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59 की उम्र में पश्चिम बंगाल पुलिस के होमगार्ड ने पास की 10वीं की परीक्षा, आर्थिक तंगी के चलते छूट गई थी पढ़ाई

West Bengal Police: पश्चिम बंगाल पुलिस के होमगार्ड प्रोवाश चंद्र मंडल ने 59 की उम्र में दसवीं की परीक्षा पास की है।

59 की उम्र में पश्चिम बंगाल पुलिस के होमगार्ड ने पास की 10वीं की परीक्षा, आर्थिक तंगी के चलते छूट गई थी पढ़ाई
पश्चिम बंगाल पुलिस के होमगार्ड ने 59 की उम्र में दसवीं की परीक्षा पास की है। (Photo Credit – Twitter/ WB Police)

कहते हैं कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती है..बस उसी बात को पश्चिम बंगाल पुलिस के होमगार्ड प्रोवाश चंद्र मंडल ने चरितार्थ कर दिया है। दरअसल, प्रोवाश चंद्र मंडल ने होमगार्ड के पद पर रहते हुए 59 की उम्र में दसवीं की परीक्षा पास कर ली। प्रोवाश को 46 साल पहले आर्थिक तंगी के चलते स्कूल छोड़ना पड़ा था, जिससे उनकी पढ़ाई अधूरी रह गई थी।

फरवरी में होना है रिटायरमेंट

पश्चिम बंगाल पुलिस के होमगार्ड प्रोवाश चंद्र मंडल तीन बच्चों के पिता है। मंडल की दोनों बेटियां पोस्ट-ग्रेजुएट हैं जबकि उनका बेटा ग्रेजुएट है। मंडल का कहना है कि उनके बच्चों ने ही उन्हें प्रेरित किया था कि वह अगले साल फरवरी में रिटायर होने से पहले कम से कम दसवीं पास कर लें।

बरुईपुर पुलिस स्टेशन में है तैनाती

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, मंडल के बारे में बात करते जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वह (मंडल) वर्तमान में बरुईपुर पुलिस जिले में तैनात हैं। होमगार्ड मंडल ने बिधाननगर पौरा मुक्ता विद्यालय में अपना नामांकन (रजिस्ट्रेशन) कराया था, जो पश्चिम बंगाल काउंसिल ऑफ रवींद्र ओपन स्कूलिंग के तहत आता है। जिसके बाद वह इसी साल दसवीं की परीक्षा में शामिल हुए थे।

1976 के बाद छूट गई पढ़ाई

मंडल ने कहा “मैंने 1976 में बंगाली माध्यम के स्कूल से नौवीं कक्षा की परीक्षा पास की थी। उसके बाद मेरा परिवार दूसरी जगह शिफ्ट हो गया और मुझे आर्थिक हालात खराब होने के चलते पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। मंडल ने कहा, उनके पिता चौभागा नाम की जगह पर मिठाई की एक बहुत छोटी दुकान चलाते थे। पुलिस में नौकरी मिलने से पहले वह इसी दुकान में पिता की मदद करते थे।

पत्नी-बच्चों और अधिकारियों को दिया धन्यवाद

पश्चिम बंगाल पुलिस में रहते हुए शहर के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में काम कर चुके मंडल ने बताया कि वह हमेशा से पढ़ना चाहते थे लेकिन नौकरी के चलते कभी पढ़ाई के लिए समय नहीं निकाल पाते थे। पढ़ाई छोड़े उन्हें करीब चार दशक हो चुके थे लेकिन उन्होंने हिम्मत बांधी और फिर एक छात्र बन गए। मंडल अपनी इस सफलता का श्रेय अपने बच्चों, पत्नी और वरिष्ठ सहयोगियों-अधिकारियों को देते हैं।

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