scorecardresearch

कौन हैं CM ममता बनर्जी के करीबी अनुब्रत मंडल? जिन्हें CBI ने पशु तस्करी मामले में किया है गिरफ्तार

Anubrata Mandal: अनुब्रत मंडल टीएमसी के बीरभूम जिलाध्यक्ष हैं और उन्हें पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में से एक माना जाता है।

कौन हैं CM ममता बनर्जी के करीबी अनुब्रत मंडल? जिन्हें CBI ने पशु तस्करी मामले में किया है गिरफ्तार
सीएम ममता बनर्जी के करीबी अनुब्रत मंडल तीन दशक से राजनीति में हैं पर कभी चुनाव नहीं लड़ा। (Photo Credit – Facebook/Anubrata Mondal)

Who is Anubrata Mondal: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2020 के पशु तस्करी मामले में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और तृणमूल कांग्रेस के नेता अनुब्रत मंडल को गुरुवार, 11 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने मंडल को इस मामले में पूछताछ के लिए पहले 10 बार तलब कर चुकी थी, लेकिन वह स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का हवाला देते हुए पेश नहीं हुए। पशु तस्करी मामले की जांच के तहत केंद्रीय एजेंसी इससे पहले उनसे दो बार पूछताछ कर चुकी है। अनुब्रत मंडल को अब इस मामले में आसनसोल की स्थानीय अदालत ने सीबीआई की 10 दिन की हिरासत में भेजा है।

कौन हैं अनुब्रत मंडल? (Who is Anubrata Mondal)

अनुब्रत मंडल टीएमसी के बीरभूम जिलाध्यक्ष हैं और उन्हें पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में से एक माना जाता है। बंगाल में बीरभूम को मंडल का गढ़ माना जाता है और यहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस को काफी मजबूत भी किया। बीरभूम की 11 विधानसभा सीटों में से टीएमसी के पास फिलहाल 10 सीटें हैं। बंगाल की राजनीति में मंडल को गेमचेंजिंग प्लेयर माना जाता है।

ममता बनर्जी के पक्के वफादार (Mamata’s loyalist)

अनुब्रत मंडल को बंगाल और बीरभूम में प्यार से ‘केशतो दा’ कहा जाता है और वह ममता के पक्के वफादार माने जाते हैं। जब उन्हें टीएमसी की राष्ट्रीय कार्य समिति में जगह दी गई, तब यह माना गया कि पार्टी सुप्रीमो द्वारा उन्हें उनकी वफादारी का इनाम दिया गया है। अनुब्रत मंडल ही वह नेता थे, जिसने ‘खेला होबे’ के नारे को बंगाल में लोकप्रिय बनाया। जिसके बाद साल 2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी ने भारी बहुमत से चुनाव जीता था।

अनुब्रत ने कभी नहीं लड़ा कोई चुनाव (Anubrata never contested any election)

दिलचस्प यह है कि तीन दशक से अधिक समय तक राजनीति में रहने के बावजूद मंडल ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा। मंडल की छवि हमेशा से ही अनसंग हीरो वाली रही और टीएमसी के विस्तार में उनकी अहम भूमिका है। हालांकि, वह अपने बयानों के चलते कई बार विवादों में रहे। मंडल को ध्रुवीकरण वाले बयान देने वाले नेता के रूप में भी जाना जाता है। वहीं, कई मौकों पर पुलिस को धमकाने और टीएमसी कार्यकर्ताओं को उन पर ‘बम फेंकने’ के लिए उकसाने का आरोप लगता रहा है।

अवैध गतिविधियों और विवादों से पुराना नाता (Anubrata Controversies)

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुब्रत मंडल पर कई असामाजिक तत्वों को पनाह देने का भी आरोप है। कथित तौर पर मंडल के बीरभूम इलाके में रेत खनन, पत्थर उत्खनन और पशु तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों से भी संबंध के आरोप लगते रहे हैं। साल 2018 के पंचायत चुनाव के दौरान मंडल ने मीडिया से कहा, ”विपक्षी नेता जब नामांकन दाखिल करने जाएंगे तो ‘विकास’ सड़क के किनारे खड़ा होगा।” यह एक संकेत था कि उनके गुंडे उम्मीदवारों का इंतजार कर रहे होंगे।

हाइपोक्सिया से पीड़ित है अनुब्रत मंडल (Anubrata suffering from hypoxia)

रिपोर्ट्स की मानें तो सीएम ममता के करीबी मंडल हाइपोक्सिया से पीड़ित है, जिसके लिए वह अपने साथ ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर चलते हैं। इस मामले से पहले सीबीआई ने मंडल को बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा मामले में पूछताछ के लिए तलब किया था। इस पर अनुब्रत मंडल ने गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

पढें जुर्म (Crimehindi News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.