scorecardresearch

रिपोर्टिंग पुलिस चौकी क्या होती है और क्या दर्ज कराई जा सकती है FIR? जानें पूरी डिटेल्स

आम तौर में पुलिस चौकियां दो प्रकार की होती है। एक सामान्य और दूसरी रिपोर्टिंग पुलिस चौकी, ऐसे में आइए आज रिपोर्टिंग पुलिस चौकी के बारे में जानते हैं।

रिपोर्टिंग पुलिस चौकी क्या होती है और क्या दर्ज कराई जा सकती है FIR? जानें पूरी डिटेल्स
तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (Photo Credit – Reuters/Adnan Abidi)

What Is Reporting Police Outpost: किसी भी प्रदेश की हर जिले में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए पुलिस थानों और चौकियों का निर्माण किया जाता है। इन चौकियों का मुख्य काम ग्रामीणों में सुरक्षा का भाव पैदा करने के लिए और घटनों में तत्काल पुलिस की मदद होती है।

अक्सर हमें केवल एक तरह की चौकी के बारे में पता होता लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुलिस चौकी दो तरह की होती हैं। एक सामान्य पुलिस चौकी और एक रिपोर्टिंग पुलिस चौकी। ऐसे आज आपको बताते हैं कि रिपोर्टिंग पुलिस चौकी क्या होती है और यह सामान्य चौकी से कितनी अलग होती है।

पुलिस चौकी क्या होती है ( What Is Police Outpost)

जिले में पुलिस विभाग के सबसे अहम सेंटर पुलिस थाने होते हैं। इन थानों के कार्यभार को कम करने और घटनाओं पर तत्परता से काम करने के लिए चौकियों को बनाया गया। ये चौकियां थाना प्रभारी के निर्देशों पर काम करती हैं। इन चौकियों का इंचार्ज एक एसआई यानी उप निरीक्षक पद पर तैनात पुलिसकर्मी होता है।

क्या होती है सामान्य पुलिस चौकी (What Is Normal Police Outpost)

जिस भी क्षेत्र में सामान्य पुलिस चौकी है, वहां थाने से सम्बंधित जांचों को पूरा करने और अन्य लिखा-पढ़ी के काम किए जाते हैं। हालांकि, यहां कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं करा सकता क्योंकि सामान्य पुलिस चौकी के पास ये अधिकार नहीं हैं।

यदि यहां कोई भी पीड़ित/वादी/शिकायतकर्ता एफआईआर दर्ज कराने पहुंचता भी है तो उसे सम्बंधित थाने में भेज दिया जाता है। देश में अधिकतर इलाकों में ऐसी ही पुलिस चौकियां होती हैं।

रिपोर्टिंग पुलिस चौकी क्या है (What Is Reporting Police Outpost)

जिले में थानों के क्षेत्र काफी बड़े होते हैं। इसीलिए पुलिस चौकियां बनाई जाती है ताकि कानून व्यवस्था बरकरार रखने में कोई बाधा न पहुंचे। ऐसे में जहां कहीं भी पुलिस चौकियों और थानों के बीच की दूरी औसतन ज्यादा होती हैं, वह रिपोर्टिंग पुलिस चौकी स्थापित की जाती हैं।

इन चौकियों को एफआईआर दर्ज करने का अधिकार दिया जाता है। कोई भी पीड़ित/वादी/शिकायतकर्ता यहां जाकर अपनी प्राथमिकी दर्ज कर सकता है। ऐसी पुलिस चौकियों पर भी इंचार्ज के तौर पर एसआई (Sub Inspector) की तैनाती की जाती है, जो संबंधित थाने के एसएचओ (SHO) को रिपोर्ट करते हैं।

पढें जुर्म (Crimehindi News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.