ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगेः प्रेम का संवाद

आज का प्रेम दरअसल प्रेम नहीं, सिर्फ जिद का हिस्सा है। यहां कोई किसी को पसंद करता है तो उस पर अधिकार जताने लगता है। अधिकार काम नहीं करता तो मार देता है, जला देता है और वजह बताता है कि वह उससे प्यार करता था। मौजूदा समय का प्रेम इतना अमानवीय और भावशून्य हो गया है कि उसे प्रेम कहना भी अपने आप में प्रेम के भाव को दूषित करना है।

Author Published on: February 14, 2020 3:41 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

भावना मासीवाल

फरवरी का महीना है जो प्रेमोत्सव के रूप में मनाया जाता है। एक ओर बसंत का आगमन है तो दूसरी ओर आज के दिन की शक्ल में मशहूर हो चुका वेलेंटाइन डे का आगाज। युवाओं के लिए यह दिन प्रेम का प्रतीक तो हो चुका है, लेकिन क्या प्रेम के वास्तविक जीवन को भी महसूस करने के दरवाजे तक वे पहुंच सके हैं? हर कोई प्रेम करना और पाना चाह रहा है। बाजार भी पूरी तैयारी के साथ इस प्रेम को बेच रहा है। प्रेम करने और चाहने के इस दौर में प्रेम सोचना भी अपने आप में डर है, क्योंकि हर प्रेमी, प्रेम में ‘हां’ सुनने की फरमाइश रखता है और ‘ना’ सुनना उसके कोष का हिस्सा नहीं होता है। ऐसे में ‘ना’ कहना कितना घातक हो सकता है, यह सिर्फ जान गंवाने वाला जान सकता है।

आज का प्रेम दरअसल प्रेम नहीं, सिर्फ जिद का हिस्सा है। यहां कोई किसी को पसंद करता है तो उस पर अधिकार जताने लगता है। अधिकार काम नहीं करता तो मार देता है, जला देता है और वजह बताता है कि वह उससे प्यार करता था। मौजूदा समय का प्रेम इतना अमानवीय और भावशून्य हो गया है कि उसे प्रेम कहना भी अपने आप में प्रेम के भाव को दूषित करना है। आज के दौर के प्रेम के अनेक किस्से तेजाब से हमले की पीड़ित लड़कियों की जिंदगी और हाल की हिंगणघाट की तरह हुई घटनाओं के माध्यम से जाने जा सकते हैं, जहां स्कूल में पढ़ाने जा रही लड़की को पेट्रोल डाल कर जला दिया जाता है।
इस तरह की घटनाएं प्रेम में ‘ना’ कहे जाने से उपजी हैं, जो वर्तमान समय में प्रेम पर फिर से विचार करने को मजबूर करती हैं। प्रेम में ‘ना’ सुनने वाला या तो आत्महत्या करके अपने प्रेम में होने की पुष्टि करता है या हत्या करके प्रेमी होने की।

दोनों ही स्थितियों में उसका प्रेम मरने और मारने की मानसिकता के साथ आगे बढ़ता है। प्रेम की यह कैसी मानसिकता है? क्या यह प्रेम है? या एक जिद, गुस्सा और ठुकराए जाने का, अपमान होने पर उसके पौरुष के हताश और अपमानित होने का दंश है, जो व्यक्ति के विवेक को इतना शून्य कर देता है कि वह प्रेम में होने का दावा तो करता है, मगर प्रेम के भाव को भूल कर नफरत, घृणा और द्वेष में आकर अपने ही प्रेम की क्रूरता से हत्या करने में एक पल भी नहीं घबराता है। बल्कि वह हत्या करके अपने प्रेमी होने का दंभ भरता है।

आज प्रेम का स्वरूप कितना बदल गया है। जहां प्रेम में ‘मैं’ और ‘तू’ का भेद नहीं था, वहां आज का प्रेम मैं और सिर्फ मैं ही बन कर आत्मकेंद्रित हो गया है। जो प्रेम संयम, आत्मनियंत्रण और धैर्य के रास्तों से गुजर कर आगे बढ़ता है और एक होता है, वही प्रेम आज जीवन की रफ्तार के साथ भाग रहा है, जहां न तो धैर्य है और न ही साहस। प्रेम के लिए धैर्य, समर्पण और साहस को उसका प्राण तत्त्व माना गया है। मंझन लिखते हैं कि ‘प्रथमहिं सीस हाथ कै लेई, पाछे वोहि मारग पगु देई’। ऐसे में अहं रूपी सीस का त्याग किए बिना प्रेम जैसे कठिन पथ पर चलना असंभव है।

प्रेम समर्पण और आत्मनियंत्रण की मांग करता है। प्रेम के जिस रूप को हमने देखा और समझा वह व्यक्ति के भीतर आनंद की अनुभूति है, जो भीतर के राग-द्वेष को मिटा कर उसे प्रेममय बना देती है। समय बदला, व्यक्ति बदला तो प्रेम के प्रति उसके भाव और विचारों ने भी नया रूप लिया। आज के प्रेम में ‘अहं’ मुख्य है, अन्य सब गौण है। जबकि इसी अहं को प्रेम का सबसे घातक तत्त्व माना गया है। मगर बदलते समाज की नई सोच ने प्रेम को भी ‘हां’ और ‘ना’ जैसे शब्दों के भीतर बांध दिया है। प्रेमी के लिए प्रेम की स्वीकृति से उल्लास हुआ और प्रेम की अस्वीकृति ने उसके मन में द्वेष, ईर्ष्या और अहं को जन्म दिया। यहीं से प्रेम का दावा करने वाला प्रेमी हत्यारा बन गया।

आज के दौर में प्रेम का एकतरफा दावा और फिर हत्या और आत्महत्या करने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। जिस पर हमें गंभीरता से सोचने की जरूरत है कि जो प्रेम जीवन का सबसे खूबसूरत अनुभव है वह आखिर इतना घातक क्यों बन गया है! जो प्रेम संवेदनशून्य हृदय को भी संवेदनशील बना देता है, वह इतना संवेदनहीन कैसे हो गया? प्रेम करने का अधिकार हर किसी को है, मगर प्रेम पाने का अधिकार उसका हक कैसे हो गया? जो प्रेम करना चाहते हैं, जो प्रेम को जीना चाहते हैं, वे प्रेम करें, मगर क्रोध, घृणा, अहं और जिद को किनारे रख कर। ऐसे में जरूरी है कि प्रेम में साथी के भावनाओं को बराबर सम्मान दिया जाए, क्योंकि प्रेम करना आपका अधिकार हो सकता है, पर सामने वाले पर जताया गया हक नहीं!

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 दुनिया मेरे आगेः छवियों से प्रेम
2 दुनिया मेरे आगेः बड़े हो गए बच्चे
3 दुनिया मेरे आगेः संवाद का सन्नाटा
ये पढ़ा क्या?
X