जब आत्माराम सरावगी को गिरफ्तार करने दीवार फांद घर में घुस गए थे IPS किशोर कुणाल, सड़क पर पैदल मार्च कराते हुए लाए थे जेल

किशोर कुणाल द्वारा सुलझाया गया एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक रसूखदार को हिरासत में लेने के लिए दीवार फांद कर पहुंचे थे IPS अधिकारी।

Former IPS Officer Kishor Kunal
पूर्व IPS ऑफिसर किशोर कुणाल। Source – Acharya Kishore Kunal FB Page

बिहार में किशोर कुणाल किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं, 1972 बैच के गुजरात कैडर के अधिकारी कुणाल, नियुक्ति के बाद जब राजधानी पटना आए तो एक कड़क और अनुशासित अधिकारी के तौर पर पहचाने जाने लगे, कई बड़े मामलों के चलते अखबारों की सुर्खियों में रहना उनके लिए आम था। लंबे समय तक सेवा के बाद उन्होंने VRS लिया और फिर महावीर मंदिर ट्रस्ट के साथ जुड़ गए।

किशोर कुणाल द्वारा सुलझाया गया एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, इस घटना का जिक्र बिहार के पत्रकार ज्ञानेश्वर ने अपने यूट्यूब चैनल ‘खबरों के पीछे’ में किया है, उन्होंने बताया कि कैसे एक रसूखदार को पकड़ने के लिए पूर्व IPS ने जाल बिछाया था। घटना 80-90 के दशक की है, एक बहुचर्चित मामले के खुलासे के बाद रोहतास जिले के मशहूर पत्रकार विजय बहादुर सिंह की हत्या हो गई। संजोग से घटना की रात तत्कालीन एसपी किशोर कुणाल गश्त पर निकले थे, उन्होंने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर पैदल मार्च निकलवाया था।

अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद यह साफ हो चुका था कि इसके पीछे जिले के एक रसूखदार आत्माराम सरावगी हैं, जो उस कंपनी के लिए काम करते थे, जिसके घोटाले का खुलासा किशोर कुणाल ने कुछ महीनों पहले ही किया था। संदेह के आधार पर कुणाल ने अपने एक थानेदार को सरावगी को गिरफ्तार करने के लिए भेजा। जब इंस्पेक्टर काफी देर तक वापिस नहीं आए तो IPS का शक गहराया कि कहीं रिश्वत देकर थानेदार को खरीदने की कोशिश तो नहीं की गई। ऐसे में एसपी साहब, दो सिपाहियों के साथ खुद ही पैदल, आत्माराम के बंगले की तरफ चल पड़े।

बंगले के सामने पहुंचने के बाद आवाज लगाई गई लेकिन जब कोई प्रतिक्रिया नहीं आई तो किशोर कुणाल ने सिपाहियों के साथ घर के पीछे से प्रवेश करने का तय किया। पीछे की दीवार फांदकर जब वह अंदर पहुंचे तो दंग रह गए, उन्होंने वहां देखा कि जिस पुलिसकर्मी को गिरफ्तार करने के लिए भेजा था, वह सोफे पर आराम फरमा रहा था जबकि आत्माराम तैयार हो रहे थे, वह शीशे के सामने खड़े होकर बेफिक्री से टाई बांध रहे थे।

किशोर कुणाल ने आत्माराम सरावगी को गिरफ्तार किया और देर रात ही पैदल मार्च कराते हुए थाने ले आए। इधर सुबह तक जब लोगों को इस बात की जानकारी लगी कि विजय बहादुर की मौत के पीछे आत्माराम का हाथ है तो बाहर बड़ी भीड़ जुट गई, हत्या की साजिश को अंजाम देने वाले अपराधी पहले से ही जेल में मौजूद थे और अब आत्माराम सरावगी के आने से तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी थी। कानूनी तरीके से उन्हें जेल भेजा गया, काफी दिनों तक जेल में रहने के बाद सरावगी को पटना हाईकोर्ट से बेल मिली।

इस घटना का जिक्र किशोर कुणाल की किताब ‘दमन तथ्यों का’ में भी है। इसके अलावा उन्होंने इस तरह की कई घटनाओं के बारे में बताया है। कुणाल इन दिनों महावीर मंदिर ट्रस्ट के साथ जुड़े हुए हैं, इस ट्रस्ट के जरिए रियायतों के साथ कैंसर का इलाज किया जाता है। इसके अलावा आरोग्य और नेत्र अस्पताल भी चलाए जाते हैं। पिछले दिनों वह तब चर्चा में आए थे जब अयोध्या मामले पर चल रही सुनवाई के दौरान हिंदू महासभा के वकील ने किशोर कुणाल की किताब में छपे नक्शे को पेश किया था और मुस्लिम पत्र के वकील ने इस नक्शे को फाड़ दिया था।

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