धीमा पड़ा कोरोना तो बढ़ा महिलाओं के खिलाफ अपराध

राजधानी दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध फिर बढ़ रहे हैं। कोरोना का कहर थमते ही यहां आपराधिक वारदात में इजाफा हुआ है।

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दिल्ली में रेप और छेड़छाड़ के मामले बढ़े (प्रतीकात्मक फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

राजधानी दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध फिर बढ़ रहे हैं। कोरोना का कहर थमते ही यहां आपराधिक वारदात में इजाफा हुआ है। इससे पहले के वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराध ज्यादा थे लेकिन कोरोना के कारण पूर्णबंदी लगी और मामलों में कमी आई थी। लेकिन अब हालात सामान्य होते ही बलात्कार, छेड़छाड़, विश्वास भंग, मानसिक रूप से शोषण की प्रवृति, दहेज हत्या और दहेज प्रताड़ना, निजता भंग करना, राह चलते फब्तियां कसना, अपहरण जैसे मामले तेजी से बढ़े हैं।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध पर दिल्ली पुलिस महासंघ के अध्यक्ष व पूर्व सहायक पुलिस आयुक्त वेदभूषण का कहना है कि महिलाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव नहीं आया है यह चिंताजनक है। वह कहते हैं कि बच्चों और महिलाओं को सम्मान से देखने की प्रवृत्ति को बढ़ाने के लिए जागरूकता में अभी कमी दिख रही है। हालांकि इस साल बढ़े अपराध पर उनका कहना है कि दिल्ली में इस समय 15 थानों में महिला एचएचओ और छह जिले में महिला उपायुक्त हैं।

इससे महिलाएं और किशोरी थाने पहुंचकर और आनलाइन मामला दर्ज कराने में पीछे नहीं हैं। वहीं, नए आयुक्त राकेश अस्थाना ने भी मामले दर्ज करने में कोताही न बरतने को कहा है। इससे भी संख्या बढ़ी है। कोर्ट खुलने से भी जांच बढ़ी। पूर्व एसीपी का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ घटी और दर्ज कुछ मामले तो निजी तौर पर अंजाम दिया जाता है।
कोरोना में अचानक कम हुए थे आंकड़े :

कोरोना की वजह से पूरे देश में पूर्णबंदी लागू थी और सड़कों पर जगह-जगह पुलिस और जांच चल रही थी। लोग सड़कों पर नहीं थे, इससे अपराधी लोग घरों में ही दुबके थे। यही वजह रही कि 2019 और 2020 में कुछ अपराध पिछले कुछ वर्षों की अपेक्षा थोड़े कम रहे। जैसे महिलाओं और किशोरियों के अपहरण के मामले 2019 और 2020 में क्रमश: 371 और 2761 दर्ज हुए। इससे पहले 2014 से 2018 तक इस अपराध में तीन हजार से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए हैं। वहीं, महिलाओं के अपहरण के 2019 और 2020 में 201 और 177 मामले आए हैं जबकि इससे पहले यह 200 से 500 तक पहुंचे हैं।

बलात्कार के मामलों में हालांकि बहुत मामूली अंतर दिखा है। 2019 और 2020 में जहां 2168 और 1699 मामले दर्ज हुए वहीं 2014 से 2018 के बीच इस अपराध के मामले दो हजार से ऊपर ही रहे। छेड़छाड़ के मामलों में देखे तो 2019 और 2020 में कोरोना काल के दौरान 2921 और 2186 मामले सामने आए। इससे पहले 2014 से 2018 में यह मामले साढ़े तीन हजार से पांच हजार के पार रहे हैं।

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