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चौपालः सुरक्षा का अभ्यास

अमेरिका, भारत और जापान की नौसेनाओं के बंगाल की खाड़ी में सोमवार से जारी त्रिपक्षीय ‘मालाबार’ अभ्यास को चीन के बढ़ते दखल के खिलाफ एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

अमेरिका, भारत और जापान की नौसेनाओं के बंगाल की खाड़ी में सोमवार से जारी त्रिपक्षीय ‘मालाबार’ अभ्यास को चीन के बढ़ते दखल के खिलाफ एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। चीन हिंद महासागर में अपनी पहुंच बढ़ा कर भारत को घेरने की नीति का अनुसरण कर रहा है। ऐसे में इस नौसेना अभ्यास के बंगाल की खाड़ी में होने के गहरे निहितार्थ हैं। भारत के लिए हिंद महासागर आर्थिक रूप से ही नहीं बल्कि रणनीतिक व सामरिक लिहाज से भी महत्त्वपूर्ण है।

भारत का अठहत्तर फीसद अंतराष्ट्रीय व्यापार हिंद महासागर क्षेत्र से ही होता है और भारत के प्राकृतिक गैस तथा पेट्रोलियम की दो तिहाई-तिहाई मात्रा हिंद महासागर की विभिन्न शाखाओं से ही प्राप्त होती है। पिछली कई सदियों का इतिहास बताता है कि हिंद महासागर दो दुनियाओं (पूरब और पश्चिम) को जोड़ने में एक सेतु, अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दृष्टि से ‘हाइवे’ और सामरिक लिहाज से विस्तृत रणनीतिक क्षेत्र के रूप में प्रतिष्ठित रहा है। हिंद महासागर की अहमियत हम पिछली सदी के समुद्री इतिहासकार अल्फ्रेड माहन के इस कथन से समझ सकते हैं कि हिंद महासागर पर जिस भी देश का प्रभुत्व रहेगा वह पूरी दुनिया पर अपना प्रभुत्व स्थापित करेगा।

आने वाले वक्त में यह देखना भी दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका और जापान के साथ भारत की साझेदारी चीन के ‘स्ट्रिंग आॅफ पर्ल्स’ को तोड़ पाएगी? क्या हिंद महासागर में भारतीय हलचल चीन के ‘मैरीटाइम सिल्क रूट’ को सीमित कर पाएगी जो मलक्का से अदन की खाड़ी तक के समुद्री व्यापार पर एकाधिकार करने की युक्ति के रूप में सामने आता दिख रहा है। हिंद महासागर चूंकि भारत से लगा हुआ है इसलिए इसे भारत का आंगन भी कहा जाता है।

इस क्षेत्र में दूर से कोई आकर अपनी पैठ बनाने की कोशिश करे या अपनी स्थायी मौजूदगी जमाने का प्रयास करे तो भारत का काफी संजीदगी दिखाना लाजिमी है। इसके लिए भारत को नौसेना की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि वह थल ही नहीं बल्कि जल में भी चीनी चालबाजी का डट कर सामना कर सके। यह ध्यान देने की भी जरूरत है यदि भारत को अग्रिम पंक्ति में रहना है तो आर्थिक महाशक्ति बनने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ महासागरीय कूटनीति में भी गहरी छाप छोड़नी होगी।
’कैलाश मांजु बिश्नोई, मुखर्जीनगर, दिल्ली

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