issues like unemployment and paper leak making youth mentally weak and rebellious - दुनिया मेरे आगे: युवा की राह - Jansatta
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दुनिया मेरे आगे: युवा की राह

देश के युवाओं को जब भी मौका मिला है, उन्होंने तकनीक, उद्योग, कलाओं से लेकर अंतरिक्ष तक लगभग हर क्षेत्र में अपनी योग्यता के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं।

Author May 4, 2018 3:32 AM
प्रतीकात्मक चित्र

सुमन

देश के युवाओं को जब भी मौका मिला है, उन्होंने तकनीक, उद्योग, कलाओं से लेकर अंतरिक्ष तक लगभग हर क्षेत्र में अपनी योग्यता के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। विवेकानंद ने युवा शक्ति का आह्वान करते हुए कहा था कि आत्मविश्वास से भरे चंद लोग दुनिया को बदल सकते हैं। अगर इस आलोक में देखें तो देश के युवाओं में आत्मविश्वास की ऊर्जा भरने के लिए जरूरी है कि यहां का वातावरण इनके विकास के अनुकूल बनाया जाए। इन्हें राजनीति का मोहरा बना कर इनकी रचनात्मक निष्ठा का दुरुपयोग नहीं किया जाए। लेकिन हम चारों ओर देख सकते हैं कि राजनीति की दशा-दिशा से बनते माहौल का असर युवाओं पर क्या पड़ रहा है। अपने भीतर मौजूद रचनात्मकता के सकारात्मक उपयोग से ये युवा देश और समाज की तस्वीर बदल सकते हैं, वहां कई बार इन्हें एक ऐसी भीड़ में तब्दील कर दिया जा रहा है, जो केवल विध्वंस कर सकती है। रोजगार या नौकरी के अभाव के समांतर परीक्षाओं के दौरान अनियमितता और पेपर लीक जैसे मामले युवाओं को मानसिक रूप से दुर्बल और विद्रोही बना रहे हैं। ये स्थितियां देश के भविष्य के लिए व्यापक नुकसानदेह सिद्ध हो सकती हैं।

लेकिन इसके बरक्स कुछ उम्मीद भी बंधती हैं जब मौका मिलने पर कुछ युवा बेहद रचनात्मक करते हुए नजर आते हैं। कुछ समय पहले मैं दिल्ली में एक कॉलेज के सालाना उत्सव को देखने गई थी। पूरे कॉलेज में धूमधाम और सजावट का माहौल था। परिसर के एक कोने में एक छोटा शामियाना लगा था। उत्सुकता की वजह से मैं उस ओर बढ़ गई। वहां अनेक कॉलेजों के छात्र-छात्राएं नुक्कड़ नाटकों की प्रतियोगिता में भाग लेने आए हुए थे। वहां प्रस्तुत कई नाटकों ने मेरे मन-मस्तिष्क को भीतर तक हिला डाला। इन युवाओं ने अपने देश और समाज की ढेरों समस्याओं को नाटकों का विषय बनाया था। अमूमन सभी प्रस्तुतियों में यथार्थ की सूक्ष्म पकड़ परिलक्षित हो रही थी।

मुझे यह देख कर हैरानी हो रही थी कि जिस युवा पीढ़ी को आज हम स्वकेंद्रित और लापरवाह समझ कर उन्हें नसीहत देने लगते हैं, उनके भीतर अपने समय की इतनी बारीक समझ हो सकती है। वे केवल समस्याएं और सवाल ही नहीं उठाते, बल्कि समाधान के विकल्प भी इनके पास मौजूद हैं। व्यवस्था की कोई खामी इन युवाओं की तेज नजरों से नहीं बच पाई है। लापरवाही के आरोपों के बीच ये लड़के-लड़कियां हर विषय का पूरा अध्ययन करके प्रमाणों और आंकड़ों सहित नाटकों के जरिए लोगों के बीच रख रहे हैं। जिस शिद्दत से किसी समस्या को इन्होंने अपने नाटकों में उभारा और अभिनय में डूब कर उसे प्रस्तुत किया, उससे साफ है कि परिस्थितियों की विडंबनाओं को उन्होंने भावनाओं के स्तर पर गहराई से महसूस किया है। इन युवाओं के ओजपूर्ण स्वरों में देश की समस्याओं का बखान हमारी आंखें खोलने के लिए काफी है। इन्हें देख कर याद आ जाती है उन क्रांतिकारी शहीदों की, जिन्होंने विदेशी शासन को मिटाने के लिए अपनी जवानी दांव पर लगा दी थी।

ये युवा उम्र के उस दौर में हैं जब मन में आदर्शों की ऊंची लहरें ठांठें मारती हैं। इनके भीतर चुनौतियों के सामने कुछ कर गुजरने का हौसला है। दुनियावी कलुष और भ्रष्ट सियासत ने अभी इनके चिंतन को स्पर्श नहीं किया है। शायद यही वजह है कि इनके भीतर समाज की गहराई में छिपे हुए सच को पहचानने की क्षमता है। नई पीढ़ी की इस परिपक्व सोच और ऊर्जा को देख कर जहां देश के भविष्य के प्रति आश्वस्ति का भाव पैदा होता है है, वहीं यह निराशा भी पैदा होती है कि देश की इस युवा प्रतिभा और ऊर्जा का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है। दुनिया के विकसित देशों में युवाओं के कौशल-विकास और रोजगार को प्राथमिकता देना ही उनकी उन्नति का सबब बना है। लेकिन आज हमारा युवा रोजगार की आधारभूत जरूरत के लिए भी सड़कों पर आंदोलन करने के लिए मजबूर है। व्यवस्था की खामियों के बीच इनकी रचनात्मकता एक तरह से बेमानी होकर रह गई है। शिक्षा और रोजगार की कमी का कुचक्र और व्यवस्था की नसों में फैला भ्रष्टाचार इन निश्छल मानस वाले युवाओं को हतोत्साहित कर रहे हैं।

किसी ने ठीक ही लिखा है- ‘भयभीत हुई संतान पराजय की प्रतिमा है।’ देश की अगली संतति आज भ्रष्टाचार की मार से भयभीत है। युवाओं के भीतर मौजूद शक्ति को पहचान कर अगर इन्हें आगे बढ़ने के समुचित अवसर प्रदान किए जाएं तो एक समन्वित और सुंदर भविष्य की नींव तैयार हो सकती है। आवश्यकता है तो बस इस अछूती और निर्द्वंद्व शक्ति के आह्वान की। यह युवा शक्ति ऊर्जस्विता का उफनता दरिया है, जिसके तीव्र प्रवाह में परिवर्तनकारी शक्ति छिपी है। इस प्रवाह को परिस्थितियों की अनुकूल वायु उपलब्ध करवाना आज हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

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