वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, जहां कभी अलकायदा ने टकराया था विमान, जानिए क्या है आज वहां

शनिवार को 9/11 हमले की बरसी है। इस हमले में 3 हजार लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हो गए थे। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, पेंटागन बिल्डिंग और पेन्सिलवेनिया में हाईजैक किए गए चार विमानों को अलकायदा आतंकवादियों द्वारा यहां क्रैश करा दिया गया था। आज जहां ये हमले हुए थे, वहां का नजारा बिलकुल बदल गया है।

world trade center attack
तब और आज का वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (फोटो: एपी)

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, जहां कभी अलकायदा ने हमला करके पूरी दुनिया को चौंका दिया था। अमेरिकी इतिहास में इससे बड़ी आंतकवादी घटना नहीं हुई थी। इस हमले में कम से कम 3000 हजार लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हो गए थे।

लगभग दो दशक पहले 11 सितंबर 2001 की सुबह अल-कायदा के 19 आतंकवादियों ने कैलिफोर्निया जाने वाले चार प्लेनों को हाईजैक कर लिया था। इनका मकसद था अमेरिका की कुछ सबसे नामी इमारतों पर हमला करने का। ये पूरी तरह से तैयार और प्लानिंग के साथ आए थे। प्लेन हाईजैक करने के बाद दो विमान न्यूयॉर्क के साइड निकल गए। एक वाशिंगटन डीसी के साइड तो चौथा पेन्सिलवेनिया की ओर बढ़ चला।

कुछ ही देर में ये आतंकवादी अपने मकसद में कामयाब हो चुके थे। हाईजैक विमानों में से दो को आतंकवादियों ने न्यूयॉर्क में स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावरों में जाकर टकरा दिया। एक अन्य प्लेन को वाशिंगटन डीसी के पेंटागन बिल्डिंग से टकरा दिया तो चौथा प्लेन पेन्सिलवेनिया के एक खेत में आंतकवादियों ने क्रैश करा दिया।

लगभग बीस साल बाद जिन जगहों पर ये प्लेन टकराये थे, वहां का नक्शा अब बिलकुल बदल गया है। हर साल वहां 9/11 को सैकड़ों लोग आते हैं और मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस बार वहां अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भी यहां जाने वाले हैं। आइए देखते हैं कि इन दोनों जगहों पर आज की तारीख में क्या हाल है… मलबा है या कुछ और…

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर– कभी दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों में शुमार 110 मंजिला वर्ल्ड ट्रेड सेंटर टावर इस हमले के दौरान पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। यह बिल्डिंग 1973 में बनकर तैयार हुई थी। कभी 1368 और 1362 फीट की ऊंचाई वाली दोनों टावरों ने एम्पायर स्टेट बिल्डिंग को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे ऊंची इमारतें बन गईं थी।

इन दोनों टावरों पर जब अलकायदा के आतंकियों ने प्लेन टकराया तो विस्फोट से जो नुकसान हुआ वो अलग था, दूसरी ओर विमान के टकराने के बाद टावर में आग लग गई और दो घंटे के अंदर ही पूरी बिल्डिंग मलबे में तब्दील हो गई। रिपोर्टों के अनुसार प्लेन के टकराने से इमारत की संरचना कमजोर हो गई और आग ने पूरी बिल्डिंग को नष्ट कर दिया।

जब आग पर काबू पा लिया गया और धुएं के बादल छट गए तब फिर से इस जगह पर निर्माण की घोषणा कर दी गई। तत्कालीन न्यूयॉर्क के मेयर रूडी गिउलिआनी ने हमले के तुरंत बाद कहा था- “हम पुनर्निर्माण करने जा रहे हैं, और हम पहले की तुलना में अधिक मजबूत होने जा रहे हैं। मैं चाहता हूं कि न्यूयॉर्क के लोग देश के बाकी हिस्सों और बाकी दुनिया के लिए एक उदाहरण बनें कि आतंकवाद हमें रोक नहीं सकता”।

जब यहां फिर से निर्माण की बातें होने लगी तो कई योजनाओं पर काम हुआ। अंत में यहां एक स्मारक, संग्रहालय के साथ-साथ पांच गगनचुंबी इमारतों को बनाना तय हुआ। इसमें स्मारक पूरी तरह से बन कर तैयार है और उसे 2011 में हमले के दस साल पूरे होने पर खोल दिया गया है। इस स्मारक में हमले में मारे गए लोगों के नाम लिखे गए हैं। उनकी यादें यहां मौजूद हैं। अमेरिकी स्टूडियो डेविस ब्रॉडी बॉन्ड द्वारा डिजाइन किए गए एक भूमिगत संग्रहालय में 40,000 फोटो और 14,000 कलाकृतियां हैं।

स्मारक और संग्रहालय दोनों प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुले रहते हैं। हालांकि, यह 20वीं वर्षगांठ पर आधी रात तक खुला रहेगा।

पेंटागन– अमेरिका के उत्तरी वर्जीनिया के पेंटागन में जहां दूसरा प्लेन टकराया था, वहां रक्षा विभाग, इस हमले में मार गए 184 लोगों के सम्मान में शनिवार सुबह एक निजी समारोह आयोजित करेगा। 2008 के बाद से पेंटागन मेमोरियल, शोक करने वालों के लिए एक गंभीर और शांत स्थान रहा है।

यहां पर मृतकों के लिए एक स्मारक पार्क बना हुआ है। पार्क में कैंटिलीवर बेंच, बहते पानी का एक लाइटों से जगमगाता पुल है। हर बेंच पर अलग-अलग मृतकों के नाम लिखे हुए हैं। यहां स्मारक अलग तरह से डिजाइन किया गया है। जो पेंटागन के अंदर थे, उनके लिए अलग से स्मारक है और प्लेन में सवार थे उनके लिए अलग।

पेन्सिलवेनिया- चौथा हाईजैक किया हुआ प्लेन यहीं खेतों में क्रैश हुआ था। इस घटना में 40 लोगों की मौत हो गई थी। यहां भी एक स्मारक स्थल बना हुआ है। यहां एक प्रदर्शनी है जो प्लैन हाईजैक की पूरी कहानी बताती है। कैसे चार आतंकवादियों ने प्लेन को हाईजैक किया, और यहां पर लाकर प्लेन को क्रैश कर दिया। इसमें सवार सभी 33 यात्रियों और चालक दल के सात सदस्यों की मौत हो गई थी।

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