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फूलों का साम्राज्य

प्रकृति ने धरती पर अपने विराट वैभव भंडार से असंख्य संपदाओं को जनमानस के उपयोग और कल्याण के लिए सृजित की है।

Delhiसांकेतिक फोटो।

प्रकृति ने धरती पर अपने विराट वैभव भंडार से असंख्य संपदाओं को जनमानस के उपयोग और कल्याण के लिए सृजित की है। यह सृष्टि निर्माण के काल से अभी तक शाश्वत भूमिका में विद्यमान है, लेकिन मानव मन ने स्वार्थ से वशीभूत होकर इसे सहेजने और संवारने में अपनी कृपणता में कोई कमी भी नहीं की है। धरा के एक तिहाई से भी अधिक भूभाग पर्वत, वन-उपवन, नदी-नाले, सागर-महासागर, रेगिस्तान आदि से आच्छादित हैं। काल के कपाल पर घटित प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद प्रकृति ने अपनी अनुपम सौंदर्य की छटाओं को अंजुरी भर-भर के लोक के कल्याण के लिए लुटाया है। इस प्रसंग में प्रकृति की अद्भुत कोमल रचना फूलों का संसार एक अलग स्थान और महत्त्व रखता है।

बचपन में गांव के माध्यमिक स्कूल जाने के समय घर के आंगन में ‘दस बजीवा फूल’ खिलना घड़ी का काम किया करता था। घर में मां, चाची, दादी की नजर उस फूल पर बनी रहती थी जो हम भाई-बहनों के लिए स्कूल समय पर जाने की चेतावनी संकेत भी हुआ करता था। जमाने की प्रगति ने अब तो घड़ी, कैमरा, टॉर्च से लेकर आॅनलाइन बाजारी विधा को मोबाइल ने अपने कब्जे में कर रखा है।

साहित्य मनीषी माखनलाल चतुर्वेदी ने अपनी प्रसिद्ध कविता पुष्प की अभिलाषा में पुष्प के खिलखिलाते जीवन चित्रण के साथ मातृभूमि की सेवार्थ सलंग्न वीरों के अभिषेक का सशक्त माध्यम फूलों में दशार्या है। इन पंक्तियों में किसी देश की चर्चा नहीं है, बल्कि यह सीमाओं तक विस्तारित भूभाग के लिए कर्तव्य निर्वहन का पावन संदेश है। उसमें वनमाली से निवेदन किया गया है कि फूल को उस राह पर बिखेर दिया जाए, जहां से मातृभूमि की रक्षा में वीरों का काफिला गुजरने को है।

फूलों के महत्ता के किस्से अनेक हैं जो हमें इसके गुणों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही प्रकृति ने अपनी कोख से जिस रूप में इसका प्रस्फुटन कराया है, वह अपने अस्तित्व की गौरव गाथा आज भी मुक्त कंठ से कह रही है। फूलों का संसार निराला है, जिसका वर्णन हर धर्म के ग्रंथों में वर्णित है। फूलों के बारे में कई मान्यताओं का चित्रण कवि, लेखक, साहित्यकार, शायरों द्वारा किया गया है। धार्मिक कृत्यों में फूलों का प्रयोग पूजा और उपासना के लिए किए जाने के दैनिक दृश्य हम देखते हैं।

मनोवैज्ञानिकों का मत है कि फूल इंसान की श्रद्धा और भावना का प्रतीक चिह्न है, जबकि यह व्यक्ति के मानसिक स्थितियों से भी परिचय कराता है। फूलों के अलग-अलग रंग और सुगंध अलग-अलग के प्रभाव उत्पन्न करने की शक्ति रखते हैं। कई फूलों में औषधीय गुण भी पाए जाने का प्रमाण है। गेंदे के फूल से होम्योपैथी में कैलेंडुला दवा बनाई जाती है, जबकि गुलाब जल नेत्र की स्फूर्ति के लिए उपयोगी है। फूलों की दुनिया में गेंदे का फूल सर्वाधिक लोकप्रिय और व्यवहार में बहुलता लिए है।

फूलों से अलग अलग सुगंध के इत्र भी बनाए जाते हैं, जबकि फूलों का रस भौरें लेते हैं और तितलियां, पक्षी, मधुमक्खियां आदि फूल को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। पुराने जमाने से लेकर आज तक फूलों से वैवाहिक समारोह, जन्म दिवस और अन्य आयोजनों में इसकी सजावट खूबसूरत और आकर्षक होती है। इसके अतिरिक्त कभी-कभी हम अपने प्रियजनों को खुश करने या किसी मांगलिक अवसर पर उन्हें फूलों का गुलदस्ता भेज कर अपनी आत्मीयता का प्रदर्शन भी करते हैं। धरती से विदा हो रहे व्यक्ति को भी हम पुष्प अर्पण करना नहीं भूलते। हम कह सकते हैं कि फूल हमारे जन्म से मृत्यु काल तक हमारा साथी बना रहता है।

गुलाब, कमल, रातरानी, गेंदा, चम्पा, डहेलिया, सूरजमुखी, गुड़हल, सदाबहार, हरसिंगार आदि ये कुछ महत्त्वपूर्ण फूल हैं, जिसे लोग आम जिंदगी में देखते हैं, अनुभव करते हैं और उपयोग भी करते हैं। कमल का फूल तो हमारा राष्ट्रीय पुष्प है। गुलाब की सुंदरता पर गीतकारों, शायरों और कवियों ने खुल कर कलम चलाई है। हरसिंगार सिर्फ रात में ही खिलते हैं और इसके कई चिकित्सीय गुण भी हैं। फूलों ने समाज के एक वर्ग को रोजी-रोटी से भी युक्त कर रखा है जो फूलों की माला, गुलदस्ता, सजावट से उन्हें आय का स्रोत प्राप्त कराता है। कुछ लोग इसकी खेती भी करते हैं, जबकि फूलों के निर्यात और आयात ने इसे विश्व व्यापार का एक साधन भी तय किया है।

दुनिया के कई देशों में वार्षिक रूप से फूल महोत्सव मनाए जाते हैं, जहां पर्यटकों की भरमार रहती है। अपने श्रीनगर में अप्रैल माह में ट्यूलिप उत्सव प्रसिद्ध है, जबकि जापान में चेरी-ब्लोज्म, नीदरलैंड के एम्स्टर्डम में ट्यूलिप का सालाना समारोह भी विख्यात है। यूरोप के आस्ट्रिया को फूलों का देश भी कहा गया है, जहां फूलों की खेती के कुशल कामगार भारतीय ही हैं। कहा जा सकता है कि महामारी की वजह से मौजूदा एकाकीपन के दौर में मायूसी से उबरने के लिए हर परिवार को अपने घर के किसी कोने में अपनी पसंद के किसी फूल के पौधे रखने पर अवश्य विचार करना चाहिए, ताकि उनके जीवन में फूल अपनी कोमलता, सुगंध और रंग बिखेर सके।

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