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दुनिया मेरे आगे: डर का मुकाबला

कोरोना के कारण जिस तरह से दुनिया भर में बनने वाले ‘मास हीस्टिरिया’ के संकेतों को समझते हुए दुनिया के कुछ देशों की ओर से इसे रोकने की अपील की गई है और सही जानकारी हासिल करने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इससे माहौल को तनावपूर्ण होने से बचाया जा सकता है।

Author Published on: March 25, 2020 4:45 AM
Coronavirus से बचने के लिए उपाय

योगिता यादव
दुनिया भर में इस वक्त कोरोना सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। इसमें तेरह मार्च की तारीख खास है, जब कोरोना से हुई भारत में दो मौतों के बाद से इस पर तनाव और ज्यादा बढ़ने लगा। कोरोना यानी ‘कोविड-19’ के कारण अर्थव्यरवस्था की सांस पहले ही फूलने लगी है। सेंसेक्स लुढ़कने से होने वाला नुकसान मास्क और सेनिटाइजर भी नहीं बचा पाएंगे। शुक्रवार को ही इस वायरस के कारण सबसे पहले कर्नाटक के एक छिहत्तर वर्षीय शख्स की मौत की खबर आई तो दिल्ली की एक उनहत्तर वर्षीय महिला की भी कोरोना के कारण मौत हो गई। पहले मामले में जहां शख्स खुद सउदी अरब से लौटा था, वहीं दूसरे मामले में महिला का बेटा विदेश यात्रा से लौटा था।

कोरोना पर बढ़ते तनाव के बीच हवाईअड्डे पहले ही अतिसंवेदनशील हो गए थे। अब आलम यह है कि स्कूल, मॉल, बाजार, सिनेमाघर सहित सभी सार्वजनिक स्थलों को बंद किया जाने लगा है। इसके साथ ही कोरोना से बचने में कारगर बहुत जरूरी चीजों में मास्क, सेनिटाइजर आदि की जमाखोरी भी शुरू हो गई है। भारत में भी एहतियात की जरूरत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मास्क, गाउन, सेनिटाइजर जैसी चीजों की कमी बताई और दुनिया के सभी देशों से इसका उत्पादन बढ़ाने की अपील की है। ताकि बढ़ी हुई मांग को पूरा किया जा सके। सब्जियों की खरीद भी चिकेन से ज्यादा बढ़ गई है। अब मोबाइल पर वे वाट्सएप स्टीकर ईजाद कर लिए गए हैं जो कोरोना से बचाव के तरीके सिखा रहे हैं। एक स्वामी ने कोरोना वायरस से बचने का दावा करते हुए ‘गौमूत्र पार्टी’ आयोजित करने की घोषणा भी कर दी। कहीं शिवलिंग तक को मास्क पहनाने की खबर आई।

यह एक वायरसजनित बीमारी के ‘मास हीस्टिरिया’ यानी एक आम उन्माद में बदलने के संकेत हो सकते हैं जिन पर बहुत एहतियात से काबू पाना जरूरी है। हालांकि इससे पहले स्पेनिश फ्लू जैसा खतरनाक वायरस 1918 में भारी तादाद में लोगों की जान ले चुका है। रशियन फ्लू, एशियन फ्लू और हॉन्गकॉन्ग फ्लू ऐसे वायरस रहे हैं, जिन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया था। इस सबसे जानमाल का तो नुकसान हुआ था, पर भौकाल इतना नहीं मचा, जितना इस बार मच रहा है। पिछले कुछ सालों के इसी मौसम पर गौर करें तो जीका, निपाह जैसे कई वायरस इन्हीं दिनों में फैलते हैं। यही मौसम सर्दी-जुकाम जैसे मौसमी बुखार के फैलने का भी वक्त होता है जिस दौरान सूर्य की रोशनी कम मिल पाती है। गरमी बढ़ने के साथ ही धीरे-धीरे ये नियंत्रण में आने लगते हैं। लेकिन कोरोना के जो लक्षण सामने आए हैं, उसमें हर स्तर पर एहतियात बरतना जरूरी है, लेकिन साधारण सर्दी-जुकाम के प्रति भी कोरोना जैसा तनाव होना बेमानी है।

बेहद तनावपूर्ण माहौल में कई देशों में स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया गया है। लेकिन यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि किसी मसले पर आम उन्माद यानी ‘मास हीस्टीरिया’ में लोगों के एक बहुत बड़े समूह को एक जैसी भावनाओं की अनुभूति होने लगती है। इसमें भावनात्मक डर और असुरक्षा ही नहीं, बल्कि तेज सिर दर्द होना, सांस लेने में तकलीफ, घुटन आदि भी शामिल है। यही वजह है कि ‘मास हीस्टिरिया’ को सिर्फ मनोवैज्ञानिक समस्या नहीं कहा जाता, बल्कि इसे ‘मास साइकोजेनिक इलनेस’ यानी मनोवैज्ञानिक रूप से व्यापक स्तर पर फैली बीमारी के रूप में जाना जाता है, जिसमें मानसिक बीमारी के कारण शारीरिक समस्याएं भी पेश आने लगती हैं।

कोरोना के कारण जिस तरह से दुनिया भर में बनने वाले ‘मास हीस्टिरिया’ के संकेतों को समझते हुए दुनिया के कुछ देशों की ओर से इसे रोकने की अपील की गई है और सही जानकारी हासिल करने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इससे माहौल को तनावपूर्ण होने से बचाया जा सकता है।

कोरोना एक ऐसा वायरस है जिसके आसपास उभरे हुए तिकोने जैसे हैं, जिसके कारण वे मुकुट यानी क्राउन की सी झलक देते हैं। यही इसे अन्य वायरस से संरचना और आकार में अलग करता है। इसका आकार इतना बड़ा है कि इससे बचाव में किसी भी तरह का मास्क सुरक्षित हो सकता है। साधारण रूमाल से भी अपने मुंह को ढक कर इससे बचाव किया जा सकता है। अफवाहों और गलत उदाहरणों के चक्कर में पड़ने के बजाय यह जरूरी है कि ऐसी जगहों पर जाने से बचा जाए जहां अजनबी लोगों की भीड़ होती है। कोरोना के कारण हुई मौतों पर गौर करें तो इसमें मरने वाले ज्यादातर लोग उम्रदराज थे। इस उम्र में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसलिए यह जरूरी है कि निजी स्वच्छता के साथ ही अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता का भी खास खयाल रखा जाए। इसे बढ़ाने में विटामिन सी से भरपूर सिट्रस फल कारगर सिद्ध होते हैं। जिस तत्परता, समझदारी और तैयारी से चीन ने इसे नियंत्रित किया है, वह हम सबके लिए एक सबक है।

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