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जब दोस्त के लिए अंग्रेजों के सामने सरेंडर करने को राजी हो गए थे चंद्रशेखर आजाद, जानिए वजह

आजाद चाहते कि इस इनामी राशि से रूद्रनारायण को गरीबी से बाहर निकलने में मदद मिल जाएगी, लेकिन उन्होंने तुरंत आजाद के इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।

जब दोस्त के लिए अंग्रेजों के सामने सरेंडर करने को राजी हो गए थे चंद्रशेखर आजाद, जानिए वजह
चंद्रशेखर आजाद। (Photo Credit – Indian Express)

भारत इस साल स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। पूरा देश जश्न में डूबा है। देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने में तमाम अमर सपूतों ने अपनी जान कुर्बान कर दी थी, चंद्रशेखर आजाद उन्हीं में से एक थे। उन्होंने भारत में ब्रिटिश शासन की नींद हराम कर दी थी। हालांकि, 9 अगस्त 1925 को प्रसिद्ध काकोरी ट्रेन डकैती के बाद अंग्रेजों के बढ़ते दबाव के कारण आजाद को भूमिगत होना पड़ा था। वे कई सालों तक अलग-अलग जगह छिपकर रहे। इन सालों में वह करीब साढ़े तीन साल झांसी में रहे, जहां उनकी दोस्ती रूद्रनारायण नाम के व्यक्ति से हुई।

करीब साढ़े तीन साल तक झांसी में रहने के दौरान चंद्रशेखर आजाद की रुद्रनारायण से मुलाकात हुई थी। रुद्रनारायण कभी शिक्षक हुआ करते थे फिर वह स्वतंत्रता सेनानी बन गए। रूद्रनारायण ही वह व्यक्ति थे, जिन्होंने आजाद को शहर के भीतर टकसाल में अपने घर में आश्रय दिया था। अब इस क्षेत्र का नाम रुद्रनारायण के नाम पर रखा गया है।

आजाद, झांसी में लगभग साढ़े तीन साल तक रहे। जिसमें से छह महीने उन्हें ओरछा से सटी सतर नदी के पास स्थित एक मंदिर में बिताने पड़े थे। इस मंदिर में चंद्रशेखर आजाद एक पुजारी के वेश में रहे और अंग्रेजों से बचने के लिए उन्होंने इसी मंदिर परिसर में आठ फीट की गुफा बना रखी थी। आजाद, कभी-कभी रुद्रनारायण के साथ भी समय बिताते थे लेकिन पुलिस छापेमारी के दौरान वह तहखाने में छिप जाते थे।

पुलिस आजाद की पहचान इसलिए भी आसानी से नहीं कर पा रही थी, क्योंकि चंद्रशेखर आजाद की तस्वीर पहले कभी किसी ने देखी ही नहीं थी। बताया जाता है कि रुद्रनारायण ही वह पेंटर थे, जिन्होंने आजाद के चित्र को स्केच किया था, लेकिन अपनी पहचान को गुप्त रखने के लिए उन्होंने इसे दुनिया से छुपाया हुआ था। बता दें कि, रुद्रनारायण क्रांतिकारी होने के साथ-साथ अच्छे पेंटर भी थे।

आज हम चंद्रशेखर आजाद की जो एक तस्वीर देखते हैं, जिसमें वह एक हाथ में बंदूक और दूसरे से मूंछ पकड़े हुए हैं, वह तस्वीर रूद्रनारायण ने ही बनाई थी। बताया जाता है कि पहले अंग्रेज, आजाद को पहचानते नहीं थे और जब उन्हें इस तस्वीर की जानकारी हुई तो वे मुंहमांगी रकम देने को तैयार हो गए थे। टीओआई की रिपोर्ट में रुद्रनारायण के पोते मुकेश नारायण सक्सेना बताते हैं कि, आजाद उन्हें (रूद्र) हमेशा अपना बड़ा भाई और मित्र मानते थे।

एक समय आजाद ने रुद्रनारायण को कहा भी था कि वह पुलिस को मेरे बारे में सूचना दे दें। ताकि सरेंडर करने के बाद उनके सिर पर अंग्रेजों के द्वारा रखा गया 25,000 रुपये का नकद इनाम उन्हें (रुद्रनारायण) मिल जाए। उस वक्त आजाद चाहते कि इस इनामी राशि से रूद्रनारायण को गरीबी से बाहर निकलने में मदद मिल जाएगी, लेकिन उन्होंने तुरंत आजाद के इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।

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