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गूगल सर्च करने पर लग गया 1 लाख रुपये का चूना! यह खबर पढ़कर हो जाएं अलर्ट

ठगी करने वालों ने गूगल सर्च के माध्यम से अपने शिकार को तलाशने का नया तरीका इजाद किया है। गूगल पर जाकर ठग ऑफिशियल नंबर की जगह अपना नंबर डाल देते हैं।

Author Published on: December 18, 2018 4:24 PM
चित्र का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है

जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी का प्रयोग बढ़ता जा रहा है, फ्रॉड के नए मामले भी सामने आ रहे हैं। पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी में रहने वाली एक महिला को गूगल सर्च के दौरान थोड़ी सी असावधानी की वजह से एक लाख रुपये का चूना लग गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ठगी करने वालों ने गूगल सर्च के माध्यम से अपने शिकार को तलाशने का नया तरीका इजाद किया है। ऐसा करने के लिए गूगल को हैक नहीं किया जाता है बल्कि गूगल द्वारा यूजर्स की सहायता के लिए दी गई सेवा का दुरुपयोग किया जाता है। महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने इन फ्रॉड के बारे में सबसे पहले नागरिकों को जानकारी दी थी, जिसके बाद बैंक ऑफ इंडिया और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन जैसे प्रतिष्ठान भी चिंतित हो गए थे।

दिल्ली का मामला भी कुछ इसी तरह का है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक प्राइवेट फर्म में काम करने वाली महिला अपने ई-वॉलेट अकाउंट को लेकर परेशान थी। इस समस्या से निजात पाने के लिए उसने गूगल पर कस्टमर केयर नंबर सर्च करना शुरू किया ताकि गलत ट्रांजेक्शन के बारे में शिकायत दर्ज करवा सके। यहां से उसे एक फोन नंबर मिला जिसे गूगल पर ऑफिशियल कस्टमर केयर फोन नंबर बताया गया था, लेकिन वह ठगी करने वालों का फोन नंबर था। महिला ने यह सोचकर कि यह ऑफिशियल कस्टमर केयर नंबर है, उसने अपने कार्ड का पूरा डिटेल बता दिया ताकि ई-वॉलेट कंपनी उसके पैसे वापस कर दे। जब तक महिला कुछ समझती, उसके बैंक अकाउंट से एक लाख रुपये निकल चुके थे।

कुछ समय पहले इसी तरह का एक मामला ईपीएफओ प्रोविडेंट फंड के लिए हुआ था। ईपीएफओ के बारे में कुछ सहायता के लिए एक व्यक्ति ने गलत नंबर पर कॉल कर दिया और ठगा गया। यह मामला मुंबई का था। ठगों द्वारा इजाद किए गए तरीके को जबतक लोग समझते हैं, तब तक वे ठगे जा चुके हैं। लोग यह सोचकर गूगल पर नंबर तलाश करते हैं कि वह ऑफिशियल होगा और उसकी चक्कर में ठगों के झांसे में पड़ जाते हैं। ठग उनसे बैंक अकाउंट नंबर, एटीएम पिन, पासवर्ड और ओटीपी पूछ उनका खाता खाली कर देते हैं। दरअसल, गूगल यूजर्स को शॉप, बैंक और अन्य संस्थानों के डिटेल को एडिट करने का ऑप्शन देती है ताकि गूगल सर्च के माध्यम से बेहतर सेवा मिल सके। ठग यहीं पर कांटैक्ट डिटेल को एडिट कर ऑफिशियल फोन नंबर की जगह अपना फोन लिख देते हैं ताकि लोग उनके झांसे में आसानी से आ सके।

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