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नींद की 35 गोलियां दीं, फिर भी नहीं मरा पति तो फिनाइल का इंजेक्शन देकर मरवा डाला!

गोपी की प्रिया से शादी करीब नौ साल पहले हुई थी। लेकिन पति और पत्नी के रिश्ते में के बीच दो साल पहले 'वो' आ गया था। पुलिस के अनुसार, दो साल पहले प्रिया की दोस्ती फेसबुक पर महेश से हो गई थी।

प्रतीकात्मक तस्वीर

रिश्तों में खत्म होते अपनेपन का एक और मामला सामने आया है। महाराष्ट्र में एक महिला ने अपने पति को मारने के लिए कई जतन कर डाले। आखिरकार महिला ने पति से उसकी सांसे तुड़वा के ही दम लिया। राज्य के ठाणे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशल में कार्यरत गोपी नाइक की जान उनकी पत्नी प्रिया नाइक ने ही ले ली। प्रिया ने गोपी को मारने के लिए पहले 15 नींद की गोलियां खाने में मिलाकर दीं लेकिन वह अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाई। इसके बाद गोपी को फिनाइल का इंजेक्शन लगाकर मौत की नींद सुला दिया जाता है।

मामला बीते साल 28 दिसंबर का है। गोपी और प्रिया अपनी सात साल की बेटी के साथ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के दिए क्वाटर में रहते थे। गोपी की प्रिया से शादी करीब नौ साल पहले हुई थी। लेकिन पति और पत्नी के रिश्ते में के बीच दो साल पहले ‘वो’ आ गया था। पुलिस के अनुसार, दो साल पहले प्रिया की दोस्ती फेसबुक पर महेश से हो गई थी। तब से ही दोनों के बीच नाजायज रिश्ते में आ गए। हालांकि कुछ समय पहले गोपी को इसकी खबर मिल गई।

प्रिया को महेश के साथ एक मॉल में गोपी के रिश्तेदार ने देख लिया। उसने इसकी जानकारी गोपी को दी। इसके बाद गोपी ने प्रिया से ही इस बारे में पूछा लेकिन उसने सारी बातों को नकार दिया। हालांकि गोपी को प्रिया की बात पर भरोसा नहीं हो रहा था। गोपी ने इसके बाद प्रिया पर बंदिशें लगा दीं। इससे आजिज हो प्रिया ने गोपी को उसकी जिंदगी से दूर करने का फैसला लिया। महेश को प्रिया ने अपने प्लान के बारे में भी बताया। महेश सेंट्रल रेलवे का कर्मचारी है और नरेल में रहता है।

पुलिस ने बताया कि, ‘गोपी को पोलियो है’ इसी को आधार बनाकर प्रिया और महेश ने प्लान बनाया कि गोपी को खाने में नींद की गोलियां मिलाकर दे दी जाएं। बाद में कह दिया जाएगा कि गोपी ने बीमारी से तंग आकर आत्महत्या कर ली। प्लान के तहत महेश ने प्रिया को नींद की गोलियां ला दी। इसके बाद अगली सुबह प्रिया ने गोपी के खाने में 15 नींद की गोलियां मिला दीं। जिसे खाने के बाद गोपी बेहोश होने लगा और बिस्तर पर गिर पड़ा।

पुलिस इंस्पेक्टर नासिर कुलकर्णी ने बताया कि, गोपी की बेहोशी को प्रिया ने मौत समझ ली और महेश को बुला लिया। हालांकि कुछ समय में ही गोपी को होश आ गया। इसके बाद गोपी ने प्रिया से पूछा कि, जब वह सो रहा था तो घर पर कौन आया था। लेकिन किसी तरह बात बनाकर प्रिया ने गोपी को शाम और रात में भी 10-10 नींद की गोली जूस और दूध में मिलाकर दे दीं। इसके बाद महेश फिर से आया और फिनाइल मिला इंजेक्शन गोपी के लगा दिया। हालांकि इस दौरान गोपी ने बचाव किया लेकिन बेहोशी की हालत में वह खुद को नहीं बचा पाया। इस दौरान महेश ने गोपी सिर कई बार दीवार पर मारा और रॉड से पिटाई भी की।

अगली सुबह 29 दिसंबर को गोपी की मौत हो जाती है। जिसके बाद प्रिया और महेश गोपी को अस्पताल ले जाते हैं। जहां दोनों बताते हैं कि गोपी का एक्सीडेंट हो गया है और बॉडी सड़क किनारे मिली है। पुलिस ने बताया कि दोनों इस फिराक में थे कि जल्द ही अस्पताल वाले गोपी की बॉडी सौंप दें तो उसे ठिकाने लगाया जा सके। हालांकि अस्पताल ने पुलिस को सूचना दे दी। जिसके बाद दोनों वहां से भाग गए। इसके बाद पुलिस ने पड़ताल कर महेश के भाई को पूछताछ के लिए बुलवाया। जहां से महेश और प्रिया की पहचान हुई। 1 जनवरी को दोनों को माथेराम से गिरफ्तार कर लिया गया।

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