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साइप्रस में शादी

महेंद्र राजा जैन जनसत्ता 3 अक्तूबर, 2014: पिछले महीने साइप्रस पहुंचने पर पता चला कि वहां विवाह का ‘सीजन’ है। कुछ समझ में नहीं आया कि कैसा ‘सीजन’! न तो अरब देशों में और न इजराइल में, यानी यहूदियों में शादी की तिथि उसी प्रकार तय की जाती है, जैसे भारत में हिंदुओं में पंडित […]

Author October 3, 2014 11:24 AM

महेंद्र राजा जैन

जनसत्ता 3 अक्तूबर, 2014: पिछले महीने साइप्रस पहुंचने पर पता चला कि वहां विवाह का ‘सीजन’ है। कुछ समझ में नहीं आया कि कैसा ‘सीजन’! न तो अरब देशों में और न इजराइल में, यानी यहूदियों में शादी की तिथि उसी प्रकार तय की जाती है, जैसे भारत में हिंदुओं में पंडित पंचांग देख कर ग्रह-नक्षत्र आदि मिला कर शुभ-अशुभ तिथियों का विचार कर करते हैं। दरअसल, मई से लेकर सितंबर तक वहां ‘विवाह का सीजन’ कहलाता है। विवाह के लिए तिथि का निर्णय वर-वधू की इच्छा या सुविधानुसार नहीं, बल्कि अदालत में विवाह कार्यालय के रजिस्ट्रार की डायरी के मुताबिक तय किया जाता है। यानी जब रजिस्ट्रार खाली हो।

साइप्रस में विवाह के इस मौसम का लाभ उठाने के लिए मध्य-पूर्व के देशों, खासकर सीरिया, लेबनान और इजराइल के लोग भी खूब जाते हैं। पर्यटन की दृष्टि से साइप्रस के कम महंगा देश होने के कारण नहीं, बल्कि इसलिए कि वहां विवाह कार्य संपन्न करने के लिए पादरियों या धर्माधिकारियों की मध्यस्थता अनिवार्य नहीं होती है। गौरतलब है कि इजराइल, लेबनान और सीरिया में केवल धार्मिक शादियां ही हो सकती हैं और ‘अधार्मिक’ यानी अंतरजातीय या अंतरधार्मिक तो एक प्रकार से असंभव ही हैं। लेकिन इन देशों में साइप्रस या किसी अन्य देश में संपन्न नागरिक शादियों को मान्यता प्राप्त है। यों ऐसे विवाह अन्य देशों में भी बिना किसी व्यवधान के हो सकते हैं, लेकिन इजराइल, लेबनान और सीरिया के लोगों के लिए साइप्रस बहुत पास पड़ता है, इसलिए वहां के लोग सिविल विवाह के लिए साइप्रस जाना ही पसंद करते हैं।

पिछली सदी के अंतिम दशक की शुरुआत में लेबनान में युद्ध समाप्त होने के बाद साइप्रस में होने वाले ‘अंतरधार्मिक’ विवाहों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से बढ़ोतरी होने लगी। पिछले वर्ष यहां पांच सौ इक्यासी लेबनानी लोगों की शादी हुई। इजराइल की स्थिति कुछ और ही है। पिछली सदी के नवें दशक में रूस ने वहां रहने वाले यहूदी लोगों को रूस छोड़ कर इजराइल जाने की छूट दे दी थी, जिसके परिणामस्वरूप काफी लोग इजराइल चले गए। पर इन नए लोगों को इजराइल के रबियों (यहूदी धर्माधिकारियों) ने यहूदी मानने से इनकार कर दिया। ऐसी स्थिति में इजराइल में उनका विवाह होने में कठिनाई होने लगी। साइप्रस उनकी समस्या के समाधान की एक जगह साबित हुआ और लोग विवाह के लिए वहां आने लगे। यही वजह है कि साइप्रस में कई विवाह एजेंसियां खुल गई हैं, जिनका काम अन्य देशों की विवाह एजेंसियों की तरह विवाह के लिए इच्छुक युवक-युवतियों का आपस में केवल परिचय कराना नहीं, बल्कि प्रेमी युगलों का विवाह संपन्न कराने में सभी प्रकार की सहायता करना भी होता है। विवाह के लिए इच्छुक युगल के साइप्रस पहुंचने के पहले ये एजेंसियां उनके लिए सभी प्रकार की अग्रिम व्यवस्था करती हैं। खासकर अदालत में वैवाहिक रजिस्ट्रार के यहां ‘बुकिंग’, होटल में ठहरने और सिविल विवाह के पंजीकरण के बादहोने वाले समारोह, प्रीतिभोज आदि की भी व्यवस्था करती हैं, ताकि युगलों को कोई परेशानी नहीं उठानी पड़े और वे जल्दी से अपने देश लौट सकें।

साइप्रस के कानून के मुताबिक विवाह करने वाले लोगों को विवाह के पहले ‘म्युनिसिपल लाइसेंस’ प्राप्त करना आवश्यक होता है। यह एक प्रकार का अनापत्ति प्रमाणपत्र होता है और इसे प्राप्त करने के लिए तरह-तरह के दस्तावेज दाखिल करने होते हैं, जिनकी जांच कड़ाई से की जाती है। लाइसेंस अधिकारी के संतुष्ट होने पर ही ‘वैवाहिक लाइसेंस’ दिया जाता है। इसे प्राप्त करने में तीन-चार दिन से लेकर एक सप्ताह तक का समय लग जाता है। फिर वैवाहिक रजिस्ट्रार के कार्यालय में यह लाइसेंस जमा करने के बाद वहां से शादी की तारीख तय की जाती है। इस पूरी कार्यवाही के लिए आवश्यक है कि विवाह के लिए इच्छुक लोग या तो आठ-दस दिन पहले साइप्रस में आकर रहें या यह सब कार्यवाही करने के लिए किसी विवाह एजेंसी की सहायता लें। साइप्रस के लीमासोल और लरनाका शहर में तो एजेंसियों की भरमार है। लीमासोल में एक होटल का नाम ‘फोर सीजंस होटल’ है जिसकी अपनी एजेंसी है। यह एजेंसी विवाह के लिए आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करने से लेकर वर-वधू का स्वागत समारोह और बाद में हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए कार आदि की व्यवस्था तक की पूरी जिम्मेदारी लेती है।

 

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