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दुनिया मेरे आगे: अंधविश्वास का कारोबार

कुछ समय पहले पुणे से भी एक मामला सामने आया था, जहां आइसीयू में बीमारी का इलाज करा रही एक महिला के लिए किसी डॉक्टर ने तांत्रिक को बुला कर इलाज करवाया था।

Author Updated: January 15, 2020 2:25 AM
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक युवक की अंधविश्वास के चलते जान चली गई। (सांकेतिक तस्वीर)

जिस दौर में हम अनंत अंतरिक्ष में तमाम प्रयोग के जरिए विज्ञान की नई ऊंचाइयां हासिल कर रहे हैं, नई खोजें कर रहे हैं, उसमें अगर अंधविश्वास की वजह से लोगों की जान जाती है तो बेहद अफसोस होता है। कुछ समय पहले एक घटना ने मुझे बेहद दुखी कर दिया जिसमें फिर से अंधविश्वास मानव जीवन पर भारी पड़ गया। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक युवक की अंधविश्वास के चलते जान चली गई। हालांकि ऐसी खबरें अब ज्यादा असामान्य नहीं लगती, क्योंकि इस तरह के मामले अक्सर हमारे सामने आते हैं। लेकिन यह घटना कुछ अलग थी। एक तीस वर्षीय युवक एक गड्ढे में पांच दिन की समाधि लेकर अपनी आस्था का प्रदर्शन कर रहा था, लेकिन जब उसे बाहर निकाला गया तो वह मृत निकला।

बात स्वाभाविक है कि ऐसे में व्यक्ति की जान जाना तय है। लेकिन बताया गया कि ऐसा वह पहले भी कई बार कर चुका था, लेकिन समय सीमा कम होती थी। इसके बावजूद हर बार वह बेहोशी की हालात में निकाला गया। किन्हीं कारणों से उसकी जान पहले के मामलों में बच गई थी, लेकिन इस बार उसका यह प्रयोग आखिरी साबित हुआ। गांव वालों ने बताया कि करीब चार साल पहले से वह इस तरह से ‘समाधि’ ले रहा था। पहली बार जब उसने ऐसा किया था तब पुलिस ने मौके पर पहुंच कर उसे मना किया था। फिर भी वह नहीं माना और उसने घटना को धार्मिक आस्था से जोड़ दिया था। धर्म और आस्था के नाम पर हंगामा होने की आशंका की वजह से पुलिस पीछे हट गई थी।

बहरहाल, इस घटना के बाद महासमुंद जिले में जिला प्रशासन ने आत्महत्या की इस तरह की कोशिशें रोकने के लिए नवजीवन कार्यक्रम चलाया है, लेकिन सवाल है कि हम घटना होने के बाद ही क्यों जागते हैं। एक ओर हम डिजिटल युग की तरफ इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं, दूसरी ओर ऐसी घटनाएं हमें इतना शर्मसार कर रही हैं, जिससे कई बार हमें यह लगता है कि हमारी तरक्की में कोई और नहीं, हम खुद ही बाधा बन रहे हैं।

ज्यादा दिन नहीं बीते हैं जब पूर्वी दिल्ली के बुराड़ी इलाके में अंधविश्वास की वजह से ही एक परिवार के ग्यारह लोगों की रहस्यमय हालात में मौत हो गई थी। मंजर इतना खतरनाक था कि उस घटना से पूरा देश हिल गया था। हमारे देश में आज भी लोग टाने-टोटके जैसी चीजों पर बहुत विश्वास करते है। तांत्रिकों के व्यापार का स्तर बड़े पैमाने मे कार्यरत है। अगर आप सड़क पर किसी चौराहे पर देखेंगे तो तांत्रिकों के कार्ड आपको देने के लिए लोग आ जाते हैं। मनचाहा प्यार, काम-धंधे में बाधा, बच्चे पैदा होने में परेशानी को दूर करना, पड़ोसी को काबू करना आदि अन्य कई मूर्खता से भरी हुई बातें उन कार्डों पर लिखी होती है। किसी वजह से परेशान और आस्था में डूबे लोग इन धूर्तों के चक्कर में आ जाते हैं और खुद ही अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेते हैं। ऐसी घटनाओं से रोजाना सैकड़ों लोग पीड़ित होते हैं।

कुछ समय पहले पुणे से भी एक मामला सामने आया था, जहां आइसीयू में बीमारी का इलाज करा रही एक महिला के लिए किसी डॉक्टर ने तांत्रिक को बुला कर इलाज करवाया था। दो दिन तक उस तांत्रिक ने अपना तंत्र-मंत्र का कर्मकांड किया, लेकिन महिला की मौत हो गई। अंधविश्वास से संबंधित घटनाएं तो अनेक सामने आती रहती हैं, लेकिन यह अहम इसलिए है कि इस प्रकरण मे डॉक्टर था जो निश्चित तौर पर विज्ञान विषय के साथ पढ़ा-लिखा होगा। लेकिन वह भी इन टोने-टोटकों की दुनिया में पड़ा हुआ है। हम खुद ही सोच सकते हैं कि अगर डॉक्टर तांत्रिकों, बाबाओं या मौलवियों पर विश्वास करेंगे तो आम लोगों का क्या होगा। लोग डॉक्टर के पास न जाकर केवल तांत्रिकों या बाबाओं के पास ही जाएंगे, जहां अंतिम तौर पर ठगा जाना ही तय है। पहले ऐसे लोगों की संख्या कम थी और यह मिथ्या धारणा केवल अशिक्षित और आर्थिक तौर से कमजोर लोगों तक सीमित थी, लेकिन अब हर वर्ग का व्यक्ति इनका शिकार होने लगा है।

यह बात लोगों को क्यों समझ में नहीं आती कि तांत्रिक विद्या करने वाले लोग अपना भला तो कर नहीं पाए, दूसरों का हल कैसे निकालेंगे। कई बार तो यह भी देखा गया है कि अपनी समस्याओं का हल निकालने के लिए लोग अपने बच्चों की बलि तक भी दे देते हैं। ऐसे तमाम दर्दनाक किस्से हैं, जिससे कई परिवार और जिंदगियां बर्बाद हो गई। तांत्रिकों की दुकान या काम-धंधे हमारे देश मे पूरी तरह से गैरकानूनी हैं। सवाल है कि इसके बावजूद यह धंधा इतना खुलेआम किस आधार पर चल रहा है? शासन-प्रशासन से इसके विषय में पूछा जाता है तो गोलमोल जबाव दिया जाता है। कुछ लोग बाबाओं और ढोंगियों के के चक्कर में आकर आस्थाओं का प्रदर्शन करते हुए जान तक दे देते हैं। आपको और हमें ऐसी घटनाओं को रोकना होगा क्योंकि आस्था के नाम ऐसे किसी जान जाना दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

योगेश कुमार सोनी

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