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विकास दुबे की पहचान करने वाले को मंदिर प्रशासन ने थमाया नोटिस, कर्मचारी बोला – पुलिस चाहती है गुंडों को देख आंख-मुंह बंद कर लो

आपको बता दें कि महाकाल मंदिर के कर्मचारी गोपाल सिंह कुशवाहा ने दावा किया था कि जब विकास दुबे मंदिर में पहुंचा था तब सबसे पहले उसकी बातचीत उन्हीं से हुई थी।

kedarnath, ujjain templeविकास दुबे को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था। फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश के कानपुर के कुख्यात डॉन विकास दुबे का आतंक खत्म हो चुका है। लेकिन अभी भी इस मामले में उस शख्स को नहीं खोजा जा सका है जिसने सबसे पहले पुलिस-प्रशासन को विकास दुबे के बारे में बताया था। पुलिस ने विकास दुबे को पकड़वाने वाले को 5 लाख रुपए इनाम देने का ऐलान किया था। लेकिन अब तक यह इनाम किसी को नहीं दिया जा सका है।

अब उज्जैन के जिस महाकाल मंदिर से विकास दुबे को पकड़ा गया था वहां के एक कर्मचारी ने दावा किया है कि उसे पुलिस ने नोटिस थमा दिया है। गोपाल सिंह कुशवाहा नाम के इस कर्मचारी का यह भी दावा है कि उसने ही विकास दुबे को पहली बार देखा और पकड़वाया था। गोपाल सिंह का कहना है कि अब पुलिस ने उन्हें नोटिस थमा दिया है। गोपाल के मुताबिक इस नोटिस में लिखा गया है कि गोपाल और उनके साथी राजेंद्र की गतिविधियां संदिग्ध हैं लिहाजा उन्हें मंदिर से बाहर कर दिया जाए। इस नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए गोपाल ने मी़डिया से कहा कि ‘मंदिर प्रशासन और पुलिस चाहती है कि किसी शातिर को देखो तो आंख बंद कर लो, कुछ न कहो।’

आपको बता दें कि महाकाल मंदिर के कर्मचारी गोपाल सिंह कुशवाहा ने इससे पहले दावा किया था कि जब विकास दुबे मंदिर में पहुंचा था तब सबसे पहले उसकी बातचीत उन्हीं से हुई थी। गोपाल ने कहा था कि ‘उस वक्त उसके (विकास दुबे) कंधों पर एक बैग था। मुझसे इतना ही पूछा कि यह बैग कहां रख दूं। मैंने उसे गेट का रास्ता दिखाया। वह उस तरफ बढ़ गया। वहां पर गरीब भोजन प्रसादी प्रभारी (वर्तमान में निरीक्षक पद पर) राजेन्द्र तिवारी मौजूद थे।

विकास उनसे मिला तो उन्होंने बैठा लिया। पेपरों में उन्होंने फोटो देख रखी थी। उन्होंने मुझे सूचना दी तो मैं भी वहां पहुंच गया। हम दोनों ने उसे बैठा लिया। यह जाहिर नहीं होने दिया कि उसे पहचान गए हैं। उसके बाद गोपाल ने महाकाल चौकी के दरोगा को बुलवा लिया और विकास को उनके सुपुर्द कर दिया।

बता दें कि कानपुर में हुए भीषण गोलीकांड का मुख्य आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे इस कांड के बाद फरार हो गया था। विकास दुबे को जुलाई के महीने में उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया गया था। हालांकि अगले ही दिन पुलिस ने एक एनकाउंटर में विकास दुबे को मार गिराया था। कानपुर में हुए एनकाउंटर में कई पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी।

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