duniya mere aage foundation of personality - दुनिया मेरे आगेः व्यक्तित्व की बुनियाद - Jansatta
ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगेः व्यक्तित्व की बुनियाद

कुछ दशकों पहले ऐसा नहीं था। हम जब छोटे थे, तब हमें बड़े-बुजुर्गों की इज्जत करना सिखाया जाता था। हमारी कोई जिद एक हद तक ही पूरी की जाती थी।

Author May 29, 2018 4:01 AM
ऐसे बहुत से उदाहरण मिल जाएंगे, जहां मां-बाप बच्चों को जन्म तो देते हैं, लेकिन उनकी तरफ ध्यान देना अपना फर्ज नहीं समझते।

अरुणा कपूर

कुछ दशकों पहले ऐसा नहीं था। हम जब छोटे थे, तब हमें बड़े-बुजुर्गों की इज्जत करना सिखाया जाता था। हमारी कोई जिद एक हद तक ही पूरी की जाती थी। हम ज्यों-ज्यों बड़े होते गए, इस तथ्य को भली-भांति समझना हमें खुद ही आ गया था। हम देखते थे कि हमारे माता-पिता अपने बुजुर्गों की कितनी सेवा और इज्जत करते हैं। शिक्षा और अच्छे व्यवहार की सीख हमें अपने परिवार वालों से ही मिलती है। लेकिन आज बच्चों में बदलते व्यवहार को लेकर ज्यादातर अभिभावक परेशान हैं। कुछ अभिभावक कहते हैं कि जमाना ही खराब है… आजकल के बच्चे बहुत जिद्दी हो गए हैं… अपनी जिद पूरी न करने पर ऊधम मचाते हैं… घर में चीजों की तोड़फोड़ शुरू कर देते हैं… हालांकि इनके लिए पैसों की कमी हमने नहीं की है… घर से चले जाने की धमकी भी देते हैं… जिद एक हो तो पूरी करें… रोज नई जिद… हम बहुत परेशान हैं।

इस तरह की शिकायतें आम हो चुकी हैं। यह सच भी है कि बच्चों पर समझाने का कोई असर नहीं पड़ता। ऐसे तमाम अभिभावक हैं, जिन्होंने बच्चों की पिटाई बचपन में भी नहीं की। फिर जब बच्चा किशोरावस्था में पहुंच जाए तो उसकी पिटाई कैसे कोई करे! यों भी, किसी बच्चे की पिटाई गलत है। कई बच्चे पढ़ाई में पहले अच्छे थे, बहुत अच्छे नंबर आते थे। उनके माता-पिता तरह-तरह के सपने देखते थे। सोचते थे कि वह डॉक्टर या इंजीनियर बनेगा। लेकिन आज बहुत सारे अभिभावकों को लगता है कि उनका बच्चा हाथ से निकल गया है। पड़ोस के एक परिचित ने बेटे को लेकर अपना दुख जाहिर किया कि घर में किसी की सुनता नहीं है। या तो सारा दिन बिस्तर पर सोया रहता है या दोस्तों के साथ कहीं चला जाता है। घर में किसी को कुछ बताता भी नहीं है। पैसे न जाने कितने कहां खर्च कर देता है! हालत यह हो गई है कि अगर किसी के पिता या मां ने किसी बात पर डांट कर कुछ कह दिया तो बच्चे ने गुस्से में आकर महंगा मोबाइल या कोई और कीमती सामान तोड़ डाला। जाहिर है, हर जिद के पूरे होने की कहानी अब बच्चों की मनमानी में तब्दील हो रही है। माता-पिता की व्यस्तता अब बच्चों के भविष्य के बारे में फिक्र करने में सीमित होती जा रही है।

इस बदलते दौर का असर स्वाभाविक रूप से बेटियों पर भी पड़ रहा है। मेरे एक अन्य परिचित ने बताया कि उनकी बेटी बहुत गुणी और संस्कारी है। पिछले साल तक बहुत आज्ञाकारी थी। अब पंद्रह साल की हो गई है। पता नहीं किस वजह से इसका पढ़ाई में मन ही नहीं लगता। स्कूल से शिक्षकों की शिकायतें आती रहती हैं। स्कूल में पढ़ाई छोड़ कर सहेलियों के साथ फिल्म देखने चली जाती है। पैसे भी ज्यादा खर्च करना शुरू कर दिया है। कुछ पूछो तो उलटा हमसे ही सवाल करना शुरू कर देती है कि आप लोग भी तो अपने मुताबिक रहते हैं! क्या आप लोग नौकरी छोड़ कर घर में रह सकते हैं? आप लोग मेरी बात मानें तो मैं भी मानूंगी। यह सब कैसे संभव है!

देखा जाए तो पंद्रह-सोलह साल के बच्चे अब छोटे नहीं रह गए हैं। पहले परिचित का बेटा देख रहा है कि उसकी मां को अपनी सहेलियों के साथ पार्टियां करने या घूमने से फुर्सत नहीं मिलती। पिता भी अपने काम की व्यस्तता से वक्त नहीं निकाल पाते। इसके अलावा, रिश्तेदारों के घर जाने, सहेलियों के साथ खरीदारी या पिकनिक के लिए जाने, अक्सर सामाजिक कार्यों में व्यस्त रहने में कमी नहीं होती है। लेकिन बेटे की ओर ध्यान देना उन्हें जरूरी नहीं लगता। घर में खाना बनाने के लिए घरेलू सहायिका को रखा गया है। मां ने अपने हाथ से कोई अच्छा व्यंजन बना कर खिलाया हो, ऐसा कभी नहीं हुआ। यों तो मां-पिता दोनों काफी पढ़े-लिखे हैं, लेकिन बेटे को कभी होमवर्क करने में मदद कभी नहीं की। उसकी अब तक की पढ़ाई स्कूल के शिक्षक और ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षक के सहारे चल रही है। दूसरे परिचित और उनकी पत्नी के लिए अपनी महत्त्वाकांक्षाओं और व्यस्तताओं के आगे बच्चों की परवाह लगभग नहीं है। लेकिन उन्हें इस बात का डर जरूर है कि बेटी अपनी मर्जी से कुछ ऐसा न कर जाए जिससे आसपास के लोगों को उन पर अंगुली उठाने का मौका मिले।

ऐसे बहुत से उदाहरण मिल जाएंगे, जहां मां-बाप बच्चों को जन्म तो देते हैं, लेकिन उनकी तरफ ध्यान देना अपना फर्ज नहीं समझते। बच्चों की हर जिद पूरी करने में पैसे पानी की तरह बहाने में उन्हें कोई हिचक नहीं होती। लेकिन सच यह है कि सिर्फ पैसों और अपनी दिखावे की इज्जत से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल नहीं बनाया जा सकता। पौधे सिर्फ खाद डालने से नहीं पनपते, उन्हें जल से सिंचाई, आवश्यक देखभाल और धूप-छांव में जरूरत के अनुसार रखने की जरूरत होती है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App