योगी सरकार ने CAA प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें चौक चौराहों पर होर्डिंग्स में लगाई, कहा- जुर्माना नहीं भरा तो कुर्क होगी संपत्ति!

Citizenship Amendment Act Protest: होर्डिंग्स में प्रदर्शनकारियों के बारे में खुलासा कर इनसे कहा गया है कि वो जल्द से जल्द सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई कर दें।

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होर्डिंग में दिख रहे लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। फोटो सोर्स – सोशल मीडिया/फाइल फोटो

Citizenship Amendment Act Protest: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कुछ चौक-चौराहे पर लगे होर्डिंग्स यहां लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं। इस होर्डिंग में समाजसेवी और राजनीतिज्ञ सदाफ जफर, वकील मोहम्मद शोएब, थियेटर कलाकार दीपक कबीर और पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी जैसे कई अन्य लोगों के नाम दर्ज हैं। इसके अलावा इनकी तस्वीर और पूरा पता का विवरण भी इस होर्डिंग में दिया गया है।

बताया जा रहा है कि राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार पिछले साल दिसंबर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुए प्रदर्शन के बाद अब सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से जुर्माना वसूलने के मूड में है। इन होर्डिंग्स में उन्हीं लोगों की जानकारी दी गई है जिन्होंने इस प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था।

होर्डिंग्स में प्रदर्शनकारियों के बारे में खुलासा कर इनसे कहा गया है कि वो जल्द से जल्द सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई कर दें। इतना ही नहीं यह भी ताकीद की गई है कि अगर इन लोगों ने हर्जाना नहीं भरा तो उनकी संपत्ति कुर्क कर ली जाएगी।

इन होर्डिंग्स में जिन लोगों के बारे में लिखा गया है उनमें से कई लोग अभी जमानत पर हैं। इन्होंने इनसे पहले कहा था कि अगर राज्य सरकार ने उनकी संपत्ति कुर्क करने की कोशिश की तो वो इसके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। जमानत देते वक्त अदालत ने माना था कि पुलिस इन लोगों के खिलाफ पुख्ता सबूत देने में नाकाम रही है।

होर्डिंग्स में जिन लोगों के नाम दर्ज हैं उनमें से कई लोगों ने अब राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। थियेटर आर्टिस्ट दीपक कबीर ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि ‘हमें गिरफ्तार किया गया था…प्रताड़ित कर जेल भेजा गया। अब हमारे ऊपर दबाव बनाने का यह एक नया तरीका है। जब मैं जेल में था तब मुझे रिक्वरी के सिलसिले में एक नोटिस मिला था। आप हमारा पता जानते हैं और हमारे बारे में सबकुछ जानते हैं तो फिर यह क्यों? हमारे अंदर डर पैदा करने की कोशिश की जा रही है।’

आपको बता दें कि पिछले साल दिसंबर में सीएए के खिलाफ लखनऊ में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस ने इस मामले में अलग-अलग जिलों से हजारों लोगों को गिरफ्तार किया था। कई लोगों पर हिंसा करने, उपद्रव करने और खून करने तक के चार्ज लगाए गए थे। पुलिस ने उस वक्त दावा किया था कि इस प्रदर्शन के दौरान 60 पुलिस वालों को गोली लगी थी। हालांकि बाद में इस मामले में कई लोगों को जमानत भी मिल गई थी।

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