ताज़ा खबर
 

‘पढ़-लिख कर चूल्हा-चौका ही तो करना है’, रिश्तेदारों नहीं चाहते थे पढ़े; लड़की ने IAS बन दिया था जवाब

श्वेता ने जिंदगी के कुछ कड़वे अनुभवों या यूं कहें कि सच्चाई को काफी कम उम्र में ही जान लिया था।

IAS श्वेता अग्रवाल। फोटो सोर्स- सोशल मीडिया

जब श्वेता अग्रवाल के कॉलेज जाने की बातचीत चल रही थी तब अचानक उनके चाचा आगबबूला हो गये। उनकी इच्छा नहीं थी कि घर की बेटी कॉलेज में पढ़ने जाए। इसी बात से नाराज चाचा ने यहां तक कह दिया था कि ‘उसे पढ़-लिखकर करना क्या है…? आगे वैसे भी चूल्हा-चौका ही करना है।’ चाचा की यह बात श्वेता को काफी चुभ गई। उन्होंने उसी वक्त ठान लिया कि वो अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा कर के मानेंगी।

आज बात एक ऐसी लड़की की हम कर रहे हैं जिनके परिवार के कई सदस्य रुढ़ीवादी विचारों को मानने वाले थे। एक वक्त था जब उनके मारवाड़ी परिवार में लड़कियों के जन्म का कोई उत्साह नहीं होता था। उनकी पढ़ाई-लिखाई की बात तो काफी दूर की कौड़ी थी। पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के भद्रेश्वर में जन्मीं श्वेता अग्रवाल की दादा-दादी का मानना था कि लड़कियों को सिर्फ घरेलू काम आना चाहिए और उन्हें सिर्फ घर ही संभालना चाहिए। लेकिन श्वेता के माता-पिता इन विचारों से अलग थे।

भले ही घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी लेकिन उनके माता-पिता चाहते थें कि श्वेता की पढ़ाई-लिखाई अच्छे इंग्लिश स्कूल में हो। श्वेता के मां-बाप ने बेटी को बेहतर स्कूल में पढ़ाने का फैसला किया। श्वेता ने जिंदगी के कुछ कड़वे अनुभवों या यूं कहें कि सच्चाई को काफी कम उम्र में ही जान लिया था। बताया जाता है कि जब श्वेता महज 7 साल की थीं तब छोटी थी तब उनके स्कूल में एक दिन फेस्ट हुआ, जिसके लिए श्वेता ने अपने पैरेंट्स से पैसे मांगे।

श्वेता के माता-पिता ने श्वेता को रियल सिचुएशन बताकर कहा कि वे जैसे-तैसे फीस ही अरेंज कर पाते हैं, ऐसे खर्चें वे फिस्ट का खर्च नहीं उठा सकते। सात साल की छोटी उम्र में श्वेता ने पैसे और पढ़ाई दोनों की कीमत सीख ली थी। यहां तक कि उस दिन के बाद से रिश्तेदार वगैरह के दिए हुए शगुन के 5 या 10 रुपये भी वे अपनी मां को दे देती थी ताकि फीस के पैसे जमा किया जा सकें।

समय गुज़रा और श्वेता के पिताजी के हालात थोड़ा बदले। इधर श्वेता ने भी क्लास 12 में अपने स्कूल में टॉप किया और बारी आयी कॉलेज की। सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया और वहां की टॉपर बनीं। इसके बाद श्वेता ने एमबीए किया और एमबीए पास करने के बाद एक एमएनसी में अच्छे पद पर जॉब करने लगीं। इस प्रकार श्वेता अपने परिवार के करीब 15 बच्चों में से पहली ग्रेजुएट थी।

श्वेता अग्रवाल ने इसके बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू की। पहली बार में उनकी 497 रैंक आई थी। दूसरी बार में 14 और तीसरी बार यानी साल 2016 में उन्होंने 19वीं रैंक हासिल कर यह परीक्षा पास कर ली। इसके बाद वो आईएएस अफसर बन गई।

Next Stories
1 कॉलेज में कई बार लगा बैक, क्लासरूम का बैकबेंचर यूं बन गया IAS अफसर
2 महानदी ब्रिज के नीचे मिली थी एक्ट्रेस की लाश, सिर और चेहरे पर गहरे जख्म से उठे थे कई सवाल
3 अमिताभ के फैन ने बनाया था ‘बच्चन गैंग’, थ्रिलर फिल्में देख करता था वारदात; ऐसे पकड़ाए थे बदमाश
यह पढ़ा क्या?
X