ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगेः कहानियों का मेला

मेला जाने के बचपन के खूब अनुभव रहे हैं। जब गांव में रहते थे तो साल में चार-पांच मेलों में जरूर जाते थे। तो हाल ही में एक मेले के बारे में कीर्ति जयराम के आमंत्रण ने जिज्ञासा बढ़ाई।

Author Published on: June 30, 2017 3:53 AM
प्रतीकात्नमक तस्वीर

शिवनारायण गौर

मेला जाने के बचपन के खूब अनुभव रहे हैं। जब गांव में रहते थे तो साल में चार-पांच मेलों में जरूर जाते थे। तो हाल ही में एक मेले के बारे में कीर्ति जयराम के आमंत्रण ने जिज्ञासा बढ़ाई। इस मेले का आयोजन राजस्थान के किशनगढ़ ब्लॉक के एक गांव में होने वाला था। दरअसल, यह एक कहानी मेला था। सुन कर थोड़ा अटपटा लगता है कि भला कहानी पर भी कोई मेला हो सकता है क्या! लेकिन मेले का नया स्वरूप भी हो सकता है। तो आनन-फानन में हम कुछ मित्रों ने ट्रेन पकड़ी और कहानी मेला देखने भोपाल से किशनगढ़ पहुंच गए।
गौरतलब है कि हमारे देश के हिंदीभाषी इलाकों में पढ़ने-लिखने की संस्कृति अमूमन नगण्य ही है। हम यहां देखते हैं कि स्कूल में पढ़ना-लिखना आमतौर पर बड़ा नीरस होता है। लेकिन वहां पढ़ने के अलावा किसी किताब को पढ़ने की लालसा बहुत कम दिखती है। अच्छी किताबों की कमी भी इसकी एक वजह हो सकती है। टाटा ट्रस्ट के एक अध्ययन की मानें तो भारत में पांच बच्चों पर एक किताब उपलब्ध है, वहीं पश्चिमी देशों में यह आंकड़ा एक बच्चे पर पांच किताबों का है। यानी हमारी स्थिति पाठ्य-पुस्तकीय पठन से आगे लगभग न के बराबर है।

इसलिए जब हम किशनगढ़ में कहानी मेला गए तो देख कर बड़ा सुकून मिला। सालाना होने वाला यह जलसा राजस्थान के गांवों में पढ़ने-लिखने की गतिविधियों पर काम करने वाली एक संस्था द्वारा आयोजित किया जाता है। किशनगढ़ प्रखंड के चूंदड़ी गांव में यह मेला चल रहा था। लगभग सवा सौ घरों वाले इस छोटे-से गांव की जनसंख्या एक हजार के करीब होगी। राजस्थान के हमारे पुराने अनुभव हैं कि यह काफी सामंती सोच वाला इलाका रहा है। खासतौर पर महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने के मामले में तो इसकी हालत और भी बुरी है। बाल विवाह जैसी प्रथा यहां आज भी देखी जा सकती है। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में शिक्षा और पढ़ने-लिखने पर आधारित कहानी मेले का आयोजन चुनौतीपूर्ण है।
जिस सरकारी भवन में वह मेला आयोजित किया गया था, वहां खूब भीड़ जुटी थी। खासतौर पर बच्चे काफी थे और लगभग सभी उत्साहित दिख रहे थे। यह तब था जब फिलहाल वहां मेले की तैयारियां चल रही थीं। बहुत ही नवाचारी ढंग से चीजों को प्रस्तुत किया जा रहा था।

जैसे दो खटियों यानी चारपाई को एक दूसरे के सहारे खड़ा करके उस पर रचनाओं को लगाया गया था। इसके अलावा पूरे मेले में रचनात्मकता को प्रस्तुत करने वाले कई कोने तैयार किए गए थे। एक कोना था कहानी का खजाना। बहुत सारी किताबों को खुले ढक्कन वाली एक पेटी में रख कर जमीन में आधा गाड़ दिया गया था। इसके आसपास भी कई किताबें सुंदरता से प्रदर्शित की गई थीं। कुछ किताबों के बारे में हाथ से लिखे छोटे पोस्टर लगाए गए थे। कुल मिलाकर यह एक ऐसा कोना था, जिसमें इत्मीनान से बैठ कर किताबें पढ़ने का आनंद लिया जा सकता था। कई बच्चे मेले के बाकी आकर्षण के बजाय पढ़ने में लगे थे।
मेले में बच्चे कहानियां लिख कर लाए और उसे सभी के सामने रखा। एक कोना, जहां आपको तरह-तरह की कहानियां पढ़ने को मिलेंगी। जैसे कुछ कहानियां पुस्तकालय की किताबों को आगे बढ़ाती हैं और कुछ कहानियां सवालों के साथ उन्हें पूरी करने का आग्रह भी पाठकों से करती हैं। अपने अनुभवों को साझा करने के लिए बच्चों की रचनाएं एक अच्छा माध्यम थीं। उन्होंने कहीं अपनी यात्राओं के संस्मरण लिखे, तो कहीं अपनी भावनाओं को उकेरा। गांव का नक्शा एक ऐसा कोना था जहां लोग गांव के बारे में रोचक जानकारी पा सकते थे। पिछले कुछ दशकों के दौरान गांव में किस तरह के बदलाव हुए हैं, ये नक्शे उसके बारे में बता रहे थे। दादा-दादी और नाना-नानी की कहानियां- एक और मजेदार कोना तैयार किया गया था।

अमूमन सभी ने इस तरह के किस्से अपने बचपन में सुने हैं। इस तरह से कहानियां सुनने या सुनाने की यह रिवायत आमतौर पर मौखिक ही रही है। मगर इस मेले में बच्चों ने इसके लिखित आयाम पर काम किया। उन्होंने अपने बुजुर्गों से कहानियां सुनीं और उन्हें कहानियों के ‘कोने’ में प्रस्तुत किया। इसके अलावा भी मेले में कठपुतली, कसीदाकारी, कार्टून, मुखौटे आदि कॉर्नर थे। पूरे मेले में एक खास बात यह थी कि महिलाओं, लड़कियों की भागीदारी तुलनात्मक रूप से ज्यादा थी। आज जब टीवी, मोबाइल के चलते हम किताबों की दुनिया से और दूर होते जा रहे हों, इस तरह के कहानियों के मेले उम्मीद जगाते हैं। वैसे भी, किताबों से दूर होते लोगों के मशीन में गुम होते जाने के बाद चल रही दुनिया में संवेदना की क्या जगह होगी, इसका अंदाजा हम लगा सकते हैं। और संवेदना से दूर समाज कैसा, क्या हम यह समझ पा रहे हैं!

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 दुनिया मेरे आगे- कोलकाता में एक दिन
2 दुनिया मेरे आगे- जिजीविषा के सहारे
3 दुनिया मेरे आगे- कुएं का दायरा