ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे: विकृति की बोली

दरअसल, भड़काने वाले लोग समाज में बहुतायत में पाए जाते हैं। समाज में लोगों को एक दूसरे के खिलाफ भड़का कर लड़ाई-झगड़े और खून-खराबे तक की घटनाओं को अंजाम देने में ऐसी विकृत मानसिकता वाले लोग लगे रहते हैं। इनकी बातों पर ध्यान न देना ही श्रेयस्कर है।

दुनिया मेरे आगे: समाज का एक तबका लोगों को लड़ाने में लगा रहता है। इसमें उसे मजा आता है।

अरुणा कपूर
समाज में भड़काने वाले लोगों का भी एक अघोषति विचित्र वर्ग होता है। ये लोग अपने संपर्क में आने वाले अन्य लोगों को उकसाने का काम करते हैं। इनके उकसाने पर, इनकी बातों पर गौर करने वाला या इनके बहकावे में आकर ऐसे कार्य को अंजाम देने वाले व्यक्ति का जो भी और जितना भी नुकसान हो जाता हो, भड़काने वाले लोग इसकी कोई परवाह नहीं करते। इन्हें बस इस बात से मतलब रहता है कि किसी तरह भ्रमित होकर लोग इनकी बातों पर अमल कर बैठते है। इसी में ऐसे लोग अपनी जीत का अनुभव करते हैं। कई बार इनके ऐसे काम के पीछे कोई खास मंशा होती है और वह खतरनाक भी हो सकती है और कई बार वे सिर्फ मनोरंजन या किसी को तंग करने के लिए ऐसा करते हैं। लेकिन इसके नतीजे घातक भी हो सकते हैं।

अक्सर ऐसे मामले देखे जाते हैं कि ऐसे लोगों की भड़काने वाली बातों में आकर कमजोर मानसिकता वाले लोग कई बार अपने शुभचिंतकों पर शक करके उनके साथ के अपने अच्छे संबंधों को खत्म कर देते हैं। नतीजतन, अपना ही नुकसान कर बैठते हैं। यहां तक कि मीठी-मीठी बातों के जाल में फंसा कर और प्रेम-दुलार का झूठा दिखावा करके ऐसे लोग दूसरे परिवारों के बच्चों को उनके माता-पिता के विरुद्ध खड़े होने की शिक्षा देने से भी कतराते नहीं हैं। चिकित्सा विज्ञान की जांच में भी ये तथ्य सामने आ चुके हैं कि ऐसा करने वालों की मानसिकता विकृत होती है।

किसी से अपनी निजी दुश्मनी निकालने या बदला लेने के लिए भी कुछ लोग भड़काने काम करते हैं। इस प्रवृत्ति के ज्वलंत उदाहरण हमें आसपास तो मिलते ही रहते हैं, ‘महाभारतछ की कथा में भी मौजूद हैं। तो क्या परंपरा में शामिल कथाओं के जरिए भी इस प्रवृत्ति का विस्तार होता है? ‘महाभारत की कथा में शकुनी मामा ने अपनी बहन गांधारी के परिवार का विनाश करने के बारे में सोच कर उसके बच्चों के मन में लगातार मीठी बातें करके जहर घोल दिया था। परिणामस्वरूप गांधारी और धृतराष्ट के बच्चे यानी कौरव अपने पांडव परिवार से दुश्मनी निभाने की भूल कर बैठे और अपने साथ-साथ पांडव परिवार के विनाश का कारण बने।

गांधार नरेश शकुनी के भड़काने के कारण ही दुर्योधन और दु:शासन ने कई गलतियां की और महाभारत का विनाशकारी युद्ध हुआ। यानी शकुनी अपने मंसूबे में कामयाब हुआ। समाज में आज भी इस प्रवृत्ति के लोग इसी तरह से भड़काने का काम करते रहते हैं, जो सिर्फ अपनी विकृत मानसिकता को संतुष्ट करने के लिए ही ऐसा करते हैं।

इसके अलावा, कुछ लोग निजी दुश्मनी न होते हुए भी अपनी अहमियत जताने के लिए जहां भी जरा-सा मौका मिला नहीं, कि अपना भड़काने का शस्त्र चला देते हैं। मेरे सामने ही एक दुखद प्रसंग घटित हुआ था। कुछ दशक मेरे कॉलेज की पढ़ाई के दौरान मेरी एक सहेली की शादी हुई। शादी के दस दिन बाद ही उसके पति की एक हादसे में मृत्यु हो गई। उसके लिए वह बहुत दुखद घड़ी थी। उसके बाद मेरी सहेली अपने मायके आ गई थी। उसके मायके आने के दो हफ्ते बाद हम कॉलेज की दस सहेलियां उससे मिल कर सांत्वना देने उसके घर गए। उस समय वह घर में अकेली थी। उसने गुलाबी रंग का फूलों वाला सूट पहना हुआ था और बालों को बांधा हुआ था।

घर के बैठकखाने में बैठ कर वह कोई पत्रिका पढ़ रही थी। हमारे वहां पहुंचने पर उसने पत्रिका एक तरफ रख दी। सहेली से हमने बातचीत करनी शुरू की, वह दुखी थी, लेकिन बात कर रही थी। अचानक हमारी एक अन्य सहेली उससे बोल पड़ी- ‘तुम तो बहुत अक्लमंद और बहादुर निकली! कितनी स्वस्थ और सामान्य हो… जैसे कुछ हुआ ही न हो। कपड़े, बालों को संवारने का तरीका! अगर मैं तेरी जगह होती तो शायद आत्महत्या ही कर लेती!’

बेलगाम होती उस सहेली को किसी तरह से आगे बोलने से हम लोगों ने रोक लिया। लेकिन दुख में पड़ी हमारी सहेली रुआंसी-सी होकर वहां से उठ खड़ी हुई और दूसरे कमरे में चली गई। हम उसके पीछे गए, लेकिन उसने दरवाजा बंद कर लिया। दुखी मन से हम सब उसके घर से निकले। रास्ते में हमने ऊल-जलूल बोलने वाली अपनी दूसरी सहेली को खरी-खरी सुनाई, लेकिन उसकी बात का जो असर होना था, मेरी उस बेहद तकलीफ में पड़ी सहेली पर हो चुका था।

दो दिन बाद ही खबर मिली कि हमारी पहले वाली सहेली ने नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। उसकी मां का लगातार उस पर ध्यान रहता था, इस वजह से उसे तत्काल किसी तरह बचाया जा सका। हम बाकी सहेलियों ने आपस में दुख साझा करके यही समझने की कोशिश की कि हमारी दूसरी सहेली को वैसा बोलने से क्या मिला और उसने ऐसा क्यों किया!

दरअसल, भड़काने वाले लोग समाज में बहुतायत में पाए जाते हैं। समाज में लोगों को एक दूसरे के खिलाफ भड़का कर लड़ाई-झगड़े और खून-खराबे तक की घटनाओं को अंजाम देने में ऐसी विकृत मानसिकता वाले लोग लगे रहते हैं। इनकी बातों पर ध्यान न देना ही श्रेयस्कर है।

Next Stories
1 दुनिया मेरे आगे: घर की संस्कृति
2 दुनिया मेरे आगे : कोरोना और मानसिक स्वास्थ्य
3 दुनिया मेरे आगेः अपना-अपना आनंद
कोरोना:
X