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वो बाहुबली जिससे मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद भी दुश्मनी लेने से कतराते हैं, दाउद के गुरु रहे माफिया डॉन सुभाष ठाकुर की कहानी…

माफिया डॉन की लिस्ट में शुमार मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद भी कभी इस सबसे बड़े माफिया से दुश्मनी मोल लेने का जोखिम नहीं उठाते हैं। मुन्ना बजरंगी भी सुभाष ठाकुर का चरणगोह था।

crime, crime news, dawoodयह माफिया कभी दाउद का गुरु भी रहा।

पूर्वांचल के इलाकों में माफियाओं का इतिहास काफी पुराना रहा है। आज हम एक ऐसे माफिया के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जिसकी अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद से भी दुश्मनी है और मुख्तार अंसारी तथा अतीक अहमद जैसे नामी कुख्यात भी उससे पंगा नहीं लेते। हम बात कर रहे हैं गैंगस्टर सुभाष ठाकुर की। जेल की चहारदिवारियों में कैद सुभाष ठाकुर के बारे में कहा जाता है कि वो जेल के अंदर ‘बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध है।

बताया जाता है कि 90 के दशक के आसपास उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक जवान लड़का मुंबई में अपनी किस्मत आजमाने आया था। शराफत की दुनिया में शायद उसे कोई मुकाम हासिल नहीं हो सका और फिर वो जरायम की दुनिया में दाखिल हो गया। मुंबई में कई छोटे-बड़े अपराध करने के बाद वो बड़ी वारदातों को अंजाम देने के फिराक में रहने लगा। जिसके बाद जुर्म की काली दुनिया में सुभाष ठाकुर के नाम का दबदबा बहुत तेजी से बढ़ता गया।

दाउद का बना गुरु

कहा जाता है कि जिस वक्त सुभाष ठाकुर मुंबई में अपराध की दुनिया में बड़ा नाम बन चुका था उस वक्त दाउद इब्राहिम इसी दुनिया में अपने पांव पसारने की कोशिश में था। दाउद की कोशिश खत्म हुई सुभाष ठाकुर के पास पहुंच कर। सुभाष ठाकुर की सरपस्ती में आते ही दाउद तेजी से अपराध जगत में बढ़ने लगा और फिर उन्हें अपना गुरु मानने लगा। एक वक्त ऐसा भी था जब सुभाष ठाकुर, छोटा राजन और दाउद इब्राहिम एक साथ काम करते थे। तब इन तीनों का एक ही दुश्मन था और वो था गवली गिरोह।

इस गिरोह के शूटरों ने 26 जुलाई 1992 को मुंबई में दाउद के बहनोई इस्माइल पारकर की हत्या कर दी। इस हत्या का बदला लेने के लिए दाऊद ने सुभाष ठाकुर और छोटा राजन का इस्तेमाल किया। इन दोनों ने मिलकर 12 सितंबर 1992 को मुंबई के जेजे अस्पताल में गवली के शूटर शैलेश की हत्या कर दी। यह हत्याकांड काफी सुर्खियों में रहा था क्योंकि उस वक्त इस तरह खुलेआम शूटआउट में होना एक बड़ी बात थी।

दाउद से हुई दुश्मनी

जुर्म की दुनिया में दोस्ती की उम्र कितनी होगी? इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। दाउद इब्राहिम और सुभाष ठाकुर की जोड़ी उस वक्त टूटी जब दाउद ने मुंबई ब्लास्ट कराया। इसके बाद इनकी रंजिश इतनी बढ़ी की दाउद अपने ही गुरु की जान का दुश्मन बन बैठा। अरुण गवली गैंग के शूटर शैलेश हल्दानकर समेत दो पुलिस वालों की हत्या और पांच अन्य लोगों को घायल करने के आरोप में साल 2000 में सुभाष ठाकुर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद नहीं लेते पंगा

कहा जाता है कि जब सुभाष ठाकुर खुली हवा में सांस लिया करता था तब उसके खौफ से अच्छे-अच्छों की सांसे अटकी रहती थी। यूपी के माफिया डॉन की लिस्ट में शुमार मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद भी कभी इस सबसे बड़े माफिया से दुश्मनी मोल लेने का जोखिम नहीं उठाते हैं। मुन्ना बजरंगी भी सुभाष ठाकुर का चरणगोह था। बताया जाता है कि पूर्वांचल के इलाकों में सुभाष ठाकुर की पहचान किसी बाहुबली जैसी थी। किसी भी चुनाव में उसका दखल बहुत रहता था। खासकर पूर्वांचल की बात करें तो वहां की कई सीटों पर सुभाष ठाकुर उर्फ बाबा का सीधा प्रभाव माना जाता था।

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