‘रिक्शा चलाओगे’, रिक्शेवाले के बेटे को सब देते थे ताना; IAS बन दिया था जवाब…

पैसे बचाने के लिए दिल्ली जैसे शहर में गोविन्द ने अपना खाना आधा कर दिया। चाय पीना भी बंद कर दिया।

crime, crime newsIAS गोविंद जायसवाल। फोटो सोर्स- फेसबुक, @Govind Jaiswal IAS

बचपन के दिनों में यह लड़का बनारस (वाराणसी) की गलियों में अपने कुछ दोस्तों के साथ खेल-कूद किया करता था। एक दिन यह लड़का खेलने के दौरान अपने एक दोस्त के साथ उसके घऱ चला गया। घर जाने पर उसके दोस्त के पिता नाराज हो गये और उससे कहा कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमारे घर में आने की। ऐसा उन्होंने इसलिए कहा था क्योंकि इस लड़के के पिता नारायाण जायसवाल रिक्शा चलाते थे और शायद एक संपन्न परिवार में रिक्शेवाले के बेटे का जाना उन्हें पसंद नहीं आय़ा।

हालांकि उस वक्त लड़के की उम्र महज 11-12 साल की थी तो उसे यह बातें ज्यादा समझ नहीं आई। आपको बता दें कि उस रिक्शेवाले के लड़के का नाम था गोविंद जायसवाल। गोविंद के पिता रिक्शा चलाते थे और उनका 5 सदस्यों का परिवार बेहद ही तंगहाली में जिंदगी गुजार रहा था। बताया जाता है कि गोविन्द जायसवाल की बड़ी दीदी ममता जब पढाई.के लिए स्कूल जाती थीं तो लोग ताने देते थें की तुम्हे तो दूसरों के घर में बर्तन धोने चाहिए जिससे दो पैसे कमा सको….पढ़ लिख कर क्या करोगी?

इतना ही नहीं गोविन्द से लोग कहा करते थे कि कितने बड़े बनोगे तुम..दो रिक्शा ज्यादा खरीद लोगे खुद भी चलाओगे और दूसरों से भी चलवाओगे..। बचपन में लोगों के ताने सुनकर भी गोविंद कभी टूटे नहीं औऱ कम उम्र में ही तय कर लिया था कि बड़ा होकर कुछ बड़ा ही करना है।

आज हम जिस आईएएस अफसर गोविंद जायसवाल के बारे में आपको बता रहे हैं उन्होंने अपनी जिंदगी में हर मुश्किलों को मात देकर वो मुकाम हासिल किया जिसे पाने का सपना उन्होंने बचपन से ही देखना शुरू कर दिया था। मन में कुछ बड़ा करने की ठानने के बाद खेलने-कूदने की उम्र में गोविंद जायसवाल ने पढ़ाई-लिखाई कर आईएएस बनने को अपना लक्ष्य बनाया। जिसके बाद उनका ज्यादातर समय पढ़ाई में बीतने लगा। बताया जाता है कि गोविंद अपने घर में कानों में रूई लगाकर पढ़ा करते थे ताकि पड़ोस में चलने वाले प्रिंटिंग मशीन और जेनरेटर की आवाज से उनका ध्यान भंग ना हो।

शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल और मॉडर्न कॉलेज से करने के बाद गोविंद को दिल्ली आकर सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी करनी थी। पिता नारायण जायसवाल के पास वाराणसी में थोड़ी जमीन थी और उन्होंने वो जमीन अपने बेटे की पढ़ाई के लिए बेच दी। पिता ने अपने बेटे को 40,000 रुपए देकर दिल्ली भेजा और आईएएस बनने का सपना लेकर गोविंद जायसवाल दिल्ली आ गए।

दिल्ली आने के बाद भी गोविंद की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। पैसों की कमी गोविंद के पास हमेशा रहती थी। पैसे बचाने के लिए दिल्ली जैसे शहर में गोविन्द ने अपना खाना आधा कर दिया। चाय पीना भी बंद कर दिया। वो शारीरीक रूप से कमजोर जरूर हुए पर अपने लक्ष्य को लेकर उनका हौसला और भी मजबूत हो गया।

महज 22 साल की उम्र में साल 2006 में गोविंद जायसवाल ने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। उन्हें 48वां रैंक हासिल हुआ था। गोविंद जायसवाल ने एक साक्षात्कार में कहा था कि वो एपीजे अब्दुल कलाम से काफी प्रभावित हैं। वो पूर्व राष्ट्रपति की किताबें पढ़ा करते हैं। हिंदी मीडियम से सफलता हासिल करने वाले इस आईएएस ने कहा था कि महात्मा गांधी के बाद कलाम ने हमें सपने देखने की ताकत दी।

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