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दुनिया मेरे आगे: मिट्टी में खेलना

बच्चों को मिट्टी में खेलने की अनुमति देना उनको सुकून देने और शांत रखने में मदद करता है। जिन बच्चों को खुले वातावरण और मिट्टी में खेलने की इजाजत नहीं मिलती, उन बच्चों को प्रकृति के महत्त्व के बारे में बहुत कम जानकारी हो पाती है।

दुनिया मेरे आगेबच्चों को मुक्त होकर खेलने देने से उनका प्राकृतिक विकास तेजो होता है। (फोटो सोशल मीडिया)

निर्मल कुमार शर्मा
विश्व प्रसिद्ध दार्शनिक रूसो ने कहा है कि ‘कोई बच्चा खेल रहा है तो उसे स्वच्छंद खेलने दीजिए। इस पर आपका प्रश्न होगा कि बच्चे व्यर्थ में खेलने में समय बर्बाद करेंगे तो उनका व्यक्तित्व कब निखरेगा, वे कब पढ़ेंगे! यहां मेरा प्रति-प्रश्न है कि उस बच्चे का बचपना क्या आप फिर एक बार लौटा सकते हैं? आप कहेंगे कि जी नहीं। तो आपको उस बच्चे को खेलने से रोकने का कतई अधिकार नहीं रखते हैं। उन्हें इस धरती पर स्वच्छंद रूप से खेलने दीजिए… उनके व्यक्तित्व का स्वाभाविक और नैसर्गिक विकास होने दीजिए।’

प्राचीन काल से ही भारत के गांवों में हमारे बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहा करते थे कि मानव शरीर मिट्टी का बना है… यह एक दिन मिट्टी में ही मिल जाएगा। इसका जरूरत से अधिक ध्यान रखने से कुछ नहीं मिलेगा। लेकिन आज के कथित आधुनिक मां-बाप लाड़-प्यार में अपने बच्चों पर मिट्टी का एक कण भी नहीं लगने देते! पुराने जमाने के बच्चे सारा दिन मिट्टी में ही खेलते रहते थे और वे निश्चित तौर पर आज की नौजवान पीढ़ी से हर तरह से मानसिक और शारीरिक दृष्टिकोण से अधिक स्वस्थ रहते थे। बच्चों को मिट्टी में खेलने देने से उन्हें कई तरह के फायदे हो सकते हैं। मिट्टी में खनिज, जल, वायु, कार्बनिक पदार्थ और अनगिनत जीवों के जटिल मिश्रण पाए जाते हैं।

मिट्टी को ‘पृथ्वी की त्वचा’ भी कहा जाता है। साथ ही यह शरीर को कई बीमारियों से दूर रखने में भी मदद करती है। पुराने जमाने में कोई चोट लग जाने पर एक खास मिट्टी, अक्सर खेत की शुद्ध काली मिट्टी का लेप लगा कर ही चोट को ठीक कर लिया जाता था। मुल्तानी मिट्टी का ‘फेसपैक’ भी मिट्टी में पाए जाने वाले पोषक तत्त्वों के कारण ही इतना फायदेमंद है। मिट्टी में सेहत के अनुकूल कई तरह के बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। बच्चा चाहे गरीब का हो या फिर अमीर का, मिट्टी में खेलना हर बच्चे की पहली पसंद होती है। यह अलग बात है कि कई मां-बाप बच्चों को मिट्टी में नहीं खेलने देते। उन्हें डर होता है कि कहीं बच्चों में संक्रमण न फैल जाए। लेकिन ऐसा कतई नहीं है।

बच्चों के दिमाग में सबसे अधिक नए-नए विचार आते रहते हैं। मिट्टी में जब बच्चे खेलते हैं तो वे अपने विचारों को एक नया रूप देते हैं। रोजाना ऐसा करने से उनकी रचनात्मक सोच में वृद्धि होती रहती है। आजकल अक्सर हम देखते हैं कि बच्चों को जुकाम बहुत जल्दी हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि बच्चों का ‘इम्यून सिस्टम’ यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर हो चुकी है। अगर हम अपने बच्चों को मिट्टी में खेलने देते हैं, तो इससे बच्चे की रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ेगी। साथ ही उन्हें मानसिक तौर पर भी मजबूती मिलती है। हाल ही में एक नए शोध में अमेरिका की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल’ में हुए एक शोध के अनुसार जो मां-बाप अपने बच्चों को बचपन में मिट्टी में खेलने से रोकते हैं, उन बच्चों को आगे चल कर रक्तचाप और अन्य कई खतरनाक बीमारियों के होने का खतरा कई गुना ज्यादा बना रहता है, बनिस्बत उन बच्चों के जो स्वच्छंद रूप से खुले, कच्चे मैदानों या पार्कों में खेलते रहते हैं। इसलिए अपने बच्चों को जितना हो सके, खुले वातावरण में हंसने और खेलने के लिए भेजना चाहिए।

आजकल बच्चे ज्यादातर ‘इनडोर गेम्स’ यानी घरों के भीतर खेलना पसंद करते हैं। मां-बाप बच्चों को वीडियो गेम खुद लेकर देते हैं, पर वे इस बात को नहीं जानते कि इन सबके इस्तेमाल से उनका दिमाग धीरे-धीरे मंद होता जा रहा है। जबकि मिट्टी में खेलने से बच्चों का मस्तिष्क तेज होता है। उनका स्वाभाविक शारीरिक और मानसिक विकास होता है। साथ ही बच्चे वातावरण से जुड़े रहते हैं। उनकी शारीरिक गतिविधि भी इसी सहारे बहुत होती रहती है। मिट्टी की खुशबू और मिट्टी में उपस्थित सूक्ष्म लाभदायक कीटाणु बच्चों के मिजाज को हमेशा खुशनुमा बनाए रखते हैं। इसके अलावा, दूसरे बच्चों के साथ मिट्टी में खेलना उनके तनाव के स्तर को कम करता है।

इसलिए बच्चों को मिट्टी में खेलने की अनुमति देना उनको सुकून देने और शांत रखने में मदद करता है। जिन बच्चों को खुले वातावरण और मिट्टी में खेलने की इजाजत नहीं मिलती, उन बच्चों को प्रकृति के महत्त्व के बारे में बहुत कम जानकारी हो पाती है। बाहर खुले मैदानों में, पार्कों में खेलने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि मिट्टी में पाए जाने वाले तत्त्व बच्चों की त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। असल में मिट्टी में खेलने से त्वचा के रोमकूप खुलते हैं, जिससे संपूर्ण शरीर का रक्त का संचार बढ़िया तरीके से होता है। बच्चों को मिट्टी में खेलने देने से उन्हें बड़ी से बड़ी बीमारी की चपेट में आने से भी बचाया जा सकता है।

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