IPS विश्वास नांगरे पाटील जिनके हाथों मारा गया था 26/11 हमले का आंतकवादी, सख्त मिजाज के इस अफसर पर अक्षय बना चुके हैं फिल्म

ग्रेजुएशन के बाद जब विश्वास नांगरे पाटील यूपीएससी की तैयारी में जुटे तो मात्र 25 साल की उम्र में ही उन्होंने इसे क्रैक कर लिया। जिसके बाद उन्हें आईपीएस के लिए चुन लिया गया।

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फिटनेस के लिए भी मशहूर हैं IPS विश्वास नांगरे पाटील (फोटो- @rajvnp)

UPSC: सिविल सेवा की परीक्षा पास करने बाद कुछ अधिकारी ऐसे आइकॉन बन जाते हैं जिनकी पहचान उनके काम की ख्याति से होती है। आईपीएस विश्वास नांगरे पाटील की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वर्तमान में मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त पोस्ट पर तैनात पाटील अपने सख्त मिजाज और हमेशा ऐक्टिव रहने के लिए जाने जाते हैं।

इनके काम करने का स्टाइल हो या सामाजिक सरोकार हमेशा चर्चाओं में बना रहता है। यही कारण है कि सूर्यवंशी फिल्म के लिए अक्षय कुमार ने अपना किरदार इन्हीं पर आधारित कर लिया। अक्षय ने हाल ही में खुद इसकी जानकारी देते हुए कहा कि उनका ये कैरेक्टर आईपीएस विश्वास पाटील पर आधारित है।

सफर की शुरूआत- महाराष्ट्र में सांगली जिले के कोकरुड के एक छोटे से ग्रामीण शहर से ताल्लुक रखने वाले विश्वास पाटील ने अपनी स्कूली शिक्षा शिराला के न्यू इंग्लिश स्कूल से पूरी की। इसके बाद 1988 में पाटील ने 10 वीं कक्षा में 88% अंक प्राप्त किए। विश्वास ने कोल्हापुर के राजाराम कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उनके घर की आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव ही रहा, जिसके कारण उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा।

जब बने आईपीएस- ग्रेजुएशन के बाद जब पाटील यूपीएससी की तैयारी में जुटे तो मात्र 25 साल की उम्र में ही उन्होंने इसे क्रैक कर लिया। जिसके बाद उन्हें आईपीएस के लिए चुन लिया गया। उसके बाद 1997 बैच के महाराष्ट्र कैडर के इस अधिकारी का काम ही पहचान बन गया। आईपीएस बनने के बाद जहां एक ओर वो अपनी नौकरी करते रहे तो वहीं दूसरी ओर उन्हें आगे की पढ़ाई भी जारी रखी। यूपीएससी के बाद उन्होंने पुलिस प्रबंधन में एमबीए की पढ़ाई पूरी की।

मुम्बई हमला- विश्वास नांगरे पाटील 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के दौरान दक्षिण मुंबई में पुलिस क्षेत्र -1 के उपायुक्त थे। उन्होंने 26 नवंबर को ताज होटल में आंतकी हमले के बाद पुलिस टीम का नेतृत्व किया और एक आतंकवादी को मार गिराया था। द बेटर इंडिया से बात करते हुए पाटील ने कहा था कि रात करीब 9:40 बजे आतंकी घुसे थे। वो लोगों को मार रहे थे। मैंने अपने रेडियो ऑपरेटर के साथ ताज के सुरक्षा प्रमुख के साथ पीछे की ओर से प्रवेश किया। आतंकवादी पहले से ही पोजिशन बना चुके थे और आधुनिक हथियारों से लैस थे। इसके बाद भी सामान्य हथियारों से लैस इनकी टीम ने ना केवल आतंकियों का मुकाबला किया, बल्कि उन्हें मार भी गिराया।

हमले के बाद 2013 में गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट में विश्वास नांगरे के बारे में कहा गया- “पाटील ने अकुशल और कम तैयार लोगों का नेतृत्व किया और ताज होटल के अंदर लड़ाई में एक आतंकवादी को गोली मार दी। यह उन दिनों के मानकों से भी असाधारण साहस का कार्य था”। 26/11 के मुंबई हमलों में उनकी वीरता के लिए राष्ट्रपति ने उन्हें पुलिस पदक से सम्मानित किया था।

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