके विपरीत प्यार की कमी में कठोर हो चुके चेहरे भी अकसर हमारे आसपास देखे जा सकते हैं। हम अपने जीवन में कई बार, कई तरह से प्यार करते हैं। यों कहें कि प्रेम ही हमारे जीवन को पूर्णता देता है। जब हमारा जन्म होता है, तो बिना समझे हम अपने आसपास के लोगों से प्यार करने लगते हैं, उन्हें देख मुस्कराते हैं।

बहुत लंबी सूची बनाई जा सकती है उन सबकी, जिनसे हम प्यार करते रहे या करते रहेंगे। हमारे रिश्तेदार, मित्र, शिक्षक, पड़ोसी, हमारा जीवनसाथी, हमारे पालतू जानवर, किताबें, संगीत और यहां तक कि हमारी पहली गाड़ी, कपड़े, हमारा देश, शहर, वह गली, हमारे जो सहयोगी हमारे लिए काम करते हैं, रास्ते में मिलने वाले राहगीर, जिनसे अकसर यात्रा में टकरा जाते हैं, वे सब। कभी लंबा तो कभी छोटा होता है प्रेम का यह समय। कभी-कभी जीवन भर के लिए जैसे प्रकृति से हमारा प्रेम! इन सबके साथ से हमारा जीवन पूर्णता लिये हुए है और हम प्रसन्न भाव में महसूस कर पाते हैं, क्योंकि इन सबसे जुड़ा होता है हमारा ‘प्रेम’ का नाता। लेकिन यह नाता इतना सुरक्षित भी नहीं है पूरी तरह से। प्रेम की वासंती राह में बहुत सारे अवरोधक मौजूद हैं। ईर्ष्या, क्रोध, लालच, स्वार्थ या और भी अनेक, जिनसे दूरी के लिए हमारे बुजुर्ग और हितचिंतक सदैव आगाह करते रहे।

प्रेम एक ऐसा दीया है जो अपनी मद्धिम रोशनी से अंधकार मिटाने की क्षमता रखता है, जबकि क्रोध और अन्य अवरोधक दुर्गुण किसी चिनगारी की तरह सब सुखों और खुशियों को भस्म कर जीवन को अंधकार में धकेल देते हैं। जब हम किसी से प्रेम करते हैं तो उसका पोषण करते हैं, जोड़ने का काम करते हैं। यह एक रचनात्मक सकारात्मक पहल होती है। वहीं इन अवरोधकों से हम वैमनस्य और ध्वंस की विनाशकारी पहल करते हैं, जिससे सब कुछ बंजर होता चला जाता है। पीले खेतों के बीच लहलहाती हवाओं में, बगिया के फूलों पर मंडरातीं खूबसूरत रंग-बिरंगी तितलियां और सुरीले पंछी… एक साथ राग वसंत पर थिरक रहे होते हैं, प्रेम से ओतप्रोत। यह स्थापित सत्य है और सदियों से हम यही सुनते-कहते आए हैं कि वसंत प्रेम का संदेश लेकर आता है! इसलिए प्रेम को जिंदा रहने दीजिए!

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