ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगेः अपने आसपास

जिंदगी हम सिर्फ खुद के साथ नहीं जीते हैं, यह तो तय है। हमारे इर्द-गिर्द के लोग, परिवार-दोस्त के साथ साथ कई बातें-लम्हे-किताबें और किरदार भी हमारी जिंदगी को प्रभावित करते हैं।

Author November 17, 2017 2:42 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

वर्षा सिंह

जिंदगी हम सिर्फ खुद के साथ नहीं जीते हैं, यह तो तय है। हमारे इर्द-गिर्द के लोग, परिवार-दोस्त के साथ साथ कई बातें-लम्हे-किताबें और किरदार भी हमारी जिंदगी को प्रभावित करते हैं। इससे आगे हम अपनी जिंदगी अपनी प्यारी कुर्सियों, बिस्तर, रजाइयों, तकियों के साथ भी साझा करते हैं। घर अदलने-बदलने में कई बार पीछे छूट चुका मकान कितनी सारी स्मृतियों के साथ चहचहाता है, जिसे कभी हम नींद में बुदबुदाते हैं। बचपन में जन्म-दिन पर पहनी गई कोई ड्रेस जीवन के चालीसवें दशक में भी कभी किसी लम्हे में याद आ जाती है। बरसों पहले की मेरी स्मृतियों में कनेर के वे फूल आज भी ताजा हैं। इतना पीला चमकदार आज तक कुछ नहीं लगा। इसी तरह कई बार किताबों में पढ़े हुए किरदार अपने अनुभव आप के साथ साझा करते हैं। मुल्ला नसरुद्दीन की किस्सागोई का एक छोटा सा वाकया जिंदगी के कई मोड़ों पर याद आ जाता है और जैसे खुद मुल्ला नसरुद्दीन आपके ठीक बगल में आ खड़े होते हों। अरे जब मुल्ला नसरुद्दीन अपने खोए हुए गधे को ढूंढ़ रहे थे, इसके लिए उन्होंने खुद को एक गधे के रूप में महसूसा या फिर कोई और किस्सा।

मुझे तो लेखक हरमन हेजे के सिद्धार्थ भी कई बार सफर में चलते हुए महसूस होते हैं। जंगल के रास्तों को नापते हुए कि बस मंजिल पर आ ही गए। दो कोस और, दो कोस और कहते हुए जाने कितने कोस चल लिए। लेकिन बुद्ध बनने की राह नामुमकिन की हद तक मुश्किल है। कॉलेज के दिनों में शरतचंद्र के अक्खड़ देवदास और उनका इंतजार करती हुई पारो के बगल में उन्हें दिलासा देते हुए हम कई बार बैठे। स्कूल की किताब में प्रेमचंद के पन्नों से निकल कर वह बुधिया कई बरस तक डराती रही जो दर्द के मारे चीखती थी और कमरे के बाहर उसके पति और ससुर भुने हुए आलू खा रहे थे। उसका वह दर्द कई बार अपने किसी दर्द से मेल खाता हुआ लगा। या फिर जब हम दर्द के उस स्तर पर पहुंचे जो बुधिया ने झेला।

‘यू टू ब्रूटस’ जब जूलियस सीजर ने बोला था। ये तीन शब्द भरोसा टूटने पर अपने आप कानों में गूंज जाते हैं। हम जो पढ़ते-लिखते हैं, उससे पैदा हुआ विचार हमारे अंदर की बस्ती में हमेशा के लिए बैठ जाता है और कभी-कभी बेपनाह याद आता है। अकेलेपन में अपनी लंबी कविता में चलती हुई लूसी ग्रे याद आती है। जब जिंदगी से हार रहे होते हैं, मन में गुस्से का गुबार जमता है तो मारियो पूजो के ‘गॉड फॉदर’ के मुख्य चरित्र की तरह दिमाग हरकत करना चाहता है, दरअसल कर पाना बहुत मुश्किल है। दर्द में ठोकर खाए हीरामन के साथ हम भी कहीं उसी रेलवे प्लेटफॉर्म पर खड़े हो जाते हैं, जब वह कंपनी वाली बाई को विदा कर रहा होता है।

कभी किसी थकी हुई शाम में किताबों के ये किरदार चैन के दो खूबसूरत पल देते हैं जिनमें डुबकी लगा हम एक पूरा जीवन जी लेते हैं। कभी किसी दुख में ये हमारा सिराहना बन जाते हैं। जैसे हमारे बालों में उंगलियां फेर कर दिलासा दे रहे हों कि सब ठीक हो जाएगा साथी। सब ठीक हो जाएगा। ‘मेरा दागिस्तान’ में किसी मेड़ पर सुस्ताते रसूल हमजातोव कहते हैं- इतनी भागादौड़ी क्यों कर रहे हो मित्र। …
हम जिस मन:स्थिति से गुजर रहे होते हैं, उसी से मेल खाता कोई किरदार, कोई कविता, कोई कहानी हमारे जेहन में गूंजने लगती है। हमारे खयालों को स्वर देता हुआ कोई गीत हमारी जुबान पर खुद-ब-खुद आ जाता है। हमें सिचुएशन में फिट होने वाले गाने ढूंढ़ने नहीं होते। ऐसे ही हमारे दिल में चल रही उथल-पुथल, खुशी या गम से मेल खाते किरदार खुद-ब-खुद हमारे सामने आ जाते हैं। कभी बुधिया, कभी पारो, कभी नानी के लिए चिमटा खरीद कर लाने वाले नन्हे हमीद की याद दौड़ी चली आती है।

जिंदगी जब हमें हराती-छकाती है तो अपने इन नायक-नायिकाओं के बीच हम उम्मीद की किरणें ढूंढ़ते हैं। जंगली घास पर लिखा हुआ एक लंबा लेख मुझे याद आता है। जिसे कोई कितना भी कुचले वह फिर से सीना तान कर उठ खड़ी होती है। समंदर किनारे पूरे चांद के साथ हम भी उस मछुआरे के बगल में बैठ जाते हैं जो अपने ही बेटे से झगड़ कर उदास बैठा है। फिल्मों के गानों, किरदारों, चिड़ियों की चहचहाहटों, धूप और साए के साथ-साथ जिंदगी बरसों बरस गुजरती जाती है। कभी किसी ठहरे हुए पल में इनका शुक्रगुजार होना चाहिए। उन किताबों की कीमत से कहीं ज्यादा उनका मूल्य होता है। उससे हासिल अनुभव होता है। हमारे आसपास खिले फूल, अपने काम में मगन तितलियां, किसी पेड़ पर अठखेलियां कर रही गिलहरी, ये सब हमारी जिंदगी को रोशन करती हैं। ये ऐसे तोहफे हैं, जो हमें बिन मांगे मिले हैं। कभी किसी खाली समय में हमें इन सबका भी शुक्रिया अदा करना चाहिए।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App