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पुलिसवालों ने कार रुकवाकर ली तलाशी, नहीं मिला कुछ तो खुद ही रख दी शराब; 7 लाख वसूलने वाले 2 दारोगा समेत कई पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज

प्रधान छत्रपाल की तहरीर पर दारोगा नितिन शर्मा, मुकेश कुमार, सिपाही देवेंद्र, धनंजय व एक अज्ञात होमगार्ड के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया है।

Author बरेली | Published on: December 11, 2019 2:56 PM
पुलिसकर्मी, प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

उत्तर प्रदेश के बरेली में ग्राम प्रधान से सात लाख रुपए वसूलने के आरोप में थाना के दो दरोगा समेत दो सिपाही और एक होमगार्ड के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। यह घटना जिले की आंवला तहसील क्षेत्र के गांव ढकिया की है। मामले में थाना अलीगंज में मुकदमा दर्ज किया गया था। बता दें कि पहले में की गई शिकायत की जांच में रुपए वसूलने के आरोप शुरुआती जांच में सही मिले हैं जिस पर एसएसपी ने चारों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। वहीं मामले की जांच चल रही है।

पैसे वापस देने की जानकारी पुलिस को नहींः वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शैलेश पांडेय ने बताया कि मामले की जानकारी होने पर क्षेत्राधिकारी (सीओ) को जांच दी थी। शुरुआती जांच में आरोप सही पाए जाने पर चारों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। प्रधान छत्रपाल की तहरीर पर दारोगा नितिन शर्मा, मुकेश कुमार, सिपाही देवेंद्र, धनंजय व एक अज्ञात होमगार्ड के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में उनसे बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह फरार हो गए हैं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि रुपए वापस दिए गए या नहीं, इसकी जानकारी अभी नहीं है।

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पुलिस जबरन शराब रखकर कार में प्रधान का वीडियो बनवायाः एसपी देहात संसार सिंह बताया कि सोमवार (09 दिसंबर) को ढकिया के प्रधान छत्रपाल ने ग्रामीणों के साथ अलीगंज थाने पहुंच कर घेराव किया था। उनका आरोप था कि आठ दिसंबर को वह बिशारतगंज के गांव मिलक बहादुरगंज से वापस आ रहे थे। उसी दौरान गांव भीकमपुर के पास दारोगा नितिन शर्मा और मुकेश कुमार ने सिपाही देवेंद्र कुमार, धनंजय व एक होमगार्ड से उनकी कार रुकवाई। कार में मादक पदार्थ होने की बात कही और तलाशी लेने लगे। जब कार में कुछ नहीं मिला तो सभी पुलिस कर्मी कार समेत उन्हें ऐंठपुर के जंगल में ले गए। वहां कार में दारोगा नितिन ने मादक पदार्थ रखकर वीडियो बनाया। फिर उसे थाना अलीगंज ले गए।

शुरुआती जांच में दोषी पाए गए पुलिस वालेः प्रधान छत्रपाल ने बताया कि थाने में झूठा मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने का डर भी दिखाया था। वहीं सात लाख रुपए लेने के बाद ही उसे छोड़ा गया। छत्रपाल ने मामले की तहरीर एसपी देहात को दी थी जिस पर मामले की जांच सीओ आंवला को दी गई थी। मंगलवार (10 दिसंबर) की देर शाम एसएसपी शैलेश पांडेय ने केस का अपडेट लेते हुए सभी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। मामले की विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।

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