शब्दों का इंद्रधनुष

जब हम अपने मन से एक छोटा-सा संदेश लिख कर किसी को भेजते हैं, तब वे मौलिक शब्द हमारी सोच और कल्पना में चार चांद लगा देते हैं, तो जरा सोचिए कि रोज एक पेज लिख देने से हमारा पूरा दिन और फिर हौले-हौले यह जीवन कितना खूबसूरत हो सकता है!

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सांकेतिक फोटो।

पूनम पांडे

जब हम अपने मन से एक छोटा-सा संदेश लिख कर किसी को भेजते हैं, तब वे मौलिक शब्द हमारी सोच और कल्पना में चार चांद लगा देते हैं, तो जरा सोचिए कि रोज एक पेज लिख देने से हमारा पूरा दिन और फिर हौले-हौले यह जीवन कितना खूबसूरत हो सकता है! लिखने को तो निराशा मिटाने की सबसे बढ़िया दवा माना गया है, फिर भी हम जिंदगी की आपाधापी में दो पल बैठ कर लिखना ही भूल जाते हैं।

जर्मन वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध के मुताबिक हमारे मन मे असंख्य भाव पैदा होते हैं। उन्हें दबाना नहीं, बल्कि बाहर निकालना भी जरूरी होता है, क्योंकि इससे कई जानलेवा बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। एक जगह बैठ कर लिखने से मन हल्का महसूस होने लगता है, बल्कि अपने बेचैनी वाले भावों को दबा लेने या मन ही मन घुटने वाले लोगों में ‘स्ट्रेस हॉर्मोन कॉर्टीसोल’ का स्तर बढ़ जाता है और उन्हें हृदयाघात, कैंसर, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियां होने का खतरा चालीस प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसलिए अपना एक नियम बना लेना चाहिए कि डायरी लिया जाए, उसमें कुछ लिख दिया जाए और प्यार, नफरत, शिकायत या गुस्से को लिख कर निकाल दिया जाए।

किसी कारण से अचानक किसी व्यक्ति से नाराजगी हो, तो उम्र या पद का लिहाज करते हुए साफ और बेलाग अपनी शिकायत को उसके सामने जाहिर करना भारी पड़ सकता है। तो अपनी डायरी के साफ पन्ने को मित्र या साथी कह कर उस पर इसे लिख कर दोबारा खुद से ही साझा किया जाए, तो एक जादुई अहसास होगा कि हम किसी आनंद की अवस्था में आ गए हैं। तनाव, दर्द और झगड़े आदि को खत्म करने की शक्ति हमारी लेखनी से ज्यादा किसी में नहीं है। अपने दिमाग और शरीर को नियंत्रित करने का जो काम हमारे विचार कर सकते हैं, वह दुनिया की कोई दवा नहीं कर सकती।

विशेषज्ञों के अनुसार रोज कुछ न कुछ लिखना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इससे हम रचनात्मक और सामान्य बने रहते हैं। मन में जो सकारात्मक ऊर्जा है, उसे लिख देने से हम अपने दिल और दिमाग के बोझ को कम करते हैं। बाहर निकाल देने से हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और हम इसे अपने इर्द-गिर्द भी फैलाते हैं। हम जो काम करते हैं, उस पर अच्छे से ध्यान दे पाते हैं। कुछ देर तक खुल कर मन की बात लिखने से मांसपेशियां कम से कम चालीस मिनट तक सामान्य महसूस करती हैं। इसके अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। जो लोग अधिक सोचते हैं और लिखते भी हैं, वे लंबे समय तक युवा दिखते हैं। सोचने और लिखने से दिमाग सक्रिय होता है और एक तरह की आनंद भरी एकाग्रता से दिल तक पहुंचने वाली धमनियों में खून का प्रवाह सुचारु रूप से होता है, जिससे हृदय रोगों की समस्या नहीं होती।

कई शोधों में साबित हुआ है कि जो अनुभव किया, उसे लिखने में भी हमारी कई इंद्रियां सकारात्मक ढंग से काम करती हैं और सुकून महसूस करती हैं। साथ ही निरंतर लिखने से शरीर में खुशी के हामोर्नों का स्राव होता है, जिससे व्यक्ति का मिजाज ठीक रहता है। मनोवैज्ञानिक यह सिद्ध कर चुके हैं कि अतीत का हर कठिन दिन आज मीठा ही महसूस होता है। इसलिए जो लोग डायरी लिखते हुए जिंदगी को खुल कर जीते हैं, वे बुढ़ापे में तेजी से चलते हैं और ज्यादा तरंगित रहते हैं। खुश रहने वाले बुजुर्ग लोगों को बिस्तर से उठने में, कपड़े पहनने में या नहाने में कोई दिक्कत नहीं होती। लिखने से बेचैनी, क्लेश, जलन, दुख आदि से छुटकारा मिलता है। दिमाग भी तेज होता है, जिससे तनाव और बिना मतलब का भय दूर होता है। यह एक जरिया है, जिससे मन उत्साह से भरा और अच्छा रहता है। इसलिए अपने आसपास की प्रकृति को गौर से देखना और उसे पन्नों पर उतारना खुद को नए रूप में महसूस करना और देखना है।

आप एक अनुशासन में डायरी लिखना या लिखना शामिल हो जाए तो जो वक्त कई बार हमारे लिए बोझ बन गया होता है, वह कब गुजर जाता है, हमें पता भी नहीं चल पाता। जरूरी नहीं कि हम किसी सोचे हुए विषय पर ही लिखें। कुछ अनायास दिमाग में आ गए विषय को भी कागज पर उकेर सकते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि हम लिखते हुए जिसे कम महत्त्व का मानते हैं, वह पूरा लिख लिए जाने के बाद काफी अहम हो जाता है। मानवीय संवेदना की समझ रखने वाले चिकित्सकों को यह कहते देखा-सुना जा सकता है कि लिखने का शौकीन कभी रक्तचाप का रोगी नहीं बन सकता। इसकी वजह है मन का जुड़ाव। लिखते हुए संसार के बाकी कामों से अलग किसी विषय पर केंद्रित होना। कंप्यूटर और मोबाइल कम देखा जाए और अपनी मर्जी के सैर-सपाटे के लिए समय निकाला जाए और फिर उसे दर्ज किया जाए तो उसका अहसास ही अलग होगा। आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि आपमें कोई छिपा लेखक या कवि भी हो सकता है जो लिखते-लिखते आपको महसूस होने लगे..!

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