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तुम अकेली नहीं होगी

सदफ़ नाज़ प्यारी रेहाना जब्बारी! तुम्हारी मां ‘शोलेह’ के नाम तुम्हारा खत पढ़ा। तुम्हारी फांसी और उसके बाद इस खत से अब पूरी दुनिया तुम्हें जान चुकी है। तुम्हारे अल्फाजों में छिपे दर्द की कसक ने दुनिया को झकझोर दिया है। सुनो रेहाना, तुम दूर कहीं खला में या फिर जन्नत में खुदा के घर […]

Author November 22, 2014 10:10 AM

सदफ़ नाज़

प्यारी रेहाना जब्बारी! तुम्हारी मां ‘शोलेह’ के नाम तुम्हारा खत पढ़ा। तुम्हारी फांसी और उसके बाद इस खत से अब पूरी दुनिया तुम्हें जान चुकी है। तुम्हारे अल्फाजों में छिपे दर्द की कसक ने दुनिया को झकझोर दिया है। सुनो रेहाना, तुम दूर कहीं खला में या फिर जन्नत में खुदा के घर में हो! मैं तुम्हें बताना चाहती हूं कि दर्द की रहगुजर में तुम अकेली नहीं थी। इससे दर्द से गुजरना करोड़ों बेटियों की ‘किस्मत’ है! मेरी जान, तुम्हारी शिकायत है कि औरत बने रहने और शालीनता बनाए रखने की तुम्हारी मां की दी गई सीख तुम्हारे खिलाफ गई। तुमने कहा कि जिस मुल्क की मुहब्बत तुम्हारे दिल में डाली गई, वह तो तुमसे प्यार ही नहीं करता था!

मेरी प्यारी, तुमने इस दुनिया में अगर कुछ बरस और गुजारे होते तो तुम जान पाती कि औरत को न तो कोई मुल्क, न ही समाज और न कोई मजहब प्यार करता है। तुमने कहा कि हशर के दिन (कयामत का वह दिन जिस दिन हर इंसान के कर्मों का हिसाब-किताब होगा!) तुम और शोलेह होंगे खुदा की बारगाह में और कठघरे में होंगे वे लोग, जिन्होंने इंसाफ की लड़ाई में तुम्हारे साथ हकतल्फी की। रेहाना, मैं तुम्हें यकीन दिलाना चाहती हूं कि हशर के दिन तुम अकेली ‘औरत’ नहीं होगी जो दुनिया में हुई हकतल्फी की शिकार होगी और जो हशर के मैदान में खुदा की बारगाह में खड़ी होकर पूछेगी मेरे प्यारे रब, तू तो ‘रब्बूल आलेमिन है’ (पूरे ब्रहमांड का रब), फिर क्यों तेरे बंदों की आधी आबादी को अजल से अबद तक इतनी अजियतें उठानी पड़ीं? हर बार इंसाफ के नाम पर खाली रहना पड़ा? तू सबका खुदा था तो क्यों तुझ पर सिर्फ आदम के बेटों ने कब्जा करके रखा? तेरे उसूल तेरे इंसाफ सबके सब अपने फायदे और अपनी सहूलियतों के ताले में बंद रखा?

रेहाना, मैंने सुना कि तुम ‘इंटीरियर डेकोरेटर’ थी। यकीनन तुम्हारा जेहन भी हसीन रहा होगा। तुम्हारे साथ जब वह हादसा हुआ, तुम सिर्फ उन्नीस साल की थीं। इस उम्र में हर लड़की बेपरवाह और निडर होती है। तुम भी होगी! दुनिया को अपनी मुट्ठी में कैद करने की धुन होगी। तब भला तुम कहां सोच पाई होगी कि यह दुनिया लाखों लिजलिजे केंचुओं और जहरीले डंक मारने वाले बिच्छुओं से भरी पड़ी है, जो तुम्हें आगे बढ़ाने, नए मौके देने के नाम पर कभी तुम्हारे सोच और कभी जिस्म को डस लेना चाहते हैं। मुझे पूरा यकीन है कि तुम शातिर नहीं होगी। वरना तुम उस दिन इतनी निर्भीक होकर अपने काम के लिए अकेले नहीं गई होती, जिस दिन तुम्हारे साथ बलात्कार की कोशिश की गई थी। आदम के बेटे ये कभी नहीं समझ सकते कि उन्नीस साल की लड़की मन से बच्ची होती है। वह बदकार और शातिर कातिल नहीं हो सकती! प्यारी रेहाना, मैं तुम्हें बताना चाहती हूं कि हशर के दिन तुम खुदा के बारगाह में अकेली नहीं होगी। तुम्हारे साथ झुंड की झुंड हर नस्ल, रंग, मजहब और हर उम्र की औरतें होंगी, जो खुद पर किए गए जुल्मों का इंसाफ मांगेगीं। मेरी जान, तुम्हारे साथ होंगी छलनी रूहों वाली औरतें… पैदा होने से पहले मां की कोख में मार दी गर्इं अजन्मी बेटियां! वे अनचाही बेटियां, जिन्हें बजबजाते कूड़े के ढेर में कुत्तों का निवाला बनने के लिए फेंक दिया गया था। तुम्हारे साथ वे बच्चियां भी शामिल होंगी, जिनके ख्वाब फलने-फूलने से पहले ही मुर्दा कर दिए गए, रस्म-रिवाज के नाम पर। वे औरतें होंगी, जिन्होंने खुद को झोंक दिया था गृहस्थी और बच्चों को बेहतर बनाने की खातिर और बदले में पाती रहीं उम्र भर लताड़-बेइज्जती।

प्यारी रेहाना, तुम्हारे साथ वे तमाम औरतें-बच्चियां होंगी, जिनका बलात्कार किया गया और जिनके जिस्मों को बुरी तरह छलनी कर मार दिया गया। जो बच गर्इं उनके तार-तार वजूद को समाज ने बदचलनी और बुरी औरत के तमगे वाले नश्तर से चुभो-चुभो कर कत्ल किया। मेरी जान, ऐसी करोड़ों-अरबों रेहाना जब्बारी यहां हैं, जिन्होंने जीते-जी कब्र के अंधेरे भुगते!

तुमने कहा कि इंसाफ के लिए तुम गिड़गिड़ाई नहीं, जिंदगी की भीख नहीं मांगी। मेरी जान, ये हव्वा की बेटियों की किस्मत है कि उन्हें लोग अपने जायज हक के लिए भी रोते-गिड़गिड़ाते देखना चाहते हैं। उनका खुद्दारी से सिर उठा कर हक मांगना गवारा नहीं होता। शायद तुम भी रोती-गिड़गिड़ाती तो इंसाफ के कारोबारियों का दिल पसीजता और वे सोचते कि उन्नीस साल की बच्ची, जिसकी आंखों में प्यार के बंसत और कॅरियर की ऊंचाइयों के सपने बसते होंगे, वह बेवजह किसी का कत्ल नहीं कर सकती। मुझे यकीन है कि तुम तो अपने खूबसूरत नाखूनों को बचाने के लिए बरतन भी नहीं धोती होगी! फिर किसी के गलीज खून से तुम अपने हाथ कैसे रंग सकती थी?
तुम्हारी बहन, जिसे तुम नहीं जानती!

 

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