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यूपीए सरकार में IPS ने किया था वीरप्पन को ढेर! 150 लोगों की हत्या के आरोपी कुख्यात चंदन तस्कर की बेटी अब भाजपा के साथ

यह भी कहा जाता है कि साल 1993 में वो एक लड़की का पिता बना था। लेकिन जंगल में बच्ची के रोने की आवाज से उसे पकड़े जाने का डर हो गया था जिसके बाद इस बच्ची को वीरप्पन ने मार दिया था।

crime, crime newsकहा जाता है कि वीरप्पन को छिपने में दिक्कत हो रही थी लिहाजा उसने अपनी बेटी को मार डाला।

कभी 2 राज्यों की सरकारों के लिए कुख्यात चंदन तस्कर ने पुलिस-प्रशासन की नाक में दम कर दिया था। वीरप्पन के नाम से प्रसिद्ध कूज मुनिस्वामी वीरप्पन दक्षिण भारत का कुख्यात चन्दन तस्कर था। चन्दन की तस्करी के अतिरिक्त वह हाथीदांत की तस्करी, हाथियों के अवैध शिकार, पुलिस तथा वन्य अधिकारियों की हत्या व अपहरण के कई मामलों में वांटेड था। साल 2000 में कन्नड़ फिल्मों के मशहूर अभिनेता राजकुमार का अपहरण करने वाले वीरप्पन को पुलिस ने साल 2004 में मार गिराया था।

वीरप्पन को मरे हुए 15 साल से ज्यादा गुजर गए हैं और अब 15 साल बाद एक बार फिर वीरप्पन का नाम सुर्खियों में आया है। वीरप्पन जब मारा गया था तब उस वक्त देश में यूपीए की सरकार थी। अब वीरप्पन की बेटी विद्या वीरप्पन भारतीय जनता पार्टी की तमिलनाडु युवा शाखा की नई उपाध्यक्ष बन गई हैं। वीरप्पन को 150 इंसानों का हत्यारा और करीब 100 हाथियों का कातिल माना जाता है।

विद्या वीरप्पन स्कूल चलाती हैं औऱ उन्होंने खुद बताया था कि उन्होंने सिर्फ एक बार अपने पिता को देखा है। विद्या वीरप्पन ने मीडिया को बताया है कि उनके पिता ने उनसे कहा था कि वो समाजसेवा करें। वीरप्पन का अंत तमिलनाडु पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने किया था। उस वक्त इस टास्क फोर्स का नेतृत्व के विजय कुमार कर रहे थे। वीरप्पन के खात्मे के बाद के विजय कुमार को गृह मंत्रालय में सलाहकार का पद भी दिया गया था। के विजय कुमार ने अपनी किताब ‘वीरप्पन चेज़िंग द ब्रिगांड’ में इस बेरहम तस्कर को लेकर कई खुलासे किये हैं।

बताया जाता है कि 18 जनवरी 1952 को जन्मे वीरप्पन के बारे में कहा जाता है कि उसने 17 साल की उम्र में पहली बार हाथी का शिकार किया था। हाथी को मारने की उसकी फ़ेवरेट तकनीक होती थी, उसके माथे के बींचोंबीच गोली मारना।

वीरप्पन की ख़ूंख़ारियत का ये आलम था कि बताया जाता है कि एक बार उसने भारतीय वन सेवा के एक अधिकारी पी श्रीनिवास का सिर काट कर उससे अपने साथियों के साथ फ़ुटबॉल खेली थी। ये वही श्रीनिवास थे जिन्होंने वीरप्पन के पहली बार गिरफ़्तार किया था। वीरप्पन के बारे में यह भी कहा जाता है कि साल 1993 में वो एक लड़की का पिता बना था। लेकिन जंगल में बच्ची के रोने की आवाज से उसे पकड़े जाने का डर हो गया था जिसके बाद इस बच्ची को वीरप्पन ने मार दिया था।

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